मुस्लिम बच्ची Anabi Ali ने पास की Yogi की कड़ी परीक्षा, CM ने अधिकारियों को दिया एडमिशन का आदेश
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हौसलों की उड़ान: नन्हीं अनाबी अली ने जीता मुख्यमंत्री योगी का दिल, अब लोरेटो कॉन्वेंट में पूरा होगा पढ़ाई का सपना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक सबका दिल जीत लिया है। यह कहानी है तीन साल की नन्हीं अनाबी अली की, जिसकी मासूमियत, आत्मविश्वास और देशप्रेम ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भावुक कर दिया। जनता दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुँची इस बच्ची की मेधा देख मुख्यमंत्री ने न केवल उसे दुलारा, बल्कि अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिए कि बच्ची का दाखिला उसकी पसंद के स्कूल में कराया जाए।
जनता दर्शन में जब गूंजी मासूम आवाज़
लखनऊ के लाटूस रोड की रहने वाली अनाबी अली अपनी माँ और दादा के साथ मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में पहुँची थी। आमतौर पर जनता दर्शन में लोग अपनी जमीनी विवाद, बीमारी के इलाज या आर्थिक मदद की गुहार लेकर आते हैं। लेकिन जब नीली फ्रॉक पहने इस छोटी सी बच्ची ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखी, तो वहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उसके पास पहुँचे और पूछा, “क्या नाम है बेटा?” तो बच्ची ने बड़े ही आत्मविश्वास से जवाब दिया— “अनाबी अली।”

“मुझे लोरेटो में पढ़ना है सर”
अनाबी ने मुख्यमंत्री से किसी खिलौने या मिठाई की मांग नहीं की, बल्कि उसने अपने भविष्य के लिए एक रास्ता मांगा। उसने बड़े ही मासूम लहजे में कहा, “मेरा एडमिशन करा दीजिए।” मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए पूछा, “कहाँ?” तो बच्ची ने तुरंत जवाब दिया— “लोरेटो में।”
बता दें कि लोरेटो कॉन्वेंट लखनऊ के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक है। अनाबी की माँ ने बताया कि उन्होंने स्कूल का फॉर्म भरा था, लेकिन किसी कारणवश अनाबी का चयन नहीं हो पाया। अनाबी की सहेलियों का एडमिशन वहां हो गया था, जिससे वह काफी उदास थी और ज़िद कर रही थी कि उसे उसी स्कूल में पढ़ना है।
देशभक्ति की कविता ने जीता सबका दिल
मुलाकात के दौरान जब मुख्यमंत्री ने अनाबी से पूछा कि उसने अब तक क्या पढ़ा है, तो उसने बिना डरे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। अनाबी ने एक बेहद खूबसूरत कविता सुनाई, जिसके शब्द कुछ इस प्रकार थे:
“शेर बच्चे, शेर बच्चे… हम छोटे हैं तो क्या हुआ, हम दिल के सच्चे हैं। हम गाएंगे, हम खाएंगे, हम बड़े होकर देश की शान बढ़ाएंगे। जय हिंद!”
बच्ची के मुंह से ‘जय हिंद’ का नारा सुनते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसकी पीठ थपथपाई और तुरंत अपने पास मौजूद अधिकारियों को लेटर आगे बढ़ाते हुए कहा, “इनका एडमिशन करवा देना अभी।” मुख्यमंत्री ने बच्ची को आश्वासन दिया कि वह स्कूल जाएगी और खूब मेहनत से पढ़ेगी।
शिक्षा के प्रति जुनून और अभिभावकों की उम्मीद
अनाबी की माँ ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उनकी बेटी पढ़ने में बहुत तेज़ है। वह वर्तमान में एक प्ले हाउस में जाती है और स्कूल जाने के लिए इतनी उत्साहित रहती है कि सुबह एक आवाज़ देते ही उठ जाती है। माँ ने कहा, “हमें बहुत खुशी है कि मुख्यमंत्री जी ने हमारी बात सुनी। लोरेटो में एडमिशन कराना हमारी हैसियत से बाहर लग रहा था, लेकिन अब मुख्यमंत्री जी के आदेश के बाद हमें उम्मीद है कि हमारी बेटी का भविष्य संवर जाएगा।”
अनाबी के दादा ने भी मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील व्यवहार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिस तरह से एक छोटी बच्ची की बात को गंभीरता से लिया, वह यह दर्शाता है कि उनकी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री का ‘बाल प्रेम’ और संवेदनशीलता
यह पहली बार नहीं है जब योगी आदित्यनाथ का बच्चों के प्रति प्रेम सामने आया हो। गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर हो या लखनऊ का मुख्यमंत्री आवास, योगी अक्सर बच्चों के साथ हँसते-खेलते और उन्हें चॉकलेट बांटते नज़र आते हैं। लेकिन अनाबी अली का मामला थोड़ा अलग था। यहाँ एक बच्ची खुद चलकर अपने हक की बात करने आई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में एक सकारात्मक संदेश भेजती हैं। जब राज्य का मुखिया सीधे तौर पर एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी लेता है, तो यह प्रशासनिक मशीनरी को भी संवेदनशील बनाता है।
निष्कर्ष: एक नई मिसाल
अनाबी अली की यह कहानी आज के भारत की तस्वीर है, जहाँ एक मध्यमवर्गीय परिवार की बच्ची अपने सपनों के लिए सीधे मुख्यमंत्री से संवाद कर सकती है। यह घटना साबित करती है कि यदि प्रतिभा हो और उसे सही मंच मिले, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
अनाबी अब जल्द ही लोरेटो कॉन्वेंट की ड्रेस पहनकर स्कूल जाएगी। उसकी यह छोटी सी जीत उन हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी के बावजूद कुछ बड़ा करने का जज़्बा रखते हैं।
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