मेरे पति ने क्रूज़ रद्द कर दिया: “तुम हमारे साथ नहीं आ रही, मेरी एक्स मेरे साथ आ रही है।” और जब वे…
.
.
मेरी पहचान, मेरा हक
अध्याय 1: सुबह की चाय और टूटा सपना
सुबह का समय था, पुणे की मयूर कॉलोनी में सावित्री देशकर अपनी रसोई में खड़ी थी। 63 साल की उम्र, दो कमरे का अपना मकान, एक छोटी बालकनी, और एक दफ्तर जिसे उसने अपने सपनों की तरह सजा रखा था। 28 साल तक संपत्ति सलाहकार रही, पुणे के हर इलाके की जानकारी थी। लोग उसे “ईमानदार सावित्री ताई” कहते थे।
पर उस सुबह, जब फोन पर मोहन का संदेश आया, सावित्री के हाथ से चाय का कप छूट गया। “योजना बदल गई है। तुम जहाज की यात्रा पर नहीं आओगी। निशा मेरे और बच्चों के साथ जा रही है। परिवार का समय।” निशा—मोहन की पहली पत्नी, जो 17 साल पहले उसे छोड़ गई थी—अब फिर से उसकी जगह ले रही थी।
सावित्री ने चुपचाप बर्तन धोए। वह जान गई थी कि जिन लोगों को वह अपना मानती थी, वही उसे कमजोर समझ रहे थे। पर उन्हें नहीं पता था कि उसकी चुप्पी में कितनी ताकत छुपी है।
अध्याय 2: अजनबी अपना ही घर
सावित्री ने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ देखा था—संपत्ति के झगड़े, परिवार में धोखा, रिश्तों में विश्वासघात। लेकिन कभी नहीं सोचा था कि उसका अपना घर ही उसके लिए अजनबी हो जाएगा।
17 साल पहले जब मोहन से शादी की थी, वह 46 की थी, मोहन 41 के। मोहन की पहली शादी टूट चुकी थी। निशा, उनकी पहली पत्नी, मुंबई की बड़ी कंपनी में काम करती थी। दो बच्चे—यश और तान्या। निशा ने तलाक मांगा था, बच्चों की देखभाल मोहन को मिली थी।
सावित्री ने मोहन की कहानी सुनी, और उसके बच्चों को अपनाने का फैसला किया। छोटी सी शादी हुई, कुछ मित्र, कुछ रिश्तेदार। सावित्री यश और तान्या की सौतेली मां बन गई। शुरू के साल अच्छे गए। बच्चों को मां की तरह पाला, उनकी पढ़ाई, खेल, हर ज़रूरत पूरी की।

अध्याय 3: मेहनत की कमाई, पराया सम्मान
सावित्री ने संपत्ति सलाहकार का काम बढ़ाया, पुणे में उसकी पहचान बनी। मोहन की तनख्वाह ठीक थी, लेकिन घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, नए कपड़े, सब सावित्री की कमाई से चलता। उसने कभी शिकायत नहीं की, क्योंकि उसे लगा यही सही है।
10 साल में उसने कोथरूड में बड़ा मकान खरीदा, 12 लाख में। अब उसकी कीमत 1 करोड़ 20 लाख हो गई थी। सारे कागजात उसके नाम पर थे। मोहन का नाम कहीं नहीं। निवेश के लिए हड़पसर में एक मकान खरीदा, स्थायी जमा, पारस्परिक निधि, सोने के गहने—सब उसके नाम पर।
पर मोहन समझते थे कि यह सब उनका है। रिश्तेदारों के सामने कहते, “मेरा घर कैसा लगा?” सावित्री चुप रहती। बच्चों की शादी में भी ज्यादातर खर्चा उसी ने उठाया, पर सम्मान मोहन को मिला।
अध्याय 4: बदलता व्यवहार, टूटता रिश्ता
पिछले एक साल से मोहन का व्यवहार बदलने लगा। उनका फोन हमेशा पास रहता, रात को भी। नए कपड़े, सुगंध, व्यायामशाला—सब कुछ नया था। कभी-कभी देर रात बालकनी में किसी से फुसफुसाकर बात करते। सावित्री ने कभी सवाल नहीं किया, पर उसे एहसास हो गया था कि कुछ बदल रहा है।
तीन महीने पहले मोहन ने 5 लाख मांगे, यश के व्यवसाय के लिए। सावित्री ने अपनी जमा से पैसे दिए, पर यश ने कभी आभार नहीं जताया। दो महीने पहले जहाज यात्रा की योजना बनी, परिवार के साथ। सावित्री उत्साहित थी, पर मोहन ने कहा, “मैं सब व्यवस्था कर लूंगा।” खर्चा 12 लाख था, लेकिन सावित्री ने सोचा शायद मोहन ने भविष्य निधि निकाली होगी।
और फिर वह सुबह आई, जब मोहन ने संदेश भेजा—“तुम नहीं आओगी, निशा आ रही है।”
अध्याय 5: टूटे कप के टुकड़े और नई ताकत
सावित्री रसोई के फर्श पर बैठी थी, टूटा कप उसके सामने था। उसने सब याद किया—17 साल की मेहनत, बच्चों की पढ़ाई, उनकी शादी, घर चलाना। और आज, वह परिवार से बाहर कर दी गई थी।
लेकिन वह रोई नहीं। उसने कप के टुकड़े उठाए, स्नान किया, तैयार हुई, और अपने दफ्तर के कमरे में गई। वहाँ उसके पिता की तस्वीर थी, जिन्होंने उसे सिखाया था—“कागजात संभाल कर रखना, वही सच्चाई का प्रमाण होते हैं।”
उसने अपनी अलमारी खोली, सारी फाइलें देखीं—मकान, बैंक, निवेश, गहने—सब उसके नाम पर। मोहन का नाम कहीं नहीं।
अध्याय 6: अधिकार की लड़ाई
सावित्री ने अपने अधिवक्ता मित्र सुभाष गोखले को फोन किया। सब कुछ बताया—मोहन का संदेश, निशा की वापसी, जहाज यात्रा से बाहर करना। सुभाष ने पूछा, “आपके पास क्या-क्या है?” सावित्री ने बताया—कोथरूड का मकान, हड़पसर का मकान, जमा, गहने—सब उसके नाम पर।
सुभाष ने कहा, “आप विधिक रूप से सुरक्षित हैं। यह सब आपकी संपत्ति है। मोहन का कोई अधिकार नहीं है। अगर आप तलाक लेंगी, तो भी सब आपका ही रहेगा।”
सावित्री ने तलाक के कागज तैयार करवाए, क्रूरता के आधार पर। उसने कोथरूड का मकान बेचने की योजना बनाई। पुराने मित्र रमेश पवार से बात की। मकान 1 करोड़ 10 लाख में बिक गया। पैसे बैंक खाते में आ गए।
अध्याय 7: स्वतंत्रता की सुबह
जहाज यात्रा के दिन, मोहन, यश, तान्या, उनके पति-पत्नी और निशा घर से चले गए। मुझसे किसी ने विदाई तक नहीं ली। सावित्री ने घर का सारा सामान बांध दिया, मोहन और बच्चों का सामान अलग कर दिया। मकान की चाबी नए मालिक को दे दी। ओंध में एक नया मकान खरीद लिया।
तलाक की सूचना, निषेधाज्ञा की आवेदन दायर कर दी। मोहन समुद्र में थे, उन्हें कुछ पता नहीं था। जब लौटे, घर का ताला बदल चुका था। सावित्री ने संदेश भेजा—“मेरे अधिवक्ता से संपर्क करो।”
अध्याय 8: सम्मान की जीत
मोहन ने अधिवक्ता से संपर्क किया, सुभाष ने सारे कागजात दिखाए। मोहन के नाम पर कुछ नहीं था। तलाक की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। यश और तान्या ने भी सावित्री से संपर्क किया, पर उसने साफ कह दिया—“अब मैं तुम्हारी मां नहीं हूं। जब जरूरत थी, तब उपयोग किया। अब जरूरत नहीं तो किनारे कर दिया।”
तीन महीने बाद तलाक पूरा हो गया। सावित्री विधिक रूप से मुक्त थी। मोहन को किराए के कमरे में रहना पड़ा, निशा ने उसे वापस नहीं लिया। बच्चे भी दूर हो गए।
अध्याय 9: नया जीवन, नया अध्याय
सावित्री ने ओंध के नए मकान में अपना जीवन शुरू किया। संपत्ति परामर्श का काम फिर से शुरू किया। पुराने ग्राहक लौट आए। हड़पसर का मकान किराए पर था, बैंक में पैसे थे। जीवन सरल, स्वतंत्र और सम्मानित था।
अब वह शाम को बालकनी में बैठती, चाय पीती, और सोचती—“अकेलापन और एकांत में फर्क होता है। मैं एकांत में हूं, अकेली नहीं।”
अध्याय 10: सबक और संदेश
सावित्री की कहानी हर उस औरत की कहानी है जिसने अपनी मेहनत से सब कुछ बनाया, पर सम्मान किसी और को मिला। उसने सीखा—
-
अपनी संपत्ति अपने नाम पर रखो।
अपने अधिकारों को जानो।
सम्मान सबसे महत्वपूर्ण है।
कमजोरी मत दिखाओ।
अपने अनुभव और ज्ञान पर विश्वास रखो।
आज सावित्री 65 की है, पहले से अधिक मजबूत, स्वतंत्र और प्रसन्न। मोहन अब भी किराए के कमरे में है, निशा ने उसे नहीं अपनाया। बच्चे भी दूर हैं। लेकिन सावित्री ने अपने सम्मान, अपने अधिकार और अपनी पहचान को बचा लिया।
समाप्त
News
JACKPOT! OFW sa CALIFORNIA NANALO sa LOTTO! PERO PINAT*Y PAG-UWI sa PINAS?! SINO PUMAT*Y?!
JACKPOT! OFW sa CALIFORNIA NANALO sa LOTTO! PERO PINAT*Y PAG-UWI sa PINAS?! SINO PUMAT*Y?! . . Part 1: Isang Hindi…
HULI SA AKTO, BABAE NAKAPATONG KAY FATHER
HULI SA AKTO, BABAE NAKAPATONG KAY FATHER . . Part 1: Ang Simula ng Lihim Si Rosanna ay isang batang…
MISIS NAKULONG DAHIL PINAGNAKAWAN SI MISTER NG 2 BILYON NA MANA | DJ ZSAN TAGALOG FACTS AT MYSTERIES
MISIS NAKULONG DAHIL PINAGNAKAWAN SI MISTER NG 2 BILYON NA MANA | DJ ZSAN TAGALOG FACTS AT MYSTERIES . ….
बहू ने कहा: “बचा खाना गरम कर लेना” —मेरे अगले कदम ने सबको चुप करा दिया 😮
बहू ने कहा: “बचा खाना गरम कर लेना” —मेरे अगले कदम ने सबको चुप करा दिया 😮 . . बहू…
“मैडम के पति तो अंदर हैं!” — और मेरा घर उसी दिन टूट गया
“मैडम के पति तो अंदर हैं!” — और मेरा घर उसी दिन टूट गया . . मैडम के पति तो…
नौकरी के लिए बेटी के साथ भटक रहा था आदमी। एक औरत बोली मेरे साथ चलो। आगे जो हुआ…
नौकरी के लिए बेटी के साथ भटक रहा था आदमी। एक औरत बोली मेरे साथ चलो। आगे जो हुआ… ….
End of content
No more pages to load






