भूत की वजह से महिला के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/
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भूत की वजह से महिला के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा, वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए
अध्यान 1: एक सामान्य गांव और एक साधारण परिवार
यह कहानी है महाराष्ट्र के गढ़ चिरौली जिले के एक छोटे से गांव की, जिसका नाम बरखेड़ा है। गांव में एक खुशहाल परिवार रहता था। परिवार के मुखिया मंगतराम थे, जो एक छोटे से व्यवसायी थे और गांव में दूध बेचने का काम करते थे। उनका एक अच्छा खासा दूध का कारोबार था और उनके पास एक डेयरी भी थी, जिससे वह अच्छे पैसे कमा लेते थे और अपने परिवार का गुजारा आराम से करते थे।
मंगतराम के परिवार में उनकी पत्नी विजया, उनका बेटा रवि और बहू नेहा के साथ जीवन शांतिपूर्वक चल रहा था। रवि ने अपनी शादी नेहा से की थी, और दोनों की जिंदगी बिल्कुल सामान्य थी। रवि एक ईमानदार और मेहनती लड़का था, जो अच्छी पढ़ाई करता था, लेकिन फिलहाल किसी नौकरी की तलाश में था।
अध्यान 2: रवि की नौकरी और घर में बदलाव
रवि की नौकरी की तलाश जारी थी, लेकिन उसे कोई सही काम नहीं मिल रहा था। एक दिन उसने अपनी पत्नी नेहा से कहा कि उसे अपने पुराने दोस्त मोहर सिंह से मदद चाहिए, जो एक बड़े बैंक में काम करता था। रवि ने नेहा से कहा कि मोहर सिंह उसे किसी अच्छे बैंक में नौकरी दिलवा सकता है, तो नेहा भी खुश हो गई।
रवि ने मोहर सिंह से संपर्क किया, और वह रवि को एक प्राइवेट बैंक में नौकरी दिलवाने में सफल हो गया। मोहर सिंह ने रवि से कहा कि इस बैंक में सैलरी कम होगी, लेकिन जैसे-जैसे अनुभव बढ़ेगा, सैलरी में वृद्धि हो जाएगी। रवि को यह एक अच्छा अवसर लगा, और उसने बैंक जॉइन करने का फैसला किया।
लेकिन एक बात और थी, जिसे रवि ने अपनी पत्नी नेहा से साझा किया। वह यह था कि नौकरी उसे अलवर में करनी होगी, क्योंकि मोहर सिंह ने कहा था कि वहां के प्राइवेट बैंक में उसे जॉइन करना होगा। नेहा ने कहा, “अगर तुम चाहते हो, तो मैं तुम्हारे साथ चली जाऊं।” लेकिन रवि ने कहा, “शुरुआत में तो मुझे अपनी नौकरी पर ध्यान देना है, और सैलरी भी कम है, इस वजह से तुम्हें साथ नहीं ला सकता।”
नेहा ने समझा और रवि को अकेले अलवर जाने की अनुमति दी। रवि अपनी पत्नी को अकेला छोड़कर 15 दिनों के लिए अलवर चला गया। 15 दिन तक सब कुछ ठीक चलता रहा, लेकिन इस दौरान नेहा अकेले रहने लगी। उसका अकेलापन उसे परेशान करने लगा, और वह बहुत चिंता करने लगी।

अध्यान 3: नेहा का अकेलापन और रहस्यमय घटनाएं
15 दिन का समय बीतने के बाद नेहा देवी का अकेलापन और भी बढ़ने लगा। वह दिन में घर के कामकाज में व्यस्त रहती, लेकिन रात को जब सब कुछ शांत होता, तो उसके मन में डर बैठने लगता। उसे घर में कुछ अजीब महसूस होता। रात के समय, जब उसका पति रवि फोन पर बात करता, तो वह अपने कमरे में अकेले लेट जाती थी।
एक दिन जब मंगतराम अपनी डेयरी से लौटकर घर आया, तो नेहा ने उसे बताया कि घर में कुछ अजीब घटनाएं हो रही हैं। उसने कहा, “पिताजी, मुझे लगता है कि इस घर में कोई भूत प्रेत है। जब रवि घर पर नहीं होता, तो मुझे कमरे में किसी का एहसास होता है।” मंगतराम ने अपनी बहू को दिलासा देते हुए कहा, “तुम्हारे मन में डर है, लेकिन हमारे घर में ऐसा कुछ नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूं, चिंता मत करो।”
नेहा ने सोचा कि शायद उसकी यह बातें कुछ ज्यादा ही हैं, और वह जल्द ही इस डर से बाहर निकल जाएगी। लेकिन उसे जल्द ही अहसास हुआ कि यह सिर्फ उसका वहम नहीं था।
अध्यान 4: 25 अक्टूबर की रात और घटनाओं का मोड़
एक रात 25 अक्टूबर 2025 को, जब मंगतराम अपनी डेयरी पर काम कर रहे थे, तो नेहा अकेले घर में थी। उस दिन, जब मंगतराम घर लौटे, तो नेहा ने उन्हें बताया कि “पिताजी, आज रात मुझे बहुत अजीब लगा। मुझे लगा जैसे कमरे में कोई आया है, लेकिन मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया।” मंगतराम ने यह सुनकर इसे सामान्य समझा और कहा कि वह उनके साथ ऐसा कोई अनुभव नहीं रखते हैं।
लेकिन रात के समय नेहा ने एक बार फिर से उस अनुभव को महसूस किया। वह अकेले अपने कमरे में लेटी हुई थी, और अचानक कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज आई। उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। फिर जैसे ही उसने उठकर देखा, उसे लगा कि कमरे में कोई है, लेकिन उसने देखा कि कोई दिखाई नहीं दिया। नेहा का डर अब बढ़ने लगा।
मंगतराम ने इसे केवल एक वहम समझा, लेकिन नेहा को कुछ और ही हो रहा था। वह अब चुपचाप अपने ससुर से यह कहने लगी कि “पिताजी, मुझे लगता है कि यहां कोई भूत प्रेत है जो हमें परेशान कर रहा है।” लेकिन मंगतराम ने उसे हंसी में उड़ा दिया।
अध्यान 5: घटनाओं का खौ़फनाक मोड़
धीरे-धीरे नेहा को यह महसूस हुआ कि कुछ अजीब हो रहा है। घर के अंदर एक खौ़फनाक माहौल बन चुका था। 26 अक्टूबर की रात को, जब मंगतराम अपने काम से घर लौटे, तो नेहा ने उन्हें कहा, “पिताजी, मुझे लगता है कि मैं अकेली नहीं हूं इस कमरे में।” मंगतराम ने कहा, “तुम सिर्फ डर रही हो, तुम्हारे मन में कोई वहम है।” लेकिन उसी रात के बाद नेहा के शरीर पर कुछ ऐसा हुआ जो किसी के लिए भी विश्वास करना मुश्किल था।
नेहा के कमरे का दरवाजा खोलने पर, वह बेहोश पाई गई। उसकी हालत बहुत खराब थी, और उसके शरीर के कपड़े फटे हुए थे। इस घटना के बाद मंगतराम को भी यह समझ में आ गया कि घर में कुछ गलत हो रहा है, लेकिन अब वह खुद भी डर गए थे। नेहा ने मंगतराम को बताया कि “पिताजी, घर में कुछ तो है, जो मुझे परेशान कर रहा है।” मंगतराम का चेहरा उतर गया।
उन्होंने अब अपने बहू से पूछा कि क्या वह किसी को जानती है जो उनके घर में आकर ऐसा कर सकता है। नेहा ने कहा, “मुझे लगता है कि मेरे साथ कोई भूत प्रेत है।” मंगतराम ने फिर कहा, “तुम बिल्कुल सही हो, हमारी मदद करने के लिए हम सबको पुलिस स्टेशन जाना पड़ेगा।”
अध्यान 6: पुलिस की जांच और रहस्य का खुलासा
पुलिस ने जब मामले की गंभीरता को समझा, तो उन्होंने जांच शुरू की। पुलिस ने नेहा की हालत का अध्ययन किया और पाया कि यह कोई भूत प्रेत का मामला नहीं, बल्कि एक साजिश का हिस्सा था। पुलिस ने यह पता किया कि घर के भीतर दरवाजा और सीढ़ी लगाकर घर में प्रवेश करने वाले लोग कोई और नहीं बल्कि मंगतराम के बेटे रवि और उसकी पत्नी नेहा थे।
गांव में एक ऐसी साजिश चल रही थी, जिसे मंगतराम और उसकी पत्नी ने बहुत ही अच्छे तरीके से पर्दे के पीछे अंजाम दिया था। मंगतराम का मकसद अपनी बहू नेहा को मारने और उसके घर पर कब्जा करने का था, ताकि उसकी संपत्ति पर उसका हक हो।
पुलिस ने मंगतराम को गिरफ्तार कर लिया और मामले की गहराई से जांच की। पुलिस ने यह पाया कि मंगतराम ने अपनी बहू के साथ कई बार साजिश की थी और उसे मानसिक और शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाया था।
अध्यान 7: मंगतराम की साजिश और पुलिस की कार्रवाई
जैसे ही पुलिस ने मंगतराम को गिरफ्तार किया, मामला धीरे-धीरे सुलझने लगा। जांच में यह बात सामने आई कि मंगतराम और उसकी पत्नी ने एक बहुत ही घातक साजिश रची थी। उन्होंने घर में हो रही अजीब घटनाओं को एक भूत-प्रेत का मामला बना दिया था, ताकि उन्हें अपने शिकार को दबाकर अपनी योजना को अंजाम दिया जा सके।
पुलिस ने यह पाया कि मंगतराम ने अपने परिवार के सदस्यों को धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया था, ताकि वे उसे अपने अधिकार के तौर पर मान लें। उसकी यह साजिश सिर्फ उसकी बहू नेहा के लिए नहीं थी, बल्कि उसने पूरे परिवार को इस जाल में फंसाया था। मंगतराम को यह उम्मीद थी कि अगर वह अपनी बहू को मानसिक रूप से अस्थिर कर सकता है, तो वह उस पर अपना नियंत्रण कायम कर सकेगा।
पुलिस ने जब मंगतराम से सख्ती से पूछताछ की, तो उसने सब कुछ कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह और उसकी पत्नी ने अपनी बेटी की शादी के बाद से ही अपनी बहू को अपनी संपत्ति के हकदार बनाने के लिए इस घातक साजिश को रचा था। मंगतराम ने स्वीकार किया कि वह जानबूझकर अपनी बहू को दवाइयां देते थे, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ जाए और वह मानसिक रूप से अस्थिर हो जाए।
मंगतराम का असली मकसद अपनी बहू को कमजोर बना कर उसकी संपत्ति पर कब्जा करना था, लेकिन वह यह भूल गया कि उसकी साजिश इतनी आसानी से सफल नहीं होगी। पुलिस की जांच ने उसकी सारी योजना को नष्ट कर दिया और उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
अध्यान 8: परिवार का टूटना और सच का खुलासा
नेहा के लिए यह समय बेहद कठिन था। वह महसूस कर रही थी कि उसकी पूरी जिंदगी झूठ पर आधारित थी। उसे यह समझ में आया कि जिस आदमी पर उसने भरोसा किया था, वही उसकी तबीयत खराब करने और उसे मानसिक रूप से कमजोर बनाने के लिए जिम्मेदार था। उसका पूरा विश्वास अब टूट चुका था, और उसे यह एहसास हुआ कि उसने कितने खतरनाक लोगों के साथ अपनी जिंदगी बर्बाद की थी।
लेकिन जब सच्चाई सामने आई, तो नेहा ने खुद को और अपने परिवार को न्याय दिलाने के लिए ठान लिया। पुलिस की मदद से वह धीरे-धीरे आत्मविश्वास हासिल करती गई। उसने अपनी बहन और बाकी रिश्तेदारों को इस साजिश के बारे में बताया और फिर सभी ने मिलकर मंगतराम और उसकी पत्नी के खिलाफ आवाज उठाई।
इस मामले ने पूरे गांव में तहलका मचाया। मंगतराम और उसकी पत्नी को सजा दिलाने के लिए गांव के लोग भी पुलिस के साथ खड़े हो गए। यह एक अहम पल था, जब एक परिवार के गहरे राज का खुलासा हुआ और मंगतराम की साजिश पूरी तरह से उजागर हो गई।
अध्यान 9: मंगतराम और उसकी पत्नी को सजा
मंगतराम और उसकी पत्नी को अदालत में पेश किया गया। उन्होंने अपनी साजिश के बारे में सब कुछ स्वीकार किया, और अदालत ने उन्हें सजा सुनाई। मंगतराम को मानसिक उत्पीड़न, जहर देने और धोखाधड़ी के आरोप में सात साल की सजा सुनाई गई। उसकी पत्नी को भी साजिश में शामिल होने के लिए पांच साल की सजा दी गई।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि मंगतराम और उसकी पत्नी को उनकी सारी संपत्ति से वंचित कर दिया जाए, और वह संपत्ति नेहा के नाम कर दी जाए। यह निर्णय एक बड़ी जीत थी, न केवल नेहा के लिए बल्कि उन सभी के लिए जिन्होंने कभी महसूस किया था कि समाज में सही न्याय नहीं मिलता।
अध्यान 10: नेहा का नया जीवन और सशक्त वापसी
नेहा ने अदालत के फैसले के बाद खुद को और अपनी बेटी को नई शुरुआत देने का फैसला किया। उसने अपने ससुराल से पूरी तरह से तौबा की और खुद को अपने पैरों पर खड़ा करने की कोशिश शुरू कर दी। अब उसकी जिंदगी में केवल एक उद्देश्य था—अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से एक बेहतर भविष्य बनाना।
नेहा ने अपनी मेडिकल दुकान को फिर से संभाल लिया, जो उसकी मेहनत का प्रतिफल थी। उसकी दुकान पहले से ज्यादा सफल होने लगी, और उसने अपनी जिंदगी को एक नए दिशा में मोड़ दिया। वह अब किसी के सामने नहीं झुकती थी, बल्कि वह अपने परिवार के लिए एक मजबूत स्तंभ बन चुकी थी।
नेहा की बेटी आंचल अब बड़ी हो गई थी और उसने भी अपनी पढ़ाई में बहुत अच्छा किया था। वह अपनी मां की तरह ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर महिला बन रही थी। नेहा अब अपनी बेटी के साथ सुकून भरी जिंदगी जीने लगी, और हर दिन वह अपने पुराने समय को याद करती थी—जब उसकी जिंदगी साधारण थी और उसने अपनी मेहनत से दुनिया से जंग जीती थी।
अध्यान 11: सजा के बाद गांव का बदलाव
मंगतराम और उसकी पत्नी के जेल जाने के बाद, गांव में सब कुछ बदल गया। लोग अब सच्चाई के साथ जीने लगे थे। पहले जो लोग मंगतराम की आदर्शता और उसकी शान की मिसाल देते थे, अब वही लोग उसकी कड़ी आलोचना करने लगे थे। यह पूरी कहानी एक मिसाल बन गई कि अगर कोई अपनी साजिशों से दूसरों का जीवन तबाह करने की कोशिश करता है, तो उसे जरूर सजा मिलती है।
गांव में अब यह संदेश फैल चुका था कि समाज में झूठ और धोखाधड़ी का कोई स्थान नहीं होता। गांव के लोग अब एक दूसरे से ज्यादा जुड़ने लगे थे, और अपने रिश्तों को सही दिशा में बनाए रखने की कोशिश करने लगे थे।
अध्यान 12: सबक और प्रेरणा
नेहा की कहानी यह सिखाती है कि कोई भी मुश्किल समय हो, अगर हम अपने अंदर की ताकत पहचानें और सही तरीके से कदम उठाएं, तो हम अपनी मंजिल तक जरूर पहुंच सकते हैं। यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि हमें कभी भी किसी के ऊपर आंख मूंदकर विश्वास नहीं करना चाहिए। रिश्तों में भरोसा और ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं, और अगर हम किसी को अपनी मेहनत का फल देने का फैसला करते हैं, तो हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वह हमें धोखा न दे।
नेहा ने अपने जीवन में बहुत कुछ खोया, लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। उसने अपनी कड़ी मेहनत से अपने परिवार को और खुद को सम्मान दिलाया। इस कहानी ने हमें यह बताया कि आत्मविश्वास और संघर्ष से हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं।
समाप्त।
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