पत्नी के साथ पति ने कर दिया बड़ा कां#ड/बेलन अंदर ठूस दिया/

.
.

बीकानेर के बेरासर गांव में अवैध संबंधों का खौफनाक अंत: पति ने पत्नी की हत्या कर खुद पुलिस को बुलाया

विशेष संवाददाता, बीकानेर

राजस्थान के बीकानेर जिले के एक छोटे से गांव बेरासर में जनवरी 2026 में घटी एक दर्दनाक और सनसनीखेज घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। मेहनती किसान भीम सिंह द्वारा अपनी पत्नी रचना देवी की निर्मम हत्या किए जाने के मामले ने न केवल ग्रामीण समाज को स्तब्ध किया है, बल्कि रिश्तों, विश्वास और नैतिक पतन पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

यह घटना 15 जनवरी 2026 की है, जब कथित रूप से पत्नी के अवैध संबंधों से आक्रोशित होकर भीम सिंह ने अपनी पत्नी की जान ले ली। पुलिस ने आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।


मेहनती किसान की पहचान

बेरासर गांव के निवासी भीम सिंह लगभग तीन एकड़ कृषि भूमि पर सब्जियां उगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। गांव के लोगों के अनुसार, भीम सिंह एक ईमानदार और मेहनती व्यक्ति थे, जो दिन-रात खेतों में काम करते थे। उनकी सादगी और परिश्रम के कारण गांव में उनका सम्मान था।

परिवार में उनकी पत्नी रचना देवी थीं। दोनों के पास घर के साथ लगी दो खाली दुकानें भी थीं। आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से रचना देवी ने एक दुकान में किराना स्टोर खोलने और दूसरी दुकान किराए पर देने का सुझाव दिया। भीम सिंह ने सहमति जताई और 5 दिसंबर 2025 को किराना दुकान शुरू कर दी गई।

शुरुआती दिनों में दुकान अच्छी चलने लगी। ग्राहकों की संख्या बढ़ी और घर की आमदनी में इजाफा हुआ। बाहरी तौर पर सब कुछ सामान्य और सुखद प्रतीत हो रहा था।


किराए पर दी गई दूसरी दुकान

कुछ ही दिनों बाद गांव का युवक आशु, जो पेशे से नाई था, दूसरी दुकान किराए पर लेने पहुंचा। रचना देवी ने ₹1600 मासिक किराए पर दुकान देने की सहमति दी। आशु ने वहीं अग्रिम राशि दे दी और अपनी सैलून की दुकान शुरू कर दी।

दोनों दुकानों की निकटता के कारण रचना और आशु के बीच बातचीत बढ़ने लगी। धीरे-धीरे यह संबंध निजी मुलाकातों में बदल गया। पुलिस जांच के अनुसार, 24 दिसंबर 2025 को पहली बार दोनों के बीच अनुचित संबंध स्थापित हुए।

बताया जा रहा है कि यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। रचना देवी कथित रूप से आशु से आर्थिक लाभ भी लेती रहीं।


होटल में देखे गए दोनों

5 जनवरी 2026 को दोनों शहर के एक होटल में देखे गए। गांव के ही एक युवक रणबीर ने उन्हें होटल से निकलते हुए पहचान लिया और यह बात सीधे भीम सिंह तक पहुंचा दी।

भीम सिंह ने पहले मामले को सार्वजनिक न करने का निर्णय लिया और पत्नी को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने आशु को दुकान खाली करने के लिए कह दिया। आशु ने गांव छोड़ दिया और कहीं और दुकान खोल ली।

ऐसा प्रतीत हुआ कि मामला यहीं समाप्त हो जाएगा। लेकिन घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ लिया।


पुराने दोस्त की एंट्री

भीम सिंह का मित्र बिल्लू, जो पेशे से ट्रक ड्राइवर था, दो महीने बाद गांव लौटा। 30 दिसंबर 2025 को वह खेत में भीम सिंह से मिला। दोनों ने शराब पी और शाम को घर लौट आए।

पुलिस के अनुसार, उसी रात भीम सिंह के नशे में सो जाने के बाद बिल्लू और रचना के बीच अवैध संबंध स्थापित हुए। इसके बाद भी दोनों का संपर्क जारी रहा।

15 जनवरी 2026 को सुबह जब भीम सिंह खेत गए हुए थे, बिल्लू रचना से मिलने घर पहुंचा। दोनों कमरे में थे कि अचानक भीम सिंह किसी कारणवश जल्दी घर लौट आए।


रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद घटना

घर के दरवाजे पर दस्तक देने पर भीतर से कोई जवाब नहीं मिला। शक होने पर भीम सिंह ने जोर से आवाज लगाई। इसी दौरान बिल्लू दीवार फांदकर भाग गया।

भीम सिंह ने पत्नी को घर में अकेला पाया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, गुस्से में उन्होंने पत्नी के हाथ-पैर बांध दिए और उसके साथ गंभीर हिंसक कृत्य किया, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।

घटना के तुरंत बाद भीम सिंह ने स्वयं पुलिस को फोन कर घटना की सूचना दी।


पुलिस कार्रवाई

पुलिस मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लिया और आरोपी भीम सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में भीम सिंह ने पत्नी के अवैध संबंधों का हवाला देते हुए अपने अपराध को स्वीकार किया।

पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत हत्या का मामला दर्ज कर चार्जशीट तैयार की।

जांच अधिकारियों के अनुसार, “चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, कानून अपने हाथ में लेना अपराध है। हत्या का कोई भी औचित्य नहीं हो सकता।”


सामाजिक और कानूनी पहलू

यह घटना केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं बल्कि ग्रामीण समाज में पनपती जटिलताओं का उदाहरण है। आर्थिक लालच, वैवाहिक अविश्वास और सामाजिक दबाव ने मिलकर इस त्रासदी को जन्म दिया।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत में यह मामला ‘आवेग में की गई हत्या’ (कुलिंग इन हीट ऑफ पैशन) के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन यह अंतिम निर्णय न्यायालय पर निर्भर करेगा।

यदि अदालत इसे पूर्वनियोजित हत्या मानती है, तो आरोपी को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।


गांव में चर्चा और प्रतिक्रिया

बेरासर गांव में इस घटना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि भीम सिंह ने अत्यधिक आक्रोश में कदम उठाया, जबकि अन्य लोग इसे अमानवीय कृत्य मानते हैं।

गांव के एक बुजुर्ग ने कहा, “गलती चाहे किसी की भी हो, जान लेने का अधिकार किसी को नहीं है।”

वहीं कुछ लोग मानते हैं कि “रिश्तों में विश्वास टूटने पर व्यक्ति मानसिक संतुलन खो सकता है, लेकिन कानून का पालन करना ही समाज की नींव है।”


रिश्तों की विडंबना

यह मामला दिखाता है कि विश्वास का टूटना कितनी भयानक परिणति तक पहुंच सकता है। विवाह जैसे पवित्र संबंध में पारदर्शिता और संवाद की कमी कभी-कभी विनाशकारी साबित होती है।

रचना देवी की कथित लालच और संबंधों ने एक परिवार को बिखेर दिया, जबकि भीम सिंह का आवेश उन्हें जेल की सलाखों तक ले गया।

दोनों के फैसलों ने एक ऐसी कहानी लिख दी, जिसका अंत त्रासदी में हुआ।


न्याय का इंतजार

अब यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत तय करेगी कि भीम सिंह को किस प्रकार की सजा दी जाए।

यह घटना एक गंभीर चेतावनी भी है—

अविश्वास और छल का परिणाम विनाशकारी हो सकता है।

क्रोध में लिया गया निर्णय जीवन भर का पश्चाताप बन सकता है।

कानून से ऊपर कोई नहीं है।

बीकानेर की यह घटना केवल एक अपराध कथा नहीं, बल्कि सामाजिक, नैतिक और कानूनी विमर्श का विषय बन चुकी है।

आगे अदालत का फैसला इस पूरे मामले को नई दिशा देगा, लेकिन फिलहाल बेरासर गांव उस दर्दनाक सुबह को भूल नहीं पा रहा है, जब एक परिवार का अंत हुआ और एक किसान जेल की कोठरी में पहुंच गया।