महिला के घर में सांप घुस गया और फिर हुआ बहुत बड़ा हादसा/S.P के होश उड़ गए/

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सांप, संबंध और एक हादसा

राजस्थान के जोधपुर जिले के सुलेमपुर गाँव में गर्मियों की दोपहर थी। गाँव के लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे, मगर गाँव के सरपंच सुखविंदर सिंह का घर आज कुछ ज्यादा ही शांत था। सुखविंदर, 45 वर्ष का, संपन्न किसान और गाँव का मुखिया था, लेकिन उसका मन अब भी जवानी की ओर भागता था। उसकी पत्नी का कई साल पहले देहांत हो चुका था। उसका बेटा धर्मवीर, 25 साल का, कपड़े की दुकान चलाता था और शराब का आदि था। धर्मवीर की शादी पूजा से हुई थी, जो सुंदर और समझदार थी, मगर पति की लतों और बेरुखी से परेशान थी।

गाँव में ही रहती थी मालती, एक विधवा, जिसका बेटा बाहर मजदूरी करता था। मालती के पास न खेती थी, न कोई खास साधन। वह दूसरों के खेतों में काम कर, जैसे-तैसे अपना जीवन चला रही थी। एक दिन मालती ने सरपंच सुखविंदर से बेटे के इलाज के लिए कर्ज माँगा। सुखविंदर ने शर्त रखी—कुछ गिरवी रखो। मालती के पास कुछ नहीं था, मगर बेटे के लिए वह सरपंच की ‘शर्त’ मान गई। शाम को सरपंच मालती के घर गया, और दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए। मालती को पैसे मिल गए, बेटे का इलाज शुरू हो गया।

समय बीता। सुखविंदर और मालती के बीच यह रिश्ता जारी रहा। धर्मवीर को अपने पिता की गतिविधियों पर शक हुआ, मगर उसने कभी सीधे सवाल नहीं किया। उधर, पूजा पति की बेरुखी से तंग आकर अकेलापन महसूस करने लगी। एक दिन उसने अपने ससुर सुखविंदर से अपने दुख साझा किए। सुखविंदर ने उसे सांत्वना दी, और धीरे-धीरे पूजा और सुखविंदर के बीच भी अवैध संबंध बन गए। अब सरपंच एक ओर मालती, दूसरी ओर अपनी बहू पूजा के साथ संबंध बना रहा था।

धर्मवीर शराब में डूबता गया, पत्नी से दूर होता गया। पूजा को अपने ससुर में सहारा दिखा, और वह भी उसी के साथ खुश रहने लगी। गाँव में किसी को भनक नहीं थी कि सरपंच के घर में क्या चल रहा है।

एक दिन की बात है—पूजा खेतों में चारा काट रही थी, सुखविंदर उसके पास गया। दोनों ने वहीं खेत में संबंध बनाए। थककर दोनों वहीं लेट गए, नग्न अवस्था में। अचानक, घास में से एक जहरीला सांप निकला और पूजा के संवेदनशील हिस्से पर काट गया। पूजा दर्द से तड़प उठी। सुखविंदर घबरा गया, जल्दी से पूजा को कपड़े पहनाए और गाँव की ओर दौड़ा। गाँव वालों को बताया—”मेरी बहू को सांप ने काट लिया है!”

गाँव के लोग इकट्ठा हो गए। पूजा को पास के अस्पताल ले जाया गया, मगर रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। अस्पताल में डॉक्टरों ने पुष्टि की—जहरीले सांप के काटने से मौत हुई। शव का पोस्टमार्टम हुआ, रिपोर्ट वही थी।

धर्मवीर सदमे में था। उसकी पत्नी की मौत अचानक सांप के काटने से हुई थी, मगर उसे शक था—आखिर उसकी पत्नी खेतों में अकेली क्यों थी? कुछ दिनों बाद गाँव के कुछ लोगों ने कानाफूसी की—”सरपंच और उसकी बहू साथ थे खेत में।” धीरे-धीरे यह बात पूरे गाँव में फैल गई। धर्मवीर ने अपने पिता से सच पूछा, मगर सुखविंदर टाल गया। आखिरकार, धर्मवीर ने पुलिस में शिकायत दी।

पुलिस ने पूछताछ की। सुखविंदर ने बताया—”हम दोनों खेत में थे, अचानक सांप ने काट लिया। मैं क्या कर सकता था?” पुलिस ने घटना को प्राकृतिक हादसा मानते हुए, कोई केस दर्ज नहीं किया। मगर गाँव में बदनामी फैल गई। लोग ताने मारने लगे—”सरपंच अपनी बहू के साथ…”, “घर में संस्कार नहीं…”

मालती भी परेशान थी। उसका रिश्ता भी अब गाँव में चर्चा का विषय बन गया था। धर्मवीर ने पिता से झगड़ना शुरू किया—”तुमने मेरी माँ की जगह मालती को दी, मेरी पत्नी को भी चैन से जीने नहीं दिया!” सुखविंदर भी अब पछता रहा था, मगर अब बहुत देर हो चुकी थी।

पूजा की मौत के बाद, धर्मवीर पूरी तरह टूट गया। उसने दुकान बंद कर दी, शराब में डूब गया। सुखविंदर ने खुद को घर में कैद कर लिया। गाँव में अब कोई भी उसके पास मदद माँगने नहीं आता था। मालती ने भी गाँव छोड़ दिया, अपने बेटे के पास शहर चली गई।

एसपी (पुलिस अधीक्षक) तक यह मामला पहुँचा तो वे भी हैरान रह गए—”एक सांप के काटने से एक पूरा परिवार, एक गाँव टूट गया।” उन्होंने गाँव के लोगों को बुलाकर समझाया—”अवैध संबंधों, गलत राहों और छुपे रिश्तों का अंजाम हमेशा बुरा ही होता है। परिवार में संवाद, भरोसा और नैतिकता सबसे जरूरी है।”

समय बीतता गया, मगर पूजा की मौत की कहानी गाँव में मिसाल बन गई। अब गाँव की महिलाएँ अकेले खेतों में नहीं जाती थीं। लोग एक-दूसरे को समझाते—”ग़लत रास्ते का अंत हमेशा बुरा ही होता है।” सुखविंदर ने भी बाकी जीवन पश्चाताप में गुजार दिया।

यह कहानी हमें सिखाती है कि रिश्तों में ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिकता जरूरी है। छुपे हुए संबंध, लालच और वासना किसी भी परिवार को बर्बाद कर सकते हैं। एक सांप के काटने ने न सिर्फ एक जान ली, बल्कि कई जिंदगियों को तबाह कर दिया।

अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो, तो कृपया अपनी राय जरूर दें। ऐसी घटनाओं से सतर्क रहें, और अपने परिवार में संवाद बनाए रखें।