“हां, मैंने ब्रेक काट दिए। कल सुबह जब वह मंदिर जाएगी, एक्सीडेंट हो जाएगा।”

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“हां, मैंने ब्रेक काट दिए। कल सुबह जब वह मंदिर जाएगी, एक्सीडेंट हो जाएगा।”
यह शब्द मेरे कानों में गूंज रहे थे। मैं दरवाजे के बाहर खड़ी थी, और मेरे हाथ से मेरा पर्स जमीन पर गिर गया था। मेरी सांसें थम सी गई थीं। मेरी अपनी बहू, मेरे अपने बेटे के सामने, मेरी मौत की योजना बना रही थी। और मेरा बेटा? वह चुप था, बिल्कुल चुप।

मैं धीरे-धीरे पीछे हटकर बाहर की तरफ कदम बढ़ाने लगी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, मेरे हाथ कांप रहे थे, लेकिन मेरा दिमाग एकदम साफ था। मुझे पता था कि मुझे क्या करना है। पर उन्हें नहीं पता था कि मैं कौन हूं। उन्हें यह भी नहीं पता था कि मैंने 28 साल तक हजारों बच्चों को गणित पढ़ाया है। मैंने उन्हें सिखाया था कि हर समस्या का हल होता है, बस सही तरीके से सोचना पड़ता है। और आज मुझे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी समस्या का हल निकालना था।

नलिनी शुक्ला: एक साधारण महिला की असाधारण कहानी

मेरा नाम नलिनी शुक्ला है। मेरी उम्र 67 साल है। मैं नोएडा सेक्टर 62 में रहती हूं। मेरा एक तीन बेडरूम का मकान है, जिसे मैंने और मेरे पति रमेश ने मिलकर बनाया था। लेकिन रमेश अब इस दुनिया में नहीं हैं। चार साल हो गए। लोग मुझे देखते हैं तो एक साधारण बूढ़ी औरत समझते हैं — सफेद बाल, सूती साड़ी, चश्मा, सुबह पूजा करती हूं, खाना बनाती हूं अपने बेटे और बहू के लिए, पोते को स्कूल छोड़ने जाती हूं कभी-कभी। पर यह सिर्फ सतही सच्चाई है।

असली सच्चाई यह है कि मैंने 28 साल तक गणित पढ़ाया है। मेरा अपना ट्यूशन सेंटर था, जिसमें 500 से ज्यादा बच्चों को पढ़ाया। उनमें से कई आज बड़े पदों पर हैं — पुलिस में, वकालत में, इंजीनियरिंग और डॉक्टरी में। सब मुझे आज भी टीचर जी बुलाते हैं। मेरे पास 55 लाख की एफडी है, 45 लाख की LIC पॉलिसी है, और यह मकान जिसकी कीमत 95 लाख है, सब कुछ मेरे नाम पर है।

पर मेरी बहू को लगता था कि मैं एक बेवकूफ, कमजोर बुढ़िया हूं, जिसे आसानी से खत्म किया जा सकता है। यह उसकी सबसे बड़ी गलतफहमी थी।

शादी की शुरुआत और बहू का असली चेहरा

छह साल पहले मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था जब मेरा इकलौता बेटा कार्तिक ने निकिता से शादी की। कार्तिक 38 साल का था और एक आईटी कंपनी में काम करता था। निकिता पढ़ी-लिखी, एमबीए की छात्रा, एक कॉर्पोरेट ऑफिस में काम करती थी। सुंदर, स्मार्ट और पहली नजर में सब कुछ ठीक-ठाक था।

लेकिन धीरे-धीरे उसका असली चेहरा सामने आने लगा। छोटी-छोटी बातों से शुरुआत हुई — मेरे बनाए खाने में शिकायतें, मेरे कपड़ों पर ताने। “मम्मी जी, आजकल ऐसा खाना कौन बनाता है? मुझे हेल्दी खाना चाहिए।” “आप हमेशा इतनी पुरानी साड़ी क्यों पहनती हैं? लोग क्या सोचेंगे?” मैं चुप रहती थी, सोचती थी शायद उसे एडजस्ट होने में समय लग रहा है।

पर समय के साथ उसकी बातें और कड़वी होती गईं, रवैया अकड़ू और नापसंद। दो साल पहले दिवाली के कुछ दिन पहले निकिता ने मुझसे कहा, “मम्मी जी, आपके नाम पर बहुत सारी प्रॉपर्टी है। अगर आप इसे कार्तिक के नाम ट्रांसफर कर दें तो टैक्स बेनिफिट मिलेगा।” मैंने कहा, “बेटा, यह घर तो मेरे बाद तुम्हारा ही होगा। अभी मेरे नाम पर रहने दो। मुझे सुरक्षा महसूस होती है।”

उसका चेहरा अचानक बदल गया। “सुरक्षा? हम आपको बाहर निकाल देंगे।” उसने गुस्से से कहा। उस दिन से उसका व्यवहार और बिगड़ गया। वह कार्तिक से शिकायतें करने लगी कि मैं उसे बहू नहीं समझती।

धोखाधड़ी और हत्या की साजिश

छह महीने बाद मुझे बैंक से फोन आया कि मेरे नाम पर लोन के लिए आवेदन हुआ है। मैंने कभी लोन नहीं लिया था। बैंक जाकर देखा तो मेरे हस्ताक्षर नकली थे। मैंने निकिता से पूछा, तो उसने कहा, “मैंने सोचा था जरूरत पड़ी तो लोन ले लेंगे। आप क्यों इतना सोचती हैं?”

मुझे गुस्सा आया, पर मैंने बैंक में जाकर आवेदन रद्द करवा दिया। निकिता ने कार्तिक को भी फंसाया था, और वह चुप था। मैं समझ गई कि मेरा बेटा अपनी पत्नी के प्यार में अंधा हो गया है।

सावधानी और सबूत इकट्ठा करना

मैंने अपनी पुरानी आदतों को याद किया — जब कोई समस्या आती थी, तो घबराने की बजाय सबूत इकट्ठा करती थी। मैंने एक डायरी शुरू की, हर घटना, तारीख, सब कुछ लिखने लगी। फिर मेरे पुराने छात्र और पुलिस इंस्पेक्टर दिनेश ने मुझे एक छोटा मोबाइल फोन दिया, जिसमें रिकॉर्डिंग का फीचर था।

फूड पॉइजनिंग और ब्रेक काटना

छह महीने पहले मुझे तेज बुखार और पेट दर्द हुआ। अस्पताल में इलाज हुआ, डॉक्टर ने कहा फूड पॉइजनिंग है। मुझे शक हुआ कि निकिता ने खाना खराब किया था क्योंकि मुझे ही बीमारी हुई थी।

फिर एक दिन मेरी पुरानी छात्रा रोहित ने मेरी कार की सर्विसिंग करते हुए बताया कि मेरी कार की ब्रेक लाइन काट दी गई है। यह जानबूझकर किया गया था। मैं डर गई।

बहू की साजिश का पर्दाफाश

मैंने अपने छात्र तन्मय और दिनेश की मदद से निकिता की फाइनेंशियल स्थिति की जांच कराई। पता चला कि उसके ऊपर 12 लाख का कर्ज है, क्रेडिट कार्ड का कर्ज भी है। उसे पैसों की सख्त जरूरत थी।

मैंने योजना बनाई। एक दिन जब निकिता और कार्तिक मेरी मौत की साजिश रच रहे थे, मैं छुपकर सब सुन रही थी और रिकॉर्ड कर रही थी। निकिता कह रही थी, “हां, मैंने ब्रेक काट दिए। कल सुबह जब वह मंदिर जाएगी, एक्सीडेंट हो जाएगा।”

पुलिस में शिकायत और न्याय

मैंने सारी रिकॉर्डिंग पुलिस को दी। एफआईआर दर्ज हुई। निकिता को अटेम्प्टेड मर्डर, फ्रॉड, फर्जी हस्ताक्षर के आरोप में गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया।

बेटे का सुधरना और नया जीवन

कार्तिक ने मुझसे माफी मांगी। अब वह मेरे साथ है, ज्यादा जिम्मेदार बन गया है। वह खाना बनाने में मेरी मदद करता है और मेरा सम्मान करता है।

संदेश

मैं सभी बुजुर्गों से कहना चाहती हूं कि कभी हार मत मानिए। अपने हक के लिए लड़िए, सबूत इकट्ठे कीजिए, मदद मांगिए। उम्र कमजोरी नहीं, बल्कि अनुभव और ताकत है।