मेरे पति 30 साल तक हर गुरुवार बैंक जाते रहे। जब उनकी मौत हुई, तब मुझे पता चला क्यों…

.
.

मेरे पति 30 साल तक हर गुरुवार बैंक जाते रहे, जब उनकी मौत हुई, तब मुझे पता चला क्यों…

अध्यान 1: एक साधारण सी शुरुआत

मेरा नाम सुशीला पंडित है। मैं 54 साल की हूं, और लखनऊ के गोमती नगर सेक्टर पांच में रहती हूं। 30 साल तक मैंने गवर्नमेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज में हिंदी साहित्य पढ़ाया और अब रिटायर हो चुकी हूं। लोग मुझे एक बेसहारा विधवा मानते हैं, जो अपनी बेटी के घर पर निर्भर है, लेकिन वह नहीं जानते कि मेरे पति रमेश पंडित ने मेरे लिए क्या इंतजाम किए थे। मेरी मेहनत की कमाई और रमेश के संजोए हुए पैसे, जिनका पता मुझे तब चला, जब वह हमारे बीच नहीं थे।

रमेश और मेरी शादी को 28 साल हो गए थे। हमारी शादी बहुत साधारण तरीके से हुई थी। ना कोई भव्य आयोजन, ना कोई दिखावा, बस दोनों परिवारों के करीबी लोग थे। शादी के बाद हम गोमती नगर में एक छोटे से किराए के फ्लैट में रहने लगे थे। जिंदगी धीरे-धीरे चल रही थी। रमेश पोस्ट ऑफिस में क्लर्क थे, और मैं स्कूल में पढ़ाती थी। दोनों ने मिलकर अपनी छोटी सी दुनिया बनाई थी।

हमारी बेटी निधि की पैदाइश शादी के तीन साल बाद हुई थी। वह हमारी खुशी का स्रोत बनी, और हम दोनों ने मिलकर उसे अच्छी से अच्छी शिक्षा देने का वादा किया। हम दोनों मिलकर निधि की पढ़ाई पर पूरा ध्यान देते थे। रमेश गणित में बहुत रुचि रखते थे और वह शाम को निधि के साथ बैठकर गणित के सवाल हल करते थे। धीरे-धीरे निधि पढ़ाई में अव्‍वल रहने लगी और हमेशा स्कूल में टॉप करती रही।

अध्यान 2: रमेश की आदत और मेरी अंजान सी चिंता

रमेश की एक आदत थी, जो मुझे हमेशा परेशान करती थी। हर गुरुवार वह सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर तैयार हो जाते थे और बैंक चले जाते थे। मैं अक्सर पूछती थी, “रमेश, तुम हर गुरुवार बैंक क्यों जाते हो?” लेकिन वह हमेशा यही जवाब देते, “कुछ जरूरी काम है।” मुझे कभी शक नहीं हुआ, क्योंकि वह बहुत ईमानदार और सच्चे इंसान थे। हमारी शादी में कभी भी कोई दिक्कत नहीं आई, और रमेश ने कभी भी मुझे निराश नहीं किया।

हमारा जीवन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था। हम दोनों ने मिलकर निधि को पढ़ाया और उसका जीवन संवारने की पूरी कोशिश की। निधि जब 12वीं में थी, हमने फैसला किया कि अब हमें अपना घर खरीदना चाहिए। किराए के फ्लैट में रहते हुए लगभग 18 साल हो चुके थे, और अब हमने गोमती नगर सेक्टर 5 में एक तीन बीएचके का घर खरीदा। वह घर हमारे लिए बहुत खास था। रमेश ने बगीचे में गुलाब और मोगरे के पौधे लगाए थे, और हम सब शाम को वहां बैठकर चाय पीते थे। निधि की पढ़ाई भी जारी रही और उसने इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया।

लेकिन इसके बावजूद, रमेश हर गुरुवार बैंक जाते थे, और मैं हमेशा यही सोचती थी कि आखिर वह क्यों जाते हैं? मुझे लगा कि शायद कुछ जरूरी काम हो सकता है, लेकिन मैंने कभी उससे ज्यादा पूछताछ नहीं की।

अध्यान 3: निधि की शादी और नया बदलाव

निधि ने कॉलेज खत्म करने के बाद एक लड़के से प्यार किया, जिसका नाम गौरव चोपड़ा था। गौरव रियल एस्टेट का काम करता था, और उसकी मां कुसुम के साथ हमारे घर आए थे। शुरुआत में मुझे गौरव और उसकी मां कुसुम की आदतें थोड़ी अजीब लगीं, क्योंकि वह हमारे घर को बहुत ध्यान से देख रहे थे, और कुसुम हमेशा हिसाब से सवाल पूछती थीं, जैसे “घर कितने का है?” और “यह कब खरीदा?” मुझे थोड़ा अटपटा लगा था, लेकिन रमेश ने शांति से सबका जवाब दिया।

शादी के बाद, निधि और गौरव अपने किराए के फ्लैट में रहने लगे। पहले कुछ महीने सब ठीक था, लेकिन फिर धीरे-धीरे सब बदलने लगा। गौरव की बातें और उसका व्यवहार कुछ अजीब सा हो गया। वह हर समय पैसा और संपत्ति की बात करने लगा, और कुसुम भी उसी दिशा में सोचने लगीं। मुझे लगा कि शायद मेरी बेटी को इससे कुछ समस्या हो सकती है, लेकिन मैं चुप रही।

अध्यान 4: रमेश का निधन और कुसुम का साजिश

फिर एक दिन अचानक रमेश का एक्सीडेंट हो गया। वह रात को दूध लेने के लिए स्कूटर से गए थे, और रास्ते में ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। रमेश की मौत के बाद मेरा दिल पूरी तरह से टूट गया। निधि भी बहुत दुखी थी, और गौरव और कुसुम भी हमारे पास आए थे।

रमेश की मौत के बाद, मुझे एहसास हुआ कि अब मेरी जिंदगी में अकेलापन आ गया है। मैं घर में अकेली रहती थी, और निधि कभी-कभी मेरे पास आती थी, लेकिन वह भी अपनी शादी और काम में व्यस्त रहती थी। एक दिन मुझे रमेश के पोस्ट ऑफिस से फोन आया कि उसके प्रोविडेंट फंड और बीमा की राशि मिलनी है। करीब ₹1 लाख थे। मैंने वह पैसे बैंक में जमा किए और सोचा कि इन्हें एफडी में डाल दूं। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ, जिसने मुझे झकझोर दिया।

मेरे दामाद गौरव और कुसुम ने मुझे अपनी संपत्ति के बारे में बहुत दबाव डाला। उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे अपना घर किराए पर दे देना चाहिए क्योंकि अब मैं अकेली हूं और इस बड़े घर में रहना मेरे लिए मुश्किल होगा। मुझे समझ में आ गया कि उनका इरादा साफ नहीं था। उन्होंने मुझसे यह भी कहा कि घर अब निधि का भी है, और इसे किराए पर देना हमारी भलाई के लिए सही रहेगा।

अध्यान 5: रमेश के राज़ का खुलासा

रमेश ने 30 साल तक हर गुरुवार बैंक जाने की आदत बनाई थी, लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि वह वहां क्या करते थे। मैंने तय किया कि मैं उस बैंक में जाऊंगी और पता करूंगी कि रमेश वहां क्यों जाते थे। मैं बैंक गई, और वहां के मैनेजर से मिली। उन्होंने मुझे बताया कि रमेश ने मेरी और मेरी बेटी की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा इंतजाम किया था। उन्होंने 30 साल तक बैंक में हर तनख्वाह का हिस्सा जमा किया, जो अब हमारे पास था।

राजीव साहब ने बताया कि रमेश ने मेरे नाम पर छह एफडी बनाई थी, हर एफडी में ₹10 से ₹15 लाख थे। इसके अलावा, उनके पास म्यूच्यूल फंड, लाइफ इंश्योरेंस और गोल्ड बॉन्ड जैसी चीजें थीं। सब कुछ मेरे नाम पर था। यह सब जानकर मेरी आंखों में आंसू आ गए। रमेश ने मुझे कभी नहीं बताया था कि उन्होंने इतनी मेहनत से हमारी सुरक्षा के लिए इतने इंतजाम किए थे।

अध्यान 6: गौरव और कुसुम का चेहरा उजागर होना

अब मुझे यह समझ में आया कि मेरे पति ने मुझे अकेला नहीं छोड़ा था। उन्होंने हर कदम पर मेरी सुरक्षा और भविष्य के लिए सोच रखा था। जब कुसुम और गौरव ने घर किराए पर देने का दबाव डाला, तो मैंने उनका पूरा खेल समझ लिया। मैंने अपनी सारी संपत्ति की जानकारी ले ली थी और तय किया कि अब मैं खुद के लिए खड़ी होऊं।

इसके बाद मैंने गौरव और कुसुम से सामने आकर बात की। मैंने उन्हें बताया कि रमेश ने अपनी सारी संपत्ति मेरे नाम की थी। मैंने उन्हें बताया कि उनकी सारी योजनाओं का अब कोई असर नहीं होने वाला था। गौरव और कुसुम को यह सुनकर बहुत झटका लगा, और वह हारकर चुप हो गए।

इस पूरे घटनाक्रम ने मुझे यह सिखाया कि कभी भी अपनी मेहनत और मेहनत से अर्जित संपत्ति को दूसरों के सामने न खोले। और एक मजबूत महिला के रूप में अपनी सुरक्षा और इज्जत की रक्षा करना सबसे महत्वपूर्ण होता है।

समाप्त।