पुनर्जन्म | 4 साल बाद बेटी के पेट से बाप का जन्म हुवा | पुनर्जन्म की कहानी मरकर फिर जिन्दा हो गया
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बेटी के पुत्र में पिता का जन्म – एक रहस्यमयी कहानी
एक आत्मा की अधूरी यात्रा
भाग 1: अधूरी विदाई
सर्दियों की एक शाम थी। दिल्ली की गलियों में हल्का कुहासा छाया हुआ था। उसी शाम, एक आलीशान बंगले के अंदर, परिवार के लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त थे। घर के सबसे बड़े सदस्य, 65 वर्षीय श्रीमान शंकर लाल, अपनी आरामकुर्सी पर बैठे, पुरानी किताबें पढ़ रहे थे। उनके चेहरे पर जीवन का अनुभव और आंखों में किसी खोई हुई चीज़ की तलाश थी।
शंकर लाल का स्वास्थ्य पिछले कुछ महीनों से बिगड़ रहा था। परिवार के लोग उनकी देखभाल करते, लेकिन वे अक्सर अकेलेपन की शिकायत करते। एक रात, उन्होंने अपने बेटे अमित से कहा, “बेटा, लगता है मेरे जीवन की यात्रा अब पूरी होने वाली है। लेकिन मेरे मन में एक अधूरी इच्छा है।”
अमित ने पूछा, “क्या इच्छा है पापा?”
शंकर लाल बोले, “मेरी छोटी बहन राधा की शादी के बाद मैं उससे कभी नहीं मिल पाया। मुझे हमेशा लगता था कि मेरी आत्मा को चैन तभी मिलेगा जब मैं उससे फिर मिलूंगा।”
कुछ ही दिनों बाद, शंकर लाल का निधन हो गया। पूरे परिवार में शोक का माहौल था। सभी जानते थे कि वे अपनी बहन राधा को बहुत याद करते थे।
भाग 2: एक नई शुरुआत
पांच साल बीत गए। अमित अब खुद पिता बन चुका था। उसकी बेटी, सिया, तीन साल की थी। सिया बचपन से ही अलग थी। वह ज्यादातर समय चुपचाप रहती, लेकिन कभी-कभी ऐसी बातें करती, जो उसके परिवार को हैरान कर देतीं।
एक दिन, सिया ने अपने दादी से पूछा, “दादी, क्या राधा चाची अब भी हमारे घर आती हैं?”
दादी चौंक गईं। “तुमने राधा चाची का नाम कैसे सुना?”
सिया ने मुस्कुरा कर कहा, “मैं जानती हूं, वह मेरी छोटी बहन थी।”
दादी ने यह बात अमित को बताई। अमित ने सोचा, शायद सिया ने घर के बड़ों की बातें सुन ली होंगी। लेकिन अगले कुछ दिनों में, सिया ने कई ऐसी बातें कहीं, जो केवल शंकर लाल ही जानते थे।
भाग 3: पुरानी यादें लौट आईं
एक शाम, अमित सिया को पार्क में घुमा रहा था। अचानक, सिया ने कहा, “पापा, मुझे वह पीपल का पेड़ दिखाना है, जिसके नीचे मैंने राधा को झूला झुलाया था।”
अमित हैरान रह गया। वह पेड़ उनके पुराने गांव में था, जहां सिया कभी गई ही नहीं थी। अमित ने अपने पिता की पुरानी डायरी पढ़ी। उसमें वही घटनाएं लिखी थीं, जो सिया बता रही थी।

अब अमित को शक होने लगा कि सिया के अंदर उसके पिता शंकर लाल की आत्मा है। उसने परिवार के अन्य सदस्यों से बात की। सबने माना कि सिया की बातें और आदतें बिल्कुल शंकर लाल जैसी हैं।
भाग 4: रहस्य का खुलासा
अमित ने सिया को लेकर अपने पुराने गांव जाने का फैसला किया। गांव पहुंचने पर, सिया ने बिना किसी की मदद के, घर का रास्ता बता दिया। उसने घर के अंदर जाकर एक पुराना संदूक निकाला, जिसमें शंकर लाल की बचपन की चीजें रखी थीं।
गांव के बुजुर्ग भी हैरान थे। सिया ने गांव के मंदिर के पुजारी से कहा, “पंडित जी, आपने मेरी बहन राधा की शादी में जो प्रसाद दिया था, वह बहुत मीठा था।”
पंडित जी की आंखों में आंसू आ गए। वह बोले, “यह बात तो केवल शंकर लाल ही जानता था।”
भाग 5: अधूरी इच्छा की पूर्ति
अमित ने अपनी बुआ राधा को ढूंढा और उन्हें गांव बुलाया। जब राधा आई, सिया ने उन्हें गले लगा लिया और बोली, “बहन, अब मेरी आत्मा को शांति मिल गई।”
राधा भी रो पड़ी। दोनों ने मिलकर पुराने दिनों की बातें कीं। परिवार ने पहली बार पुनर्जन्म की शक्ति को महसूस किया। सबको लगने लगा कि आत्मा की यात्रा सचमुच अधूरी इच्छाओं को पूरा करने के लिए लौटती है।
भाग 6: नई पहचान
समय बीतता गया। सिया अब सामान्य बच्चों की तरह रहने लगी। उसकी पुरानी बातें धीरे-धीरे कम होती गईं। लेकिन परिवार के लिए वह हमेशा खास रही। अमित ने अपने पिता की यादों को सिया के बचपन में जीवित पाया।
सिया ने एक दिन अपने पापा से कहा, “पापा, अब मैं सिर्फ आपकी बेटी हूं।”
अमित मुस्कुरा कर बोला, “हां बेटा, अब तुम्हारा बचपन शुरू हुआ है।”
भाग 7: आत्मा की शांति
अंत में, अमित ने अपने पिता की अधूरी इच्छा पूरी करने के लिए गांव में एक स्कूल बनवाया, जिसका नाम ‘शंकर लाल मेमोरियल स्कूल’ रखा। वहां हर साल बच्चों को आत्मा और पुनर्जन्म की कहानियां सुनाई जाती हैं।
सिया की कहानी गांव भर में फैल गई। लोग दूर-दूर से आकर पूछते, “क्या आत्मा सच में लौटती है?”
अमित बस मुस्कुरा कर कहता, “कभी-कभी, जब किसी की इच्छा अधूरी रह जाती है, तो आत्मा नए रूप में लौटती है।”
सीख:
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में अधूरी इच्छाएं आत्मा को चैन नहीं लेने देतीं। कभी-कभी, पुनर्जन्म के रूप में आत्मा लौटती है, ताकि वह अपना अधूरा काम पूरा कर सके। रिश्तों की डोर बहुत मजबूत होती है, और प्यार की शक्ति हर जन्म में साथ रहती है।
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