भूत की वजह से महिला के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/

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भूत का रहस्य – अलवर की एक महिला की सच्ची कहानी

राजस्थान के अलवर जिले के बरखेड़ा गाँव में दूध की डेयरी चलाने वाला मंगतराम अपने बेटे रवि और बहू नेहा के साथ रहता था। मंगतराम गाँव में काफी जाना-पहचाना आदमी था – मेहनती, मगर उसकी फितरत में महिलाओं की ओर झुकाव था, जिसे गाँववाले “नाड़े का ढीला” कहते थे। उसका बेटा रवि पढ़ा-लिखा, ईमानदार और मेहनती युवक था, जो नौकरी की तलाश में था। रवि की शादी दो साल पहले नेहा से हुई थी। नेहा सुंदर, संस्कारी, और मेहनती लड़की थी, जिसने शादी के बाद घर-गृहस्थी को संभाल लिया था।

रवि के लिए नौकरी मिलना आसान नहीं था। कई महीनों की कोशिश के बाद, उसके दोस्त मोहर सिंह ने उसे अलवर के एक प्राइवेट बैंक में नौकरी दिलवा दी। सैलरी कम थी, लेकिन रवि खुश था – कम से कम शुरुआत तो हुई। नेहा ने खुशी जताई, मगर एक शर्त रखी – “मुझे भी साथ ले चलो।” रवि ने समझाया – “नेहा, सैलरी बहुत कम है, शुरू में मुश्किल होगी।” नेहा मान गई, लेकिन मन में चिंता थी।

नेहा ने रवि से कहा – “जब तुम घर पर नहीं होते, मुझे लगता है घर में कोई भूत है, जो मुझे परेशान करता है।” रवि ने हँसकर टाल दिया। मंगतराम ने भी कहा – “कुछ नहीं है, कोई भूत-वूत नहीं। अगर है तो मैं देख लूंगा।” रवि अलवर चला गया, नेहा घर पर अकेली रह गई।

दिनभर नेहा घर का काम करती, रात को अकेलेपन से घिर जाती। पति सिर्फ फोन करता, बाकी कोई सहारा नहीं। मंगतराम डेयरी में व्यस्त रहता। धीरे-धीरे नेहा को अपने कमरे में अजीब-अजीब चीजें महसूस होने लगीं। एक रात, नेहा ने अपने कमरे में किसी छाया का आभास किया, मगर डर के मारे किसी को बताया नहीं।

एक रात, मंगतराम डेयरी से दूध लेकर घर आया। नेहा से कहा – “इस दूध को गर्म कर देना, रात को हम दोनों पी लेंगे।” नेहा ने दूध गर्म किया, दोनों ने पिया। रात के करीब 9:30 बजे नेहा अपने कमरे में सोने चली गई। अचानक बेहोशी सी छा गई। नेहा दरवाजा बंद करना भूल गई थी। तभी किसी ने कमरे में प्रवेश किया, उसके हाथ-पैर बांध दिए, मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। नेहा बेहोश थी, और उस “भूत” ने उसके साथ गलत काम किया।

सुबह नेहा की आँख खुली, तो देखा – कपड़े फटे हुए, तन पर कुछ नहीं। वह डर गई, सोचने लगी – “क्या मेरे ससुर ने ऐसा किया?” लेकिन मंगतराम सुबह घर में नहीं था। नेहा ने फोन किया – “पिताजी, आप रात में कहाँ थे?” मंगतराम ने जवाब दिया – “मैं तो बैठक में था, दरवाजा बंद था, अंदर नहीं आया।” नेहा उलझन में पड़ गई।

नेहा ने पड़ोसन कांता देवी को बुलाया – “कांता, रात को मेरे साथ भूत गलत काम करता है।” कांता ने मजाक उड़ाया, लेकिन जब नेहा ने फटे कपड़े दिखाए, तो कांता भी चौंक गई। “यह तो सचमुच अजीब है,” कांता बोली। मगर उसने भी नेहा को समझाया – “शायद तेरे मन का वहम है।”

रातें गुजरती रहीं, हर रात नेहा के साथ वही हादसा होता। वह थक गई, टूट गई। पति रवि को फोन किया – “रवि, मेरे कमरे में भूत आता है, गलत काम करता है।” रवि ने हँसकर टाल दिया – “तुम्हें वहम है, कोई भूत-वूत नहीं आता।” नेहा ने बार-बार समझाया, मगर रवि ने बात को गंभीरता से नहीं लिया।

नेहा ने कांता देवी से कहा – “कांता, दो-तीन रातें मेरे साथ गुजारो, देखो क्या होता है।” कांता ने पहले मना किया, फिर मोहर सिंह से बात कर के मान गई। कांता नेहा के घर आ गई। मंगतराम ने भी दूध दिया, खाना खाया, अपनी बैठक में सो गया। नेहा और कांता ने दूध पीकर अपने कमरे में सोने चली गईं। दोनों बेहोश हो गईं।

रात के करीब 11:45 बजे, वही मायावी भूत कमरे में आया। दोनों के हाथ-पैर बांध दिए, और बारी-बारी से गलत काम किया। सुबह दोनों की आँखें खुलीं तो देखा – तन पर कोई कपड़ा नहीं, कपड़े फटे हुए। कांता अब विश्वास करने लगी – “यह भूत नहीं, कोई आदमी है।” नेहा ने कहा – “मेरा ससुर ऐसा नहीं कर सकता। जरूर कोई गैर मर्द है।”

दोनों महिलाएं पुलिस स्टेशन पहुँचीं, दरोगा दीपक सक्सेना को पूरी कहानी सुनाई। दीपक ने कहा – “यह भूत का काम नहीं, कोई आदमी है। आज रात हम पहरा देंगे, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए।” पुलिस ने योजना बनाई, रात को घर के चारों ओर पहरा लगा दिया।

रात को फिर वही घटना – नेहा और कांता ने दूध पिया, बेहोश हो गईं। आधे घंटे बाद एक व्यक्ति सीढ़ी लगाकर घर में घुसा। पुलिस ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। चेहरा देखा तो पुलिस के भी होश उड़ गए – वो कोई और नहीं, कांता का पति मोहर सिंह था। पुलिस ने पूछताछ की, मोहर सिंह ने कबूल किया – “मैं अकेला नहीं था, मंगतराम भी साथ था। हम दोनों ने नेहा को नशीला दूध पिलाया, फिर रात को सीढ़ी लगाकर कमरे में घुसते थे और गलत काम करते थे।”

पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया, चार्जशीट दायर की। गाँव में सनसनी फैल गई – “भूत नहीं, इंसान था।” नेहा को न्याय मिला, मगर उसके मन का डर कभी नहीं गया। कांता ने भी पति से तलाक ले लिया। दोनों महिलाओं ने मिलकर गाँव की महिलाओं के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया – “अगर कुछ गलत हो, तो चुप मत रहो। आवाज़ उठाओ।”

मंगतराम और मोहर सिंह को अदालत ने उम्रकैद की सजा दी। गाँव में लोग अब सतर्क हो गए। महिलाएं अब अपने अधिकारों के लिए लड़ने लगीं।

यह कहानी हमें सिखाती है – समाज में भूत-प्रेत के नाम पर कई बार अपराध छुपाए जाते हैं। सच को पहचानना, आवाज़ उठाना और न्याय के लिए लड़ना जरूरी है। डर से नहीं, हिम्मत से जीना चाहिए।