मां के साथ गलत होने पर बेटे ने पुलिस दरोगा को गोली मा*र दी/

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न्याय या प्रतिशोध? जब रक्षक ही बन गए भ-क्ष-क: भरतपुर में सरपंच और दरोगा का ड-ब-ल म-र्ड-र

भरतपुर, राजस्थान – राजस्थान के भरतपुर जिले के बहेनेरा गाँव से एक ऐसी रूह काँप देने वाली घटना सामने आई है, जिसने समाज और कानून व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। एक ग-री-ब विधवा महिला और उसकी मासूम बेटी के साथ हुए अ-न्या-य का अंत दो मौतों के साथ हुआ। यह कहानी सत्ता के दु-रु-प-यो-ग, यौ-न उ-त्पी-ड़-न और अंत में भ-या-न-क प्रतिशोध की है।

1. एक असहाय परिवार और दरिंदों की नज़र

यह कहानी शुरू होती है विद्या देवी से, जो एक विधवा महिला हैं और अपने दो बच्चों—सोनिया (कक्षा 12) और किशोर (11 वर्ष)—के साथ रहती हैं। उनके पति की मृत्यु बीमारी के कारण पहले ही हो चुकी थी। घर का खर्च चलाने के लिए विद्या भेड़-बकरियां चराती थीं, जिसमें उनका 22 वर्षीय देवर अंगद उनकी मदद करता था।

गाँव का सरपंच बलदेव और पुलिस दरोगा बिल्लू, दोनों ही अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने के लिए कुख्यात थे। ये दोनों अक्सर गाँव की ग-री-ब महिलाओं को अपनी ह-वस का शिकार बनाते थे।

2. अ-त्‍या-चा-र का सिलसिला: बकरियों की आड़ में है-वा-नि-यत

5 दिसंबर 2025 को विद्या की बकरियां गलती से सरपंच बलदेव के खेत में घुस गईं। दबंग सरपंच ने एक बकरी को बंधक बना लिया और उसे छोड़ने के बदले विद्या के सामने श-री-रि-क सं-बं-ध बनाने की गंदी शर्त रखी। जब विद्या ने मना किया, तो उसने बकरी की ग-र्दन काटने की ध-म-की दी। अंततः, उसने विद्या को ज़-ब-र-द-स्ती अपने कमरे में खींचा और उनके साथ ग-ल-त काम किया।

जब विद्या ने मदद के लिए पुलिस दरोगा बिल्लू से संपर्क किया, तो उसने भी मदद के बजाय विद्या की म-ज-बू-री का फायदा उठाने की कोशिश की। विद्या ने जब उस पर थूका, तो दरोगा ने बदला लेने की ध-म-की दी। 12 दिसंबर को सरपंच और दरोगा ने मिलकर विद्या को घेरा और उनके साथ सा-मू-हि-क दु-ष्कर्म (गां-ग-रे-प) किया।

3. मासूम बेटी के साथ दरिंदगी

सबसे दुखद मोड़ तब आया जब 19 दिसंबर को विद्या की तबीयत खराब होने के कारण उनकी बेटी सोनिया बकरियां चराने गई। सरपंच और दरोगा ने उस अकेली लड़की को झाड़ियों में पकड़ लिया और उसके साथ भी ब-द-फे-ली की। सोनिया इतनी डरी हुई थी कि उसने घर पर कुछ नहीं बताया।

26 दिसंबर को इन दोनों का साहस इतना बढ़ गया कि वे विद्या के घर पहुँच गए और उन्होंने खुद ही यह कबूल किया कि उन्होंने सोनिया के साथ भी ग-ल-त काम किया है। यह सुनकर विद्या के होश उड़ गए और उन्होंने तुरंत अपने देवर अंगद को बुलाया।

4. खूनी खेल: 11 साल के बच्चे का इंतकाम

जब सोनिया ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई, तो अंगद का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। वह हाथ में गंडासी लेकर खेत की ओर भागा। उसके पीछे सोनिया और 11 साल का किशोर भी थे।

खेत में सरपंच और दरोगा शराब के नशे में थे। सरपंच ने अपनी पिस्तौल निकाल कर अंगद पर तानी, लेकिन अंगद ने गंडासी से उसके हाथ पर वार किया, जिससे पिस्तौल नीचे गिर गई। तभी 11 साल के किशोर ने वह पिस्तौल उठा ली और अपनी माँ और बहन का बदला लेने के लिए दरोगा बिल्लू पर गो-लि-यां चला दीं। वहीं, अंगद ने गंडासी से सरपंच के सिर पर कई वार किए, जिससे उसकी भी मौके पर ही मौ-त हो गई।

5. समाज और कानून के सामने सवाल

पुलिस ने मौके पर पहुँचकर सरपंच और दरोगा के श-व बरामद किए और पूरे परिवार को गिर-फ्तार कर लिया। अब यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है:

एक पक्ष का कहना है: कानून को हाथ में लेना गलत है और हत्या के लिए कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

दूसरा पक्ष का कहना है: जब रक्षक ही भ-क्ष-क बन जाएं और कानून ग-री-बों की रक्षा न करे, तो इंसान को खुद ही न्याय करना पड़ता है।

11 साल के किशोर और 22 साल के अंगद का भविष्य अब अदालत के हाथ में है। लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि अ-न्या-य की अति होने पर एक शांत परिवार भी शि-का-री बन सकता है।

निष्कर्ष: क्या आपको लगता है कि 11 साल के बच्चे और अंगद ने जो किया वह सही था? क्या कानून को इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें माफ कर देना चाहिए? अपनी राय जरूर दें।