मेरे बच्चों ने मुझे दिल्ली हवाई अड्डे पर छोड़ दिया। एक करोड़पति ने फुसफुसाया: “वे पछताएँगे”

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मेरे बच्चों ने मुझे दिल्ली हवाई अड्डे पर छोड़ दिया, एक करोड़पति ने फुसफुसाया: “वे पछताएंगे”

यह कहानी एक ऐसी महिला की है, जिसने अपनी पूरी जिंदगी अपने परिवार के लिए समर्पित की थी, लेकिन जब उसके बच्चों ने उसे धोखा दिया और उसके साथ बेइज्जती की, तो एक अजनबी की मदद से उसकी दुनिया पूरी तरह बदल गई। इस घटना ने न सिर्फ उसकी जिंदगी को नया मोड़ दिया, बल्कि यह हमें यह सिखाती है कि किसी के साथ किया गया अन्याय हमेशा वापस आता है।

जया श्री दत्ता का संघर्ष

जया श्री दत्ता, 67 साल की महिला, दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 11 में रहती थीं। उनका जीवन आसान नहीं था। पति रमेश दत्ता, एक सिविल कॉन्ट्रक्टर, के साथ उन्होंने कई सालों तक संघर्ष किया था और अपनी मेहनत से काफी संपत्ति बनाई थी। रमेश की मृत्यु के बाद जया के पास उनकी मेहनत की कमाई, इंश्योरेंस की रकम, और दो प्रॉपर्टीज़ थी, एक रोहिणी में और दूसरी कनॉट प्लेस में।

उनकी जिंदगी आराम से चल रही थी, लेकिन उनका बेटा रोहित और बहू सिमरन, जो आईटी कंपनी में काम करते थे, धीरे-धीरे बदलने लगे। शादी के बाद, रोहित ने अपनी मां से दूरी बनानी शुरू कर दी थी, और सिमरन ने भी हमेशा जया को नजरअंदाज किया।

जया को यह सब समझ में नहीं आता था, लेकिन वह चुपचाप सोचती रहती थीं। वह जानती थीं कि समय के साथ हर चीज़ बदल जाती है, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि उसका अपना बेटा उसे इस तरह तंग करेगा।

प्रॉपर्टी ट्रांसफर की कोशिश

एक दिन, रात के करीब 11 बजे, रोहित ने जया से कहा, “मां, यह रोहिणी वाला घर मेरे नाम करवा दो।” जया चौंक गईं और पूछा, “क्यों?” रोहित ने कहा, “मां, टैक्स के हिसाब से अच्छा रहेगा। तुम्हारे नाम पर इतनी प्रॉपर्टी है, अगर तुम्हारे नाम से ट्रांसफर हो जाएगा तो हमें टैक्स में फायदा होगा।”

जया ने सोचा कि यह सही नहीं है। वह समझ नहीं पाई कि रोहित ऐसा क्यों कह रहा है, लेकिन उसने मना नहीं किया और कहा कि वह सोचकर बताएगी। अगले कुछ दिनों में रोहित ने कागजात लाकर जया से साइन करने को कहा, लेकिन वह उसे बिना किसी वकील के साइन नहीं करना चाहती थी।

सिमरन का दखल

सिमरन, रोहित की पत्नी, ने जया से कहा, “मम्मी जी, आजकल के जमाने में बच्चों को अपने पेरेंट्स की फाइनेंशियल सिक्योरिटी का ख्याल रखना चाहिए। आप लकी हैं कि रोहित इतना सोच रहा है।” इस पर जया को थोड़ी शक हुआ, लेकिन वह फिर भी कुछ नहीं बोलीं और सोचने के लिए वक्त मांगा।

कुछ दिन बाद, जब सिमरन ने जया का कांटेक्ट रजिस्टर उठा लिया और उसे फेंक दिया, तो जया का दिल टूट गया। वह समझ गईं कि यह सब एक साजिश थी। यह सिर्फ जिम की बात नहीं थी, यह उसकी पहचान और मेहनत को खत्म करने की कोशिश थी।

अदिति सेन से सलाह

जया ने अपनी पुरानी सहेली विभा से संपर्क किया, जो अब रिटायर हो चुकी थी और बैंक में काम करती थी। विभा ने उसे सलाह दी कि वह किसी अच्छे प्रॉपर्टी लॉयर से मिलें। जया ने तुरंत एक रिटायर्ड जज संजीव बनर्जी से संपर्क किया, जिन्होंने उसे एक अच्छी प्रॉपर्टी लॉयर, अदिति सेन, से मिलने का सुझाव दिया।

अदिति सेन से मिलने के बाद जया को पता चला कि अगर वह कागजात साइन कर देती, तो उनकी प्रॉपर्टी रोहित के नाम चली जाती, और वह कभी भी इसे वापस नहीं ले सकती थीं।

ससुराल वालों से लड़ाई और ट्रस्ट की शुरुआत

जया ने समझ लिया कि रोहित और सिमरन उसे धोखा देने की कोशिश कर रहे थे। फिर, उसने तय किया कि वह अपनी संपत्ति को ट्रस्ट में ट्रांसफर करेगी। जया ने अपनी सारी संपत्ति पूजा के नाम कर दी, जो अमेरिका में रहती थी और जो डॉक्टर थी। पूजा ने उसे भरोसा दिलाया कि वह उसकी संपत्ति का ध्यान रखेगी और उसे कभी भी नुकसान नहीं होने देगी।

जब रोहित को यह पता चला कि जया ने सब कुछ ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दिया है, तो उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। उसने जया से मांग की, “मां, मुझे 30 लाख चाहिए।” लेकिन जया ने मना कर दिया। इस पर रोहित ने उसे तंग करना शुरू कर दिया।

गोवा ट्रिप और साजिश का खुलासा

एक दिन रोहित ने जया को कहा, “मम्मी जी, हम सब गोवा जा रहे हैं, तुम भी हमारे साथ चलो।” जया को यह अजीब लगा, क्योंकि महीनों से वह उनसे ठीक से बात नहीं कर रहा था। लेकिन जया ने मना नहीं किया और टिकट बुक करवा लिया।

अदिति सेन ने उसे सतर्क किया कि कहीं वह गोवा में अकेले छोड़ न दें। जया ने सब कुछ सोचकर ट्रिप पर जाने का फैसला किया। गोवा के लिए रवाना होने से पहले, जया ने अपने सभी जरूरी कागजात एक ब्राउन लिफाफे में रख लिए थे, जिसमें प्रॉपर्टी पेपर्स, बैंक स्टेटमेंट और ट्रस्ट के कागजात थे।

रोहित और सिमरन की साजिश

जब जया एयरपोर्ट पर पहुंची, तो रोहित ने कहा, “मां, तुम्हारा सूटकेस दिखाओ, चेक करना है कि सब कुछ सही है या नहीं।” जया ने सूटकेस खोला, और रोहित ने लिफाफे को निकालकर देखा। उसकी आंखें लाल हो गईं। “यह तुमने क्यों रखा है?” जया ने कहा, “यह मेरे कागजात हैं। तुमसे कुछ छुपाया नहीं है।”

रोहित ने लिफाफा जया से छीन लिया और कहा, “यह तुम्हें वापस नहीं मिलेगा।” उसने कहा, “तुम गोवा नहीं जा रही हो, हम अकेले जा रहे हैं। तुम यहीं रहो।”

रणवीर सिंघानिया की मदद और सच्चाई का खुलासा

उस समय, एक सज्जन व्यक्ति, रणवीर सिंघानिया, ने जया की मदद की। उसने कहा, “आपकी मदद करने के लिए मैं हूं।” और जया को अपनी गाड़ी में बैठाकर घर ले आया। रणवीर की पत्नी सुमन सिंघानिया ने जया का स्वागत किया और उसकी देखभाल की। रणवीर ने कहा, “आपको अब अकेले नहीं रहना चाहिए।” तीन दिन बाद, रणवीर ने जया से कहा, “अब आप केस दर्ज करवाइए और अपना घर का ताला बदलवाइए।”

जया ने पुलिस के साथ मिलकर रोहित और सिमरन के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाया।

सजगता, न्याय और सुकून की शुरुआत

जया ने अदिति सेन की मदद से सारे सबूत जुटाए और कोर्ट में मामला जीत लिया। जया की सच्चाई सामने आई, और रोहित और सिमरन को सजा मिली। रोहित की नौकरी चली गई, और सिमरन का रिश्ता टूट गया। जया ने अपनी संपत्ति को ट्रस्ट में ट्रांसफर किया और अब वह अपने जीवन में शांति से जीने लगी।

उस दिन के बाद जया ने सुकून से अपनी जिंदगी जीना शुरू किया, अपने पुराने क्लाइंट्स से फिर से संपर्क किया और अपने इंटीरियर डिजाइन के काम को फिर से शुरू किया। उसने साबित किया कि इज्जत और मेहनत से बड़ा कोई संपत्ति नहीं हो सकती।

निष्कर्ष

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जब आप अपने अधिकारों को समझते हैं और उनका सही तरीके से उपयोग करते हैं, तो किसी भी हालात में आप अपने रास्ते पर चल सकते हैं। जया की तरह, किसी भी उम्र में आप अपने आत्मसम्मान को बनाए रख सकते हैं और जो गलत किया गया हो, उसे सुधार सकते हैं।