मरा हुआ दादा भूत बन कर घर में आता था और कर दिया कारनामा/वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/

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“अलवर का चौंकाने वाला मामला: ‘भूत’ के नाम पर महीनों तक चलता रहा अपराध, दादी और डेयरी मालिक गिरफ्तार”


अलवर जिले के कठूमर गांव में सनसनी

राजस्थान के अलवर जिले के कठूमर गांव में सामने आई एक घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। यह मामला एक ऐसी युवती की कहानी है जिसे कई हफ्तों तक यह विश्वास दिलाया गया कि उसके साथ रात के समय कोई “भूत” आकर गलत हरकतें करता है।

लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो गांव के लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। पुलिस जांच में जो सच सामने आया, वह किसी भी इंसान को अंदर तक झकझोर देने वाला था।

यह कहानी है एक अनाथ लड़की रचना, उसकी दादी कांता देवी और गांव के एक डेयरी मालिक प्रवीण सिंह की—जहां लालच, विश्वासघात और अपराध की एक भयावह साजिश सामने आई।


गरीबी और संघर्ष में पली रचना

अलवर जिले के कठूमर गांव में रहने वाली रचना ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। वह पढ़ाई में अच्छी थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाई।

रचना के माता-पिता की लगभग दस साल पहले मौत हो गई थी। इसके बाद उसका पालन-पोषण उसके दादा रमेश और दादी कांता देवी ने किया था।

दादा रमेश अपनी पोती से बेहद प्यार करते थे। लेकिन लगभग एक साल पहले उनकी भी मृत्यु हो गई।

दादा के गुजर जाने के बाद घर की जिम्मेदारी लगभग पूरी तरह रचना और उसकी बुजुर्ग दादी पर आ गई।


मेहनत से चल रहा था घर

कांता देवी मजदूरी करके घर चलाती थीं। यह देखकर रचना को बहुत दुख होता था।

एक दिन उसने अपनी दादी से कहा कि अब वह खुद मजदूरी करेगी और दादी को आराम करना चाहिए।

इसके बाद रचना खेतों में मजदूरी करने लगी और घर का खर्च संभालने लगी।

कांता देवी अपनी पोती की मेहनत देखकर खुश भी थीं, लेकिन उन्हें उसकी शादी और भविष्य की चिंता भी सताती रहती थी।


रहस्यमयी घटनाओं की शुरुआत

1 फरवरी 2026 की रात एक अजीब घटना हुई।

रात का खाना खाने के बाद दादी और पोती दोनों सो गईं। लेकिन आधी रात को रचना डरकर चीख पड़ी।

जब कांता देवी ने पूछा तो रचना ने बताया कि उसे सपने में अपने दादा दिखाई दिए जो उसके साथ अजीब व्यवहार कर रहे थे।

कांता देवी ने इसे सिर्फ सपना कहकर टाल दिया।

लेकिन अगले दिन सुबह रचना ने देखा कि उसके कपड़े बिखरे पड़े थे और उसे कुछ भी याद नहीं था।

उसे लगा कि रात में उसके साथ कुछ गलत हुआ है।


डर और शक

रचना ने अपनी दादी को यह बात बताई, लेकिन दादी ने उसकी बातों को वहम कहकर नजरअंदाज कर दिया।

रचना को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब कैसे हो रहा है।

कभी वह सोचती कि शायद सच में कोई भूत है, तो कभी उसे शक होता कि घर में कोई व्यक्ति उसके कमरे में आता है।

लेकिन कमरे का दरवाजा अंदर से बंद होता था, इसलिए वह उलझन में पड़ जाती थी।


जन्मदिन का दिन

25 फरवरी 2026 को रचना का जन्मदिन था।

उस दिन उसकी दादी कांता देवी शहर गईं और उसके लिए एक महंगा मोबाइल फोन, केक और कई उपहार खरीदकर लाईं।

रचना को आश्चर्य हुआ कि इतनी गरीबी के बावजूद दादी इतने महंगे सामान कैसे खरीद सकती हैं।

लेकिन दादी ने कहा कि उन्होंने लंबे समय से पैसे बचाए थे।


सहेली को बताया राज

उसी दिन रचना की सहेली शिवानी उससे मिलने आई।

बातचीत के दौरान रचना ने अपनी सहेली को सारी घटनाएं बताईं कि कैसे हर रात कोई “भूत” उसके कमरे में आता है।

शिवानी ने उसकी बातों पर विश्वास नहीं किया, लेकिन उसने फैसला किया कि वह उसी रात उसके साथ रुककर सच्चाई का पता लगाएगी।


दूसरी रात का रहस्य

रात को सबने खाना खाया और दूध पीकर सो गए।

रचना, शिवानी और कांता देवी एक कमरे में सोए, जबकि चचेरा भाई उज्जवल दूसरे कमरे में सोया।

सुबह जब दोनों लड़कियां उठीं तो उन्होंने देखा कि उनके शरीर पर कपड़े नहीं थे।

अब शिवानी को भी यकीन हो गया कि कुछ बहुत गलत हो रहा है।


पुलिस तक पहुंचा मामला

शिवानी ने तुरंत रचना को पुलिस स्टेशन चलने के लिए कहा।

दादी कांता देवी ने उन्हें रोकने की कोशिश की और कहा कि इससे बदनामी होगी।

लेकिन शिवानी नहीं मानी।

दोनों लड़कियां पुलिस स्टेशन पहुंचीं और सब-इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह को पूरी कहानी बताई।


पुलिस की योजना

पुलिस अधिकारी ईश्वर सिंह ने दोनों लड़कियों को भरोसा दिलाया कि सच्चाई जरूर सामने आएगी।

उन्होंने योजना बनाई कि पुलिस उस रात सिविल ड्रेस में घर के आसपास निगरानी करेगी।

अगर कोई व्यक्ति घर में घुसता है, तो उसे रंगे हाथों पकड़ लिया जाएगा।


जाल में फंसा आरोपी

उस रात पुलिस चुपचाप घर के आसपास तैनात हो गई।

करीब आधी रात को घर के दरवाजे पर दस्तक हुई।

कांता देवी ने दरवाजा खोला।

उसी समय पुलिस अंदर घुस गई और दरवाजे पर खड़े व्यक्ति को पकड़ लिया।

वह व्यक्ति गांव की डेयरी का मालिक प्रवीण सिंह था।


चौंकाने वाला खुलासा

पुलिस पूछताछ में प्रवीण सिंह ने जो बताया, वह बेहद चौंकाने वाला था।

उसने कहा कि उसने कांता देवी को बड़ी रकम दी थी और बदले में कांता देवी ने अपनी पोती रचना तक पहुंच देने का वादा किया था।

हर रात कांता देवी दूध में नींद की गोलियां मिलाकर रचना और उज्जवल को पिला देती थीं।

इसके बाद प्रवीण घर आता और रचना के कमरे में जाता।


दादी भी गिरफ्तार

प्रवीण की इस स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस ने कांता देवी को भी गिरफ्तार कर लिया।

दोनों को थाने ले जाकर पूछताछ की गई और उनके खिलाफ चार्जशीट तैयार की गई।


गांव में फैल गई सनसनी

इस मामले की खबर पूरे गांव में फैल गई।

लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि एक दादी अपनी ही पोती के साथ ऐसा विश्वासघात कर सकती है।

गांव के लोग इस घटना से बेहद आक्रोशित और दुखी थे।


साहस ने दिलाया न्याय

अगर रचना और उसकी सहेली शिवानी हिम्मत न दिखातीं, तो शायद यह अपराध लंबे समय तक चलता रहता।

उनकी समझदारी और साहस के कारण ही सच्चाई सामने आ सकी।


निष्कर्ष

अलवर जिले की यह घटना हमें यह सिखाती है कि अंधविश्वास और डर कई बार अपराध को छिपा देते हैं।

लेकिन सच और साहस हमेशा सच्चाई को सामने लाते हैं।

यह मामला केवल एक अपराध नहीं बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है—कि हर आवाज को गंभीरता से सुनना जरूरी है।

क्योंकि कभी-कभी “भूत” नहीं, बल्कि इंसान ही सबसे बड़ा खतरा बन जाता है।