बालिका वधू की आनंदी अब क्यों नहीं दिखाई देती है टीवी सीरियल में ?

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बालिका वधू की आनंदी: अविका गौर का सफर, संघर्ष और आज की सच्चाई

परिचय

10 साल की मासूम बच्ची ने पूरे भारत का दिल जीत लिया था—बालिका वधू की आनंदी। करोड़ों लोग टीवी के सामने बैठकर उसकी मासूमियत पर रो पड़े थे। लेकिन आज वही आनंदी, यानी अविका गौर, टीवी सीरियल्स में क्यों नहीं दिखाई देती? उसकी जिंदगी में ऐसा क्या हुआ कि वह इंडस्ट्री की सबसे कंट्रोवर्शियल एक्ट्रेस बन गई? यह कहानी सिर्फ एक स्टार की नहीं, बल्कि एक लड़की के बचपन, संघर्ष, फेम और विवादों की है।

शुरुआत: एक मिडिल क्लास परिवार की बेटी

अविका गौर का जन्म 30 जून 1997 को मुंबई के एक गुजराती परिवार में हुआ। पिता समीर गौर एक छोटे बिजनेस चलाते थे, मां चेतना गौर घरेलू महिला थीं। परिवार में कभी पैसों की तंगी रहती थी, लेकिन माता-पिता ने हमेशा कोशिश की कि बेटी को खुश रखें। अविका पढ़ाई में औसत थी, लेकिन स्कूल के हर फंक्शन, नाटक और एक्टिंग में सबसे आगे रहती थी। टीचर्स कहते थे—यह लड़की या तो एक्टर बनेगी या फेल हो जाएगी।

बहुत छोटी उम्र से ही अविका कैमरा फ्रेंडली थी। एक्सप्रेशन, पोज़िंग, एक्टिंग—सब कुछ नेचुरल था। टीवी देखना, खासकर मां के साथ सीरियल्स देखना, उसका पसंदीदा शौक था। एक दिन उसने मां से कहा—मुझे एक्टिंग करनी है। मां ने मना किया, लेकिन पिता ने सपोर्ट किया—अगर ट्राई नहीं करेंगे तो पता कैसे चलेगा?

मुंबई की इंडस्ट्री में एंट्री और असली संघर्ष

अविका की इंडस्ट्री में कोई बैकग्राउंड नहीं था। रिश्तेदार तक कहते थे—एक्टिंग टाइम वेस्ट है। लेकिन अविका ने एक्टिंग क्लासेस ज्वाइन की, पोर्टफोलियो बनवाया, ऑडिशन देने लगी। एक कास्टिंग डायरेक्टर ने कहा—यह बच्ची बहुत सिंपल है, टीवी के लिए ठीक है पर फिल्मों के लिए नहीं। मां-बेटी रोते हुए घर लौटे, लेकिन अविका ने हार नहीं मानी। महीनों तक रिजेक्शन मिलता रहा। फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ता गया। मां चेतना हर ऑडिशन में साथ रहती थी, जिससे अविका सुरक्षित रही। कई बार इंडस्ट्री की डार्क साइड का सामना करना पड़ा, पर मां की सतर्कता ने उसे बचा लिया।

छोटे-मोटे कमर्शियल्स, फोटोशूट्स, ऐड्स में काम मिला, लेकिन पेमेंट बहुत कम थी। रातों को अविका सोचती थी—क्या मैं कभी सफल हो पाऊंगी? क्या मेरा सपना पूरा होगा? लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।

बालिका वधू: फेम, जिम्मेदारी और बचपन की कीमत

2008 में कलर्स चैनल पर “बालिका वधू” के लिए ऑडिशन हुआ। 100 से ज्यादा लड़कियां आनंदी के रोल के लिए आई थीं। चार राउंड के बाद आखिरकार अविका को आनंदी का रोल मिल गया। घर में खुशी की लहर दौड़ गई। बालिका वधू ने अविका को रातोंरात स्टार बना दिया। हर घर में आनंदी की चर्चा होने लगी। अवार्ड्स, मीडिया, इंटरव्यू, ऑटोग्राफ—सब कुछ मिला। लेकिन इस फेम की कीमत थी—12-14 घंटे की शूटिंग, स्कूल छूट गया, दोस्तों से मिलना बंद, खेलना-घूमना बंद। पूरा बचपन शूटिंग और स्क्रिप्ट में खो गया।

फाइनेंशियल स्टेबिलिटी आ गई, लेकिन मानसिक तनाव भी बढ़ गया। शो में आनंदी की शादी जगदीश से हुई। रोमांटिक सीन आए, सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट्स, एनजीओ, सोशल मीडिया—सबने विरोध किया। अविका के पेरेंट्स को धमकियां मिलीं। स्कूल में भी शिकायतें आईं। फाइनली अविका को स्कूल छोड़ना पड़ा। अब वह सिर्फ होम ट्यूशन से पढ़ाई कर पाई।

कंट्रोवर्सी, इंडस्ट्री पॉलिटिक्स और मानसिक तनाव

शो की सफलता के साथ-साथ विवाद भी बढ़ने लगे। प्रोडक्शन हाउस ने पेमेंट बढ़ाने से मना कर दिया। अविका के पेरेंट्स ने कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने की धमकी दी, तो प्रोडक्शन हाउस ने तुरंत दूसरी एक्ट्रेस ले ली—प्रत्युषा बनर्जी। मीडिया ने अविका को मनी माइंडेड, घमंडी, डिमांडिंग बताया। इंडस्ट्री में ब्लैकलिस्ट हो गई। काम मिलना बंद हो गया। फाइनेंशियल स्ट्रेस फिर से शुरू हो गया। अविका डिप्रेशन में चली गई। वजन बढ़ गया, मीडिया ने उसका मजाक उड़ाया। छोटे-मोटे कैमियो मिले, लेकिन रेगुलर काम नहीं।

बॉलीवुड में भी ट्राई किया, लेकिन नेपोटिज्म, कास्टिंग काउच जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा। एक प्रोडक्शन हाउस ने फिल्म का ऑफर दिया, लेकिन डायरेक्टर से अकेले मिलने की शर्त रखी। अविका ने मना कर दिया, फिर ब्लैकलिस्ट हो गई।

कमबैक की कोशिश और नई पहचान

2012-2013 में अविका ने खुद को रीइन्वेंट करने का फैसला किया। फिटनेस जर्नी शुरू की, जिम जॉइन किया, डाइट पर ध्यान दिया। एक्टिंग क्लासेस, डांसिंग, लैंग्वेज—हर चीज पर मेहनत की। सोशल मीडिया पर एक्टिव हुई। ग्लैमरस फोटोशूट्स किए। पहली बार लोग आनंदी को मॉडर्न कपड़ों में, बोल्ड लुक में देख रहे थे। ट्रोलिंग शुरू हो गई—संस्कारी आनंदी का यह हाल? पर अविका ने कहा—”मैं एक्टर हूं, आनंदी नहीं। मेरी असली जिंदगी अलग है।”

2013 में “ससुराल सिमर का” में मैच्योर रोल मिला। पेमेंट बेहतर थी, कॉन्ट्रैक्ट के टर्म्स भी ठीक थे। पर असली कंट्रोवर्सी थी अविका की पर्सनल लाइफ—मनीष रायसिंघन के साथ रिलेशनशिप की खबरें। एज गैप, सोशल मीडिया पर कोजी फोटो, इंगेजमेंट की अफवाहें—सबने अविका की इमेज को और कंट्रोवर्शियल बना दिया। ब्रांड्स ने दूरी बना ली, टीवी शोज़ ने अवॉइड किया।

सोशल मीडिया, बिजनेस और आज की स्थिति

बॉलीवुड में एंट्री का सपना अधूरा रहा। साउथ फिल्मों में भी खास सफलता नहीं मिली। धीरे-धीरे अविका ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनने का रास्ता चुना। Instagram पर लाखों फॉलोअर्स, ब्रांड एंडोर्समेंट्स, स्पोंसर्ड पोस्ट्स, कोलैबोरेशंस—अब अविका टीवी से ज्यादा सोशल मीडिया से कमा रही हैं। कुछ बिजनेस वेंचर्स भी शुरू किए हैं। फैमिली लाइफ प्राइवेट रखती हैं।

2024 में अविका ने एक पॉडकास्ट में इंडस्ट्री की सच्चाई उजागर की—मेल एक्टर्स को फीमेल एक्टर्स से तीन गुना ज्यादा पैसा मिलता है, कास्टिंग काउच, नेपोटिज्म, इंडस्ट्री पॉलिटिक्स। कुछ ने सपोर्ट किया, कुछ ने क्रिटिसाइज। पर अविका ने कहा—”मैं नेम्स नहीं ले रही क्योंकि लीगल इश्यूज हो सकते हैं, पर बात तो उठाना जरूरी है।”

निष्कर्ष

आज 28 साल की अविका गौर एक ओपन बुक हैं—कंट्रोवर्सी, स्ट्रगल, उम्मीद और आत्मनिर्भरता से भरी। वह फाइनेंशियली स्टेबल हैं, सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं, ब्रांड्स के साथ काम कर रही हैं और अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जी रही हैं। आनंदी की मासूमियत से लेकर आज की बोल्ड, स्वतंत्र महिला तक का सफर आसान नहीं था। फेम की कीमत चुकाई, बचपन खोया, इंडस्ट्री की राजनीति झेली, ट्रोलिंग और विवादों का सामना किया। पर हार नहीं मानी।

बालिका वधू की आनंदी आज टीवी सीरियल्स में नहीं दिखती क्योंकि इंडस्ट्री ने उन्हें रिप्लेसेबल बना दिया, कंट्रोवर्सी ने उनकी इमेज बदल दी, और उन्होंने खुद को एक नई पहचान दी—एक इन्फ्लुएंसर, बिजनेसवुमन, और एक साहसी महिला।