माता पिता की एक गलती की वजह से बेटी ने कर दिया सारा खेल खत्म/पुलिस प्रशासन दंग/

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विशेष रिपोर्ट: अलवर का वह रोंगटे खड़े कर देने वाला ‘प्रतिशोध’ – जब दो बेटियों ने मिलकर मिटा दिया अपना ही संसार

राजस्थान के अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ गांव में हाल ही में एक ऐसी घटना घटी है जिसने मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक नैतिकता को झकझोर कर रख दिया है। यह कहानी लालच, धो-खे-बा-जी और अंततः एक खौ-ौ-नाक प्रतिशोध की है, जहाँ दो सगी बहनों ने मिलकर अपने ही माता-पिता और एक पड़ोसी की ह-त्या कर दी।

1. एक साधारण परिवार और लालच का प्रवेश

लक्ष्मणगढ़ गांव का रहने वाला कुंदन सिंह पिछले आठ साल से एक पेट्रोल पंप पर काम करता था। ₹16,000 की मामूली तनख्वाह में वह अपनी पत्नी सुदेश और दो बेटियों, पायल (बड़ी) और गुंजन (छोटी), का भरण-पोषण कर रहा था। गुंजन पढ़ाई में बहुत होनहार थी और उसका सपना अपने माता-पिता का नाम रोशन करना था।

सब कुछ सामान्य चल रहा था, जब तक कि कुंदन के दोस्त सुंदर सिंह ने अपनी एक एकड़ जमीन ₹58 लाख में नहीं बेची। रातों-रात लखपति बने सुंदर सिंह को देखकर कुंदन और उसकी पत्नी सुदेश के मन में लालच का बीज पनपने लगा।

2. मर्यादाओं का पतन: सुदेश और सुंदर का सं-बं-ध

10 अक्टूबर 2025 को कुंदन ने सुंदर को पार्टी के बहाने अपने घर बुलाया। बातों ही बातों में सुदेश को पता चला कि सुंदर के पास लाखों रुपये हैं। गरीबी से तंग आ चुकी सुदेश ने अपने पति के साथ मिलकर एक घिनौनी योजना बनाई। उसने सुंदर को अपने जा-ल में फंसाने का फैसला किया ताकि उसके पैसे हड़पे जा सकें।

कुंदन की मर्जी से, सुदेश ने सुंदर सिंह के साथ ग-ल-त सं-बं-ध (I-llicit re-lations) बनाए। इसके बदले में सुंदर ने उन्हें पैसे देना शुरू कर दिया। मर्यादा की सारी सीमाएं तब लांघ दी गईं जब एक पति ने अपनी ही पत्नी का सौदा चंद रुपयों के लिए कर दिया।

3. मासूमियत का सौदा: पायल के साथ ज-ब-र-द-स्ती

लालच की आग यहीं नहीं रुकी। जब सुंदर की नजर कुंदन की बड़ी बेटी पायल पर पड़ी, तो उसकी नीयत और भी खराब हो गई। 20 अक्टूबर 2025 को, जब घर के बाकी सदस्य बाहर थे, सुंदर ने पायल के साथ दु-र्व्य-व-हार करने की कोशिश की।

बाद में, कुंदन और सुदेश ने अपनी बेटी पायल को डरा-धमकाकर और पैसों के लालच में सुंदर के पास भेजना शुरू कर दिया। एक रात, सुंदर ने चा-कू की नोक पर पायल के साथ ग-ल-त काम (S-e-xual as-sault) किया। जब पायल ने अपनी मां को यह बताया, तो सुदेश ने इंसाफ दिलाने के बजाय सुंदर से ₹1 लाख और लेकर अपनी बेटी की इज्जत का सौदा कर लिया।

4. प्रतिशोध की ज्वाला: गुंजन और पायल की योजना

6 नवंबर 2025 को जब छोटी बेटी गुंजन स्कूल से लौटी, तो उसने अपनी बड़ी बहन पायल को बिलखते हुए पाया। पायल ने शुरू से अंत तक की सारी सच्चाई अपनी छोटी बहन को बता दी। अपनी ही कोख से जन्म देने वाली मां और पिता द्वारा किए गए इस वि-श्वा-स-घा-त को सुनकर 14 साल की गुंजन के अंदर का लावा फूट पड़ा।

दोनों बहनों ने तय किया कि वे इस नरक को खत्म कर देंगी। उन्होंने उसी रात अपने माता-पिता और उस दरिंदे सुंदर सिंह को मौ-त के घाट उतारने की योजना बनाई।

5. क-त्ल की वह खौ-ौ-नाक रात

रात के करीब 11:00 बजे, जब कुंदन और सुदेश गहरी नींद में सो रहे थे, गुंजन ने एक पुरानी कु-ल्हा-ड़ी उठाई और पायल ने एक लोहे का सरि-या। गुंजन ने अपने पिता कुंदन के सिर पर कु-ल्हा-ड़ी से कई वार किए। कुंदन की चीख सुनकर जब सुदेश की आंख खुली, तो पायल ने उसका मुंह दबा लिया और गुंजन ने उस पर भी कु-ल्हा-ड़ी से प्रहार किया। पायल ने गुस्से में अपनी ही मां के पेट में सरि-या उतार दिया।

माता-पिता को खत्म करने के बाद, दोनों बहनें रात 12:00 बजे सुंदर सिंह के घर पहुंचीं। जैसे ही नशे में धुत सुंदर ने दरवाजा खोला, पायल ने उसके पेट में सरि-या घुसा दिया और गुंजन ने उसके सिर पर कु-ल्हा-ड़ी मारकर उसे हमेशा के लिए खामोश कर दिया।

6. आत्मसमर्पण और न्याय का सवाल

इस तिहरे ह-त्या-कांड को अंजाम देने के बाद, दोनों बहनें डरी नहीं। वे सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचीं और दरोगा किशन दत्त के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने बताया कि कैसे उनके माता-पिता ने उनकी इज्जत का सौदा किया था।

पुलिस ने तीनों शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वर्तमान में दोनों बहनें पुलिस की हिरासत में हैं और मामला अदालत में है।

लेख का निष्कर्ष और सामाजिक चिंतन

अलवर की यह घटना समाज के सामने कई कड़वे सवाल खड़े करती है:

क्या गरीबी और लालच इंसान को इतना अंधा बना देता है कि वह अपनी ही संतान का सौदा कर ले?

क्या कानून से पहले इन बेटियों ने जो ‘न्याय’ किया, उसे सही माना जा सकता है?

समाज में नैतिक मूल्यों का इतना पतन क्यों हो रहा है?

यह कहानी केवल एक अपराध की नहीं है, बल्कि एक टूटे हुए बचपन और कुचली हुई गरिमा की चीख है। अदालत का फैसला जो भी हो, लेकिन इस घटना ने लक्ष्मणगढ़ गांव के इतिहास पर एक ऐसा दाग लगा दिया है जो कभी नहीं धुलेगा।