मेरे जनाजे में, सलमान खान से सलीम खान ने क्यों कहीं ये बात! Salim Khan Hospitalised ! Salman Khan

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सलीम खान की जिंदगी की सबसे कठिन जंग: वेंटिलेटर पर दिग्गज लेखक, लिवर कैंसर की आशंका और वह ‘आखिरी सीख’ जिसने सलमान को रुला दिया

मुंबई: भारतीय सिनेमा के इतिहास को अपनी कलम से स्वर्णिम बनाने वाले दिग्गज पटकथा लेखक सलीम खान (Salim Khan) इस समय मुंबई के लीलावती अस्पताल के आईसीयू (ICU) में जीवन और मृत्यु के बीच की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं। 90 वर्षीय सलीम खान को लेकर अस्पताल से आ रही ताजा खबरें न केवल खान परिवार बल्कि पूरे देश को झकझोर देने वाली हैं।

ब्रेकिंग न्यूज़: लिवर कैंसर की आशंका और बायोप्सी का इंतजार

अस्पताल के सूत्रों ने पुष्टि की है कि सलीम खान की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। शुरुआत में उन्हें ब्रेन हेमरेज (Brain Hemorrhage) और मस्तिष्क में खून के थक्के (Brain Clot) के कारण भर्ती कराया गया था, जिसके बाद उनकी आपातकालीन सर्जरी हुई और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।

मेरे जनाजे में, सलमान खान से सलीम खान ने क्यों कहीं ये बात! Salim Khan  Hospitalised ! Salman Khan

लेकिन डॉक्टरों की चिंता तब और बढ़ गई जब गहन जांच के दौरान उनके लिवर (Liver) में कुछ संदिग्ध गांठें और असामान्यताएं पाई गईं। चिकित्सकों की टीम को लिवर कैंसर (Liver Cancer) का गहरा संदेह है, जिसके चलते उनकी बायोप्सी (Biopsy) की गई है। इस समय पूरा खान परिवार भारी मन से उस आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जो यह तय करेगी कि यह बीमारी कितनी घातक है। 90 साल की उम्र में मस्तिष्क और लिवर की यह दोहरी मार एक बहुत बड़ा चिकित्सीय संकट बन गई है।


फूट-फूटकर रो पड़े ‘दबंग’ सलमान खान

अस्पताल के गलियारों से जो दृश्य सामने आ रहे हैं, वे दिल चीर देने वाले हैं। पर्दे पर अपराजेय दिखने वाले सुपरस्टार सलमान खान (Salman Khan) अपने पिता की इस हालत और कैंसर की आशंका को सुनकर पूरी तरह टूट चुके हैं।

सूत्रों के अनुसार, जैसे ही डॉक्टरों ने लिवर की जटिलताओं और बायोप्सी की जानकारी दी, सलमान अस्पताल के एक कोने में अपने भाइयों, अरबाज और सोहेल के गले लगकर फूट-फूटकर रो पड़े। सलमान, जो अक्सर कहते हैं कि उन्हें अपने पिता जितना बड़ा इंसान बनने में कई जन्म लगेंगे, आज उस ‘अस्तित्व की नींव’ को डगमगाता देख अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहे हैं।


सलीम खान की वह ऐतिहासिक सीख: “मेरे जनाजे में गरिमा होनी चाहिए”

इस दुखद घड़ी में सलमान खान को अपने पिता की वह मार्मिक नसीहत बार-बार याद आ रही है, जिसने उनके जीवन जीने के नजरिए को बदल दिया था। यह किस्सा निर्देशक सूरज बड़जात्या की माता के निधन के समय का है।

अंतिम संस्कार से लौटते समय, सलीम खान ने गाड़ी में अपने तीनों बेटों को एक बहुत ही गंभीर बात कही थी। उन्होंने सूरज बड़जात्या के संयम और गरिमा की मिसाल देते हुए कहा था:

“जब एक दिन मैं इस दुनिया से चला जाऊं, तो तुम सूरज और राजबाबू से सीखना कि विदाई कैसे दी जाती है। मेरे जनाजे में कोई तमाशा, कोई हंगामा या बदतमीजी नहीं होनी चाहिए। अगर तुममें से किसी ने भी वहां अपनी गरिमा और तहजीब खोई, तो मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करूंगा। दुख को गरिमा के साथ सहना ही असली संस्कार है।”

आज जब पिता वेंटिलेटर पर मौत से जूझ रहे हैं, सलमान उन्हीं के सिखाए ‘धैर्य’ और ‘संयम’ के साथ खुद को और अपने परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।


एक युग का संघर्ष और दुआओं का दौर

सलीम खान की यह लड़ाई केवल अस्पताल के बिस्तर तक सीमित नहीं है, यह उस जज्बे की कहानी है जिसने ‘शोले’, ‘दीवार’ और ‘जंजीर’ जैसी फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी। आज वही ‘महानायक’ खामोश है।

इस कठिन समय में पूरा खान परिवार—सलमा खान, हेलेन, अलवीरा और अर्पिता—अस्पताल में मौजूद हैं। सोशल मीडिया पर #PrayForSalimKhan ट्रेंड कर रहा है और प्रशंसक उस बायोप्सी रिपोर्ट के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। क्या वह कलम जिसने न जाने कितने नायकों को असंभव जीत दिलाई थी, आज खुद मौत को मात दे पाएगी? पूरा भारत आज इसी एक चमत्कार की उम्मीद कर रहा है।