मामा ने सगी भांजी के साथ खेत में कर दिया कारनामा /गांव वालों के होश उड़ गए/

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लखनऊ के बंथरा गांव में सनसनी: सगी भांजी से दुष्कर्म के आरोप के बाद मामा की हत्या, मामी और किशोरी गिरफ्तार

विशेष संवाददाता | बंथरा (लखनऊ)

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बंथरा क्षेत्र से एक अत्यंत संवेदनशील और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति पर अपनी सगी भांजी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। आरोपों के खुलासे के बाद उसकी पत्नी और भांजी ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है और पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।

यह घटनाक्रम दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच घटित बताया जा रहा है।


परिवार की पृष्ठभूमि

बंथरा गांव निवासी चंद्रपाल सिंह एक निजी कारखाने में मजदूरी करता था। परिवार में उसकी पत्नी मीनाक्षी देवी और इकलौती बेटी रजनी (परिवर्तित नाम) थी। आर्थिक स्थिति सीमित थी। चंद्रपाल को शराब की लत थी, जिसके कारण घर में अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च कर देता था।

रजनी ने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की थी और आगे पढ़ाई करना चाहती थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उसका कॉलेज में प्रवेश नहीं हो सका। घर का वातावरण तनावपूर्ण रहने लगा था।


बेटी को मामा के घर भेजने का निर्णय

बताया जाता है कि दिसंबर 2025 की शुरुआत में घर में बढ़ते तनाव और असुरक्षा की भावना के चलते मीनाक्षी देवी ने अपनी बेटी को कुछ समय के लिए अपने भाई बिल्लू (परिवर्तित नाम) के घर भेजने का निर्णय लिया। उनका उद्देश्य था कि बेटी सुरक्षित माहौल में रह सके।

11 दिसंबर 2025 को बिल्लू अपनी बहन के घर आया और रजनी को अपने साथ ले गया। बिल्लू की पत्नी यशोदा (परिवर्तित नाम) ने रजनी का स्वागत किया। दंपत्ति की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने रजनी को बेटी की तरह रखने का आश्वासन दिया।


खेत में कथित दुष्कर्म का आरोप

पुलिस के अनुसार, 21 दिसंबर 2025 को बिल्लू रजनी को खेत दिखाने के बहाने अपने साथ ले गया। आरोप है कि खेत में एकांत स्थान पर उसने कथित रूप से रजनी के साथ जबरन संबंध बनाए। पीड़िता के बयान के अनुसार, आरोपी ने उसे दराती दिखाकर धमकाया और किसी को बताने पर जान से मारने की चेतावनी दी।

घटना के बाद रजनी घर लौटी, लेकिन भय और सामाजिक बदनामी के डर से उसने तत्काल किसी को कुछ नहीं बताया। पुलिस का कहना है कि इसी दौरान आरोपी ने कथित रूप से कई बार उसका शोषण किया।


मामी के मायके जाने के दौरान दोबारा उत्पीड़न

2 जनवरी 2026 को यशोदा अपनी मां की तबीयत खराब होने के कारण मायके चली गईं। आरोप है कि इस दौरान आरोपी ने फिर से रजनी के साथ दुष्कर्म किया। रजनी ने अपनी मां से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसके पास फोन नहीं था और आरोपी का फोन भी उसके नियंत्रण में था।


6 जनवरी को खुला मामला

6 जनवरी 2026 की सुबह यशोदा मायके से लौटीं। उन्होंने घर का दरवाजा अंदर से बंद पाया। काफी देर दस्तक देने के बाद दरवाजा खोला गया। अंदर जाकर उन्होंने रजनी को संदिग्ध स्थिति में पाया। पूछताछ के दौरान रजनी ने कथित दुष्कर्म की पूरी कहानी अपनी मामी को बताई।

पुलिस के अनुसार, यशोदा ने अपने पति से इस बारे में सवाल किया, लेकिन उसने कथित रूप से धमकी दी। इसके बाद यशोदा ने कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया।


हत्या की वारदात

जांच के मुताबिक, उसी शाम यशोदा ने बाजार से नींद की गोलियां खरीदीं। रात के भोजन में गोलियां मिलाकर पति को खिला दीं। जब वह गहरी नींद में सो गया, तब यशोदा और रजनी ने मिलकर उस पर चाकू से हमला किया।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की मौत पेट और गले पर किए गए कई वारों के कारण हुई। शोर सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।


पुलिस की कार्रवाई

स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। प्रारंभिक जांच में हत्या की पुष्टि हुई। यशोदा और रजनी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान दोनों ने हत्या की बात स्वीकार की, लेकिन इसे आत्मरक्षा और लगातार यौन उत्पीड़न के खिलाफ कदम बताया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में हत्या का मामला दर्ज किया है। साथ ही मृतक के खिलाफ दुष्कर्म के आरोपों की भी जांच की जा रही है।


कानूनी जटिलताएं

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मामला कई दृष्टिकोणों से जटिल है। यदि दुष्कर्म के आरोपों की पुष्टि होती है, तो अदालत आत्मरक्षा, उकसावे और मानसिक आघात जैसे पहलुओं पर विचार कर सकती है। हालांकि कानून अपने हाथ में लेना अपराध की श्रेणी में आता है।

यह भी संभव है कि अदालत यह देखे कि क्या हत्या पूर्व नियोजित थी या परिस्थितिजन्य आवेश में की गई। अंतिम निर्णय साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर होगा।


गांव में प्रतिक्रिया

घटना के बाद बंथरा गांव में गहरा सन्नाटा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस प्रकार की घटना की कल्पना भी नहीं की थी। कुछ लोग इसे पारिवारिक त्रासदी बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यदि समय रहते कानूनी सहायता ली जाती तो हत्या जैसी घटना टल सकती थी।

महिला समूहों का कहना है कि अक्सर यौन उत्पीड़न की शिकार किशोरियां सामाजिक बदनामी के डर से चुप रहती हैं। इससे अपराधी को बढ़ावा मिलता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और कानूनी सहायता की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।


सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू

विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला कई गंभीर प्रश्न उठाता है:

परिवार के भीतर सुरक्षा का अभाव

यौन अपराधों की रिपोर्टिंग में झिझक

सामाजिक बदनामी का भय

मानसिक आघात और परामर्श की कमी

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यौन उत्पीड़न की शिकार किशोरियों को तत्काल काउंसलिंग और चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। साथ ही परिवारों को संवाद और विश्वास का वातावरण बनाना चाहिए।


पुलिस का आधिकारिक बयान

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। मेडिकल रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। यदि दुष्कर्म के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो मृतक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाएगा, भले ही वह अब जीवित नहीं है।

अधिकारी ने कहा, “हम निष्पक्ष जांच कर रहे हैं। कानून के अनुसार जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”


निष्कर्ष

लखनऊ के बंथरा गांव की यह घटना एक दुखद पारिवारिक त्रासदी के रूप में सामने आई है। एक ओर कथित यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप है, तो दूसरी ओर हत्या का अपराध। इस मामले ने समाज को झकझोर दिया है और यह सोचने पर मजबूर किया है कि पीड़ितों को समय रहते कानूनी और सामाजिक सहायता कैसे उपलब्ध कराई जाए।

अब यह न्यायालय पर निर्भर करेगा कि साक्ष्यों के आधार पर अंतिम निर्णय क्या होगा। लेकिन यह स्पष्ट है कि संवाद की कमी, भय और अविश्वास ने इस परिवार को एक ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां से लौटना संभव नहीं रहा।

मामला फिलहाल विचाराधीन है और अगली सुनवाई की तारीख का इंतजार किया जा रहा है।