मेरठ कापसाड़ कांड की पूरी सच्चाई | पुलिस रिपोर्ट
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कपसाड़ कांड की सच्चाई
भाग 1: एक सामान्य दिन की शुरुआत
10 जनवरी 2026 की शाम, उत्तराखंड के रुड़की रेलवे स्टेशन पर भीड़भाड़ थी। यात्री अपनी-अपनी ट्रेनों का इंतज़ार कर रहे थे। सर्दियों की रात थी और हल्का कोहरा छाने लगा था। इसी भीड़ के बीच एक ट्रेन आई जो सहारनपुर से हरिद्वार की ओर जा रही थी। ट्रेन की एक बोगी में एक लड़का बैठा हुआ था, जिसके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था। उसके बगल में एक लड़की चुपचाप बैठी थी।
लड़के ने सामने बैठे एक अनजान यात्री से विनम्रता से कहा, “भाई साहब, क्या मुझे आपका फोन मिल सकता है? मुझे घर पर एक बहुत जरूरी कॉल करनी है। मेरा फोन बंद हो गया है।” पहले तो यात्री ने मना किया, लेकिन लड़के की गिड़गिड़ाहट ने उसे पसीज दिया। उसने अपना फोन लड़के को दे दिया।
भाग 2: एक खतरनाक कॉल
लड़के ने कांपते हाथों से एक नंबर डायल किया। वह नंबर मेरठ के कपसाड़ गांव के एक झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र का था। फोन कनेक्ट होते ही लड़के ने कहा, “मैं निकल गया हूं। हम हरिद्वार जा रहे हैं सब। ठीक है ना?” यह कॉल महज 30 सेकंड की थी। लेकिन उस लड़के को नहीं पता था कि उस डॉक्टर का नंबर पुलिस की निगरानी में था।
जैसे ही कॉल ट्रेस हुआ, पुलिस ने तुरंत हरिद्वार जाने वाली ट्रेन की लोकेशन ट्रेस की। पुलिस ने रुड़की स्टेशन को घेर लिया। यह कहानी सिर्फ एक फोन कॉल या गिरफ्तारी की नहीं थी, बल्कि एक खौफनाक मंजर की थी जिसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कपसाड़ गांव को छावनी में तब्दील कर दिया था।

भाग 3: सुनीता देवी का अपहरण
कहानी की असली शुरुआत 8 जनवरी 2026 को होती है। कपसाड़ गांव में, सुनीता देवी अपनी 20 वर्षीय बेटी रूबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। दोनों मां-बेटी हंसते-खेलते रास्ते पर जा रही थीं, जब अचानक एक सफेद कार उनके पास आई। कार से दो लड़के उतरे, जिनमें से एक था पारस सोम। पारस ने रूबी का हाथ पकड़ लिया और उसे जबरदस्ती कार की तरफ खींचने लगा।
सुनीता देवी ने अपनी बेटी को बचाने की कोशिश की, लेकिन पारस ने उन पर हमला कर दिया। उसने सुनीता को गंभीर चोट पहुंचाई और रूबी को कार में डालकर भाग गया। इस भयानक घटना ने पूरे गांव को हिला कर रख दिया।
भाग 4: पुलिस की कार्रवाई
सुनीता देवी को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। गांव में कोहराम मच गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और पारस और उसके साथी की तलाश शुरू की। लेकिन पारस और रूबी का कोई सुराग नहीं मिला।
भाग 5: पारस की भागने की योजना
पारस ने सुनीता देवी की हत्या के बाद अपनी योजना बनाई। वह रूबी को लेकर सहारनपुर के एक गांव टपरी पहुंचा। वहां से उसने हरिद्वार जाने का मन बनाया। पारस ने एक यात्री के फोन से डॉक्टर राजेंद्र को फोन किया, जो उसकी गिरफ्तारी का कारण बना।
भाग 6: गिरफ्तारी का मंजर
पुलिस ने रुड़की रेलवे स्टेशन पर पारस और रूबी को गिरफ्तार कर लिया। पारस ने पुलिस को बताया कि वह और रूबी एक-दूसरे से प्यार करते थे और उनकी मां ने उनकी शादी का विरोध किया था। लेकिन रूबी ने पुलिस के सामने सच बताया कि उसका अपहरण हुआ था और उसकी मां की हत्या की गई थी।
भाग 7: न्याय की लड़ाई
रूबी का बयान पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। पुलिस ने पारस के खिलाफ सबूत इकट्ठा किए और उसे सख्त सजा दिलाने का प्रयास किया।
भाग 8: समाज का नजरिया
इस घटना ने समाज में जाति, प्यार और नफरत के मुद्दों को फिर से उभारा। कई लोग इस मामले को प्रेम प्रसंग मानते थे, जबकि पीड़ित परिवार ने इसे हत्या और अपहरण का मामला माना।
भाग 9: अंतिम संस्कार का मंजर
सुनीता देवी का अंतिम संस्कार भारी सुरक्षा के बीच किया गया। परिवार को सरकार की तरफ से एक लाख रुपये की मदद का वादा किया गया। लेकिन क्या कोई दौलत उनकी मां को वापस ला सकती है?
भाग 10: पुलिस की भूमिका
पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे। कुछ लोगों ने तारीफ की कि पुलिस ने 60 घंटे में आरोपियों को पकड़ लिया, जबकि दूसरों ने सवाल उठाया कि आखिर गांव में ऐसी गुंडागर्दी कैसे हो गई?
भाग 11: रूबी की वापसी
रूबी की वापसी के बाद गांव में तनाव कम हुआ, लेकिन गुस्सा अभी भी बरकरार था। पारस अब जेल में था, लेकिन उसके परिवार को भी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा था।
भाग 12: अंत में
यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस तरह के समाज में जी रहे हैं। आज भी जाति का जहर और महिलाओं के प्रति अपराध कम नहीं हो रहे हैं। पारस जैसे लड़के जो एक तरफ़ा प्यार या सनक में किसी का हंसता खेलता परिवार उजाड़ देते हैं, उन्हें अपने अंजाम का अंदाजा नहीं होता।
इस घटना ने हमें यह सिखाया है कि अगर हम एकजुट हों, तो हम किसी भी अन्याय का सामना कर सकते हैं। रूबी ने अपनी आवाज उठाई और अब वह सुरक्षित है, लेकिन उसकी मां की कमी उसे हमेशा खलेगी।
संदेश:
इस कहानी से यह संदेश मिलता है कि हमें हमेशा सच्चाई का साथ देना चाहिए और अन्याय के खिलाफ खड़ा होना चाहिए। अगर आप या आपके आस-पास किसी के साथ कुछ गलत हो रहा है, तो चुप मत रहिए। आवाज उठाइए।
जय हिंद!
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