मध्य प्रदेश श्योपुर शिक्षक मामला: पत्नी ही मास्टरमाइंड निकली | 4 लाख रुपये के सीसीटीवी कांड का खुलासा!

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मध्य प्रदेश शीओपुर शिक्षक हत्याकांड: पत्नी ही निकली मास्टरमाइंड, CCTV ने खोली 4 लाख की साजिश

मध्य प्रदेश के शीओपुर जिले से सामने आया यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अपराध चाहे कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, सच्चाई कभी न कभी सामने आ ही जाती है। शुरुआत में जिसे एक साधारण सड़क दुर्घटना माना जा रहा था, वही मामला कुछ ही दिनों में एक सुनियोजित हत्या और पारिवारिक विश्वासघात की भयावह कहानी में बदल गया। इस पूरे हत्याकांड में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृतक की पत्नी ही इस साजिश की मास्टरमाइंड निकली।

खाई में मिली लाश, हादसा या हत्या?

घटना 27 दिसंबर की रात की है। अगली सुबह सड़क किनारे लोगों की भीड़ जमा हुई, जब एक गहरी खाई के नीचे एक मोटरसाइकिल और एक व्यक्ति का शव दिखाई दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। खाई में उतरकर जांच की गई तो वहां एक सरकारी स्कूल शिक्षक रमाकांत पाठक का शव बरामद हुआ।

प्राथमिक तौर पर यह मामला सड़क दुर्घटना जैसा प्रतीत हो रहा था। मोटरसाइकिल खाई में पड़ी थी और शव भी वहीं मौजूद था। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया, शिनाख्त करवाई और परिजनों को सूचना दी। रमाकांत के घर जैसे ही यह खबर पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी साधना शर्मा का रो-रोकर बुरा हाल था और पूरा मोहल्ला इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा मान रहा था।

पुलिस को क्यों हुआ शक?

हालांकि, पुलिस के लिए यह मामला इतना सरल नहीं था। जिस स्थिति में मोटरसाइकिल और शव मिले थे, वह सामान्य दुर्घटना से मेल नहीं खा रही थी। वाहन पर गंभीर क्षति के स्पष्ट संकेत नहीं थे और घटनास्थल की परिस्थितियां भी संदेह पैदा कर रही थीं। इसी कारण पुलिस ने इसे “संदिग्ध दुर्घटना” मानते हुए जांच को दूसरे एंगल से आगे बढ़ाया।

पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन पुलिस ने फाइल बंद नहीं की। जांच अधिकारी लगातार इस सवाल से जूझ रहे थे कि अगर यह हादसा था, तो कुछ बातें असामान्य क्यों लग रही हैं।

CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा सुराग

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। इसी क्रम में पुलिस की नजर एक नजदीकी पेट्रोल पंप के CCTV फुटेज पर पड़ी। फुटेज में साफ दिख रहा था कि 27 दिसंबर की रात रमाकांत पाठक पेट्रोल पंप पर मौजूद थे।

सबसे अहम बात यह थी कि रमाकांत अकेले नहीं थे। उनके साथ पेट्रोल पंप पर काम करने वाला युवक मनीष और एक अन्य व्यक्ति सतनाम भी दिखाई दे रहे थे। तीनों को साथ में देखा गया, जिसके बाद पुलिस का शक और गहरा हो गया।

दोस्ती से साजिश तक का सफर

जांच में सामने आया कि रमाकांत पाठक का घर उसी पेट्रोल पंप के पास था। रोजमर्रा के जीवन में उनका वहां आना-जाना था और इसी दौरान उनकी पहचान मनीष से हो गई थी। सामान्य बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई।

इसी पेट्रोल पंप के जरिए कहानी का दूसरा पहलू सामने आया—रमाकांत की पत्नी साधना शर्मा का। साधना आंगनवाड़ी कार्यकर्ता थीं और उनका भी रोज उस पेट्रोल पंप के सामने से आना-जाना होता था। इसी दौरान साधना और मनीष के बीच दोस्ती हुई, जो आगे चलकर प्रेम संबंध में बदल गई।

पति बना रिश्ते में बाधा

जैसे-जैसे साधना और मनीष की नजदीकियां बढ़ीं, रमाकांत को पत्नी के व्यवहार में बदलाव महसूस होने लगा। उन्होंने सवाल उठाने शुरू किए और साधना पर पाबंदियां लगाने लगे। यहीं से इस प्रेम संबंध में “बाधा” के रूप में रमाकांत को हटाने की साजिश शुरू हुई।

पुलिस के अनुसार, लगभग डेढ़ महीने पहले ही हत्या की योजना तैयार कर ली गई थी। मनीष ने अपने एक परिचित सतनाम को इस साजिश में शामिल किया, जिसे पैसों की जरूरत थी। तीनों के बीच ₹4 लाख में “डील” तय हुई।

27 दिसंबर की रात क्या हुआ?

योजना के मुताबिक, 27 दिसंबर की रात मनीष ने रमाकांत को पेट्रोल पंप पर बुलाया। बातचीत के बहाने उन्हें कार में बैठाया गया। रमाकांत ने अपनी मोटरसाइकिल पेट्रोल पंप पर ही खड़ी कर दी और तीनों एक साथ कार से निकल पड़े।

एक सुनसान जगह पर कार रोकी गई। वहां रमाकांत पर पीछे से हमला किया गया, जिससे वे बेहोश होकर गिर पड़े। इसके बाद उन्हें खाई में फेंक दिया गया। योजना को “हादसे” का रूप देने के लिए बाद में रमाकांत की मोटरसाइकिल भी लाकर उसी खाई में डाल दी गई।

अगली सुबह जब लोगों ने खाई में शव और मोटरसाइकिल देखी, तो किसी को भी हत्या का शक नहीं हुआ।

पुलिस की सख्ती और कबूलनामा

CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले मनीष को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने सच्चाई उजागर कर दी और बताया कि इस पूरी साजिश की मास्टरमाइंड साधना शर्मा है। इसके बाद पुलिस ने साधना को गिरफ्तार किया।

कड़ी पूछताछ में साधना ने भी अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने स्वीकार किया कि उसका मनीष के साथ प्रेम संबंध था और रमाकांत को रास्ते से हटाने के लिए पूरी योजना बनाई गई थी। सतनाम को ₹4 लाख देने का वादा किया गया था, जो अभी उधार में ही तय हुआ था।

पैसों का लालच और बड़ा अपराध

इस केस की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों ने हत्या की साजिश रची, उनके पास खुद इतने पैसे नहीं थे। मनीष पेट्रोल पंप पर काम करता था और साधना एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता थी। योजना यह थी कि रमाकांत की मौत के बाद उसकी जमा-पूंजी और संपत्ति साधना के हाथ आ जाएगी, जिससे सतनाम को भुगतान कर दिया जाएगा।

एक्सीडेंट की आड़ में हत्या

आरोपियों को पूरा भरोसा था कि यह मामला सड़क दुर्घटना मान लिया जाएगा और कभी सामने नहीं आएगा। उन्होंने सुनसान जगह इसलिए चुनी थी ताकि वहां CCTV न हो। लेकिन वे यह भूल गए कि उनके आने-जाने के रास्ते में कैमरे लगे हुए थे, जिन्होंने पूरी कहानी खोल दी।

पुलिस जांच की सराहना

इस मामले में पुलिस की भूमिका काबिले-तारीफ रही। अगर पुलिस इसे केवल एक सामान्य दुर्घटना मानकर फाइल बंद कर देती, तो शायद यह हत्या कभी उजागर नहीं होती। CCTV फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और तकनीकी जांच ने इस जघन्य अपराध की परतें खोल दीं।

समाज के लिए संदेश

यह मामला समाज के लिए एक कड़ा सबक है। अगर रिश्तों में विश्वास खत्म हो जाए, तो उसका अंत कितना भयावह हो सकता है, यह इस घटना से साफ झलकता है। अगर किसी रिश्ते में समस्या है, तो उसका समाधान संवाद या अलगाव हो सकता है, लेकिन हिंसा कभी समाधान नहीं होती।

आज रमाकांत पाठक इस दुनिया में नहीं हैं और तीन लोग जेल की सलाखों के पीछे हैं। एक परिवार उजड़ चुका है और कई ज़िंदगियां हमेशा के लिए बदल गई हैं।

निष्कर्ष

शीओपुर शिक्षक हत्याकांड यह साबित करता है कि अपराध कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, तकनीक और सतर्क जांच के सामने सच्चाई छुप नहीं सकती। CCTV कैमरे, कॉल रिकॉर्ड और पुलिस की सूझबूझ ने एक “हादसे” को हत्या में बदलते हुए सच सामने ला दिया।

कानून अब अपना काम करेगा और अदालत तय करेगी कि दोषियों को क्या सजा मिलेगी। लेकिन यह मामला लंबे समय तक एक उदाहरण के रूप में याद रखा जाएगा—कि लालच, धोखा और गलत रिश्ते अंततः विनाश ही लाते हैं।