बेटी के साथ गलत होने पर पिता के बदले की पूरी कहानी/
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गाजियाबाद के कमाजपुर की दर्दनाक घटना: बेटी की अस्मिता पर हमला, पिता ने उठाया कानून अपने हाथ में
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद ज़िले के कमाजपुर गांव में घटी एक भयावह घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। यह कहानी सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक सोच, व्यवस्था की कमजोरी और एक पिता की बेबसी की दास्तान भी है। इस मामले में एक गरीब किसान रामभज ने अपनी बेटी के साथ हुए अत्याचार के बाद दो आरोपियों की हत्या कर दी। अब सवाल यह उठता है कि क्या उसने न्याय किया या कानून तोड़ा?
साधारण परिवार, असाधारण संघर्ष
रामभज कमाजपुर गांव का एक साधारण किसान था। उसके पास केवल तीन एकड़ जमीन थी, जिससे वह खेती-बाड़ी करता था। आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, इसलिए वह समय-समय पर मेहनत मजदूरी भी करता था। इन सबके बावजूद उसने अपनी इकलौती बेटी मानसी की परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी।
मानसी 11वीं कक्षा की छात्रा थी। उसकी मां का कई साल पहले निधन हो चुका था, इसलिए रामभज ने पिता और मां दोनों की भूमिका निभाई। गांव में मानसी को संस्कारी, मेहनती और होनहार लड़की के रूप में जाना जाता था। स्कूल से लौटने के बाद वह घर का काम करती और फिर खेतों में पिता का हाथ बंटाती। गांव के लोग अक्सर कहा करते थे, “बेटी हो तो रामभज की बेटी जैसी।”
गांव का शिक्षक और छिपा हुआ चेहरा
रामभज के पड़ोस में राकेश नाम का एक सरकारी स्कूल शिक्षक रहता था। ऊपर से वह पढ़ा-लिखा और जिम्मेदार दिखता था, लेकिन अंदर ही अंदर उसका चरित्र संदिग्ध था। गांव के लोग उसके बारे में ज्यादा नहीं जानते थे, क्योंकि वह गुपचुप तरीके से नशा करता और अपनी असलियत छुपाए रखता था।
10 दिसंबर 2025 को स्कूल में एक घटना हुई। राकेश ने कक्षा में सवाल पूछे, जिनका जवाब सिर्फ मानसी ने दिया। वह उसकी प्रतिभा से प्रभावित हुआ, लेकिन धीरे-धीरे उसकी नजरें गलत दिशा में मुड़ गईं। उसने मानसी को ट्यूशन के लिए अपने घर आने का प्रस्ताव दिया और रामभज को यह कहकर राजी कर लिया कि वह उसे मुफ्त में पढ़ाएगा।
गरीबी और बेटी के भविष्य की चिंता में रामभज ने हामी भर दी।
विश्वास का दुरुपयोग
करीब 15 दिन तक सब सामान्य चलता रहा। 28 दिसंबर 2025 को जब मानसी ट्यूशन के लिए राकेश के घर पहुंची, तो वहां कोई और छात्र मौजूद नहीं था। राकेश ने दरवाजा बंद किया और जबरदस्ती उसे कमरे में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने उसे धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया तो वह उसे फेल कर देगा और उसके पिता को भी नुकसान पहुंचाएगा।
डरी-सहमी मानसी चुप रही। उसने यह सोचकर अपने पिता को कुछ नहीं बताया कि कहीं उनकी बदनामी न हो जाए या वे गुस्से में कोई गलत कदम न उठा लें।
अपराध का सिलसिला
5 जनवरी 2026 को जब मानसी अपने पिता के लिए खेत में खाना लेकर जा रही थी, तो राकेश ने सुनसान रास्ते में चाकू की नोक पर उसे ईख के खेत में ले जाकर फिर से दुष्कर्म किया। इस बार उसने अपने दोस्त मोनू को भी बुला लिया। दोनों ने मिलकर मानसी के साथ अत्याचार किया और जान से मारने की धमकी दी।
इसके बाद 10 जनवरी 2026 को जब रामभज बैंक के काम से बाहर गया हुआ था, तब राकेश और मोनू घर में घुस आए और दिनदहाड़े मानसी के साथ फिर से दुष्कर्म किया।
इस बार मानसी टूट चुकी थी। जब रामभज घर लौटा और उसने बेटी की हालत देखी, तो बार-बार पूछने पर मानसी ने सच्चाई बता दी।
एक पिता का क्रोध
सच्चाई सुनकर रामभज का खून खौल उठा। वह गरीब था, प्रभावहीन था, और उसे भरोसा नहीं था कि पुलिस पैसे और ताकत वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। उसने बदला लेने का फैसला कर लिया।
शाम को वह आरोपियों को ढूंढता रहा। रात में उसके भतीजे राजेश ने बताया कि राकेश और मोनू गांव के खंडहर में बैठकर शराब पी रहे हैं। रामभज हाथ में कसी (धारदार हथियार) लेकर वहां पहुंच गया।
दोनों आरोपी नशे में धुत थे। रामभज ने पहले राकेश पर हमला किया और फिर मोनू पर। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
गिरफ्तारी और जांच
कुछ मजदूरों ने यह दृश्य देख लिया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और रामभज को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने पूरी कहानी बयान की।
पुलिस ने दोनों मृतकों के खिलाफ दुष्कर्म के मामले दर्ज किए, लेकिन रामभज के खिलाफ हत्या का मुकदमा भी दर्ज किया गया। कानून के अनुसार उसने गंभीर अपराध किया था।
समाज के सामने सवाल
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
क्या मानसी की चुप्पी समाज के डर की वजह से थी?
क्या गांव में सुरक्षा और जागरूकता की कमी थी?
क्या एक पिता को न्याय न मिलने का डर इतना बड़ा हो सकता है कि वह कानून अपने हाथ में ले ले?
मानसी के मामले में सबसे बड़ी त्रासदी यह थी कि उसने समय रहते किसी को नहीं बताया। अगर वह पहले ही पुलिस या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को सच बता देती, तो शायद अपराधियों को कानून के जरिए सजा मिल सकती थी।
न्याय बनाम बदला
रामभज का कदम भावनात्मक रूप से कई लोगों को सही लग सकता है। एक पिता जिसने अपनी बेटी की अस्मिता पर हमला देखा, वह टूट गया। लेकिन कानून की नजर में हत्या, हत्या ही है।
भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या एक जघन्य अपराध है, चाहे उसका कारण कुछ भी हो। अदालत को यह तय करना होगा कि रामभज के लिए सजा में नरमी बरती जाए या नहीं।
समाज के लिए सीख
यह घटना हमें कई महत्वपूर्ण सबक देती है:
बेटियों को डरकर चुप नहीं रहना चाहिए।
परिवारों को बच्चों से खुलकर संवाद रखना चाहिए।
गांवों में महिला सुरक्षा और कानूनी जागरूकता बढ़ानी होगी।
किसी भी अपराध की सूचना तुरंत पुलिस को देना जरूरी है।
निष्कर्ष
कमाजपुर की यह घटना एक साधारण किसान के असाधारण दर्द की कहानी है। एक बेटी की चुप्पी, एक पिता की बेबसी और दो अपराधियों की मौत—यह सब मिलकर एक दुखद अध्याय बन गए।
रामभज ने अपनी बेटी के लिए बदला लिया, लेकिन अब उसे कानून का सामना करना होगा। मानसी को न्याय मिला या नहीं, यह अदालत तय करेगी। लेकिन इतना जरूर है कि इस घटना ने यह दिखा दिया कि जब समाज और व्यवस्था कमजोर पड़ती है, तो लोग कानून अपने हाथ में लेने को मजबूर हो जाते हैं।
यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि हमारे समाज के लिए चेतावनी है कि अपराध के खिलाफ आवाज उठाना और न्याय व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना कितना जरूरी है।
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