लड़के ने मदद के लिए लड़की का हाथ थामा, लड़की ने गलत समझा लिया.. फिर जो हुआ
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यह कहानी है आदित्य और राधा की, दो अनजान लोग जिनकी मुलाकात एक साधारण दिन पर मायापुर के मंदिर में हुई। आदित्य दिल्ली में एक सॉफ्टवेयर कंपनी का सीनियर मैनेजर था। वह अपनी बहन की शादी में शामिल होने मायापुर आया था। शादी खत्म होने के बाद, घर लौटने से पहले उसने सोचा कि मंदिर जाकर दर्शन कर लेता हूं। सुबह जल्दी मंदिर पहुंचा, जहां भक्तों की भीड़, घंटियों की आवाज़ और आस्था का माहौल था। प्रसाद लेकर बाहर निकला तो उसका फोन गिर गया और स्क्रीन टूट गई। पास खड़ी एक लड़की ने तंज भरी मुस्कान के साथ कहा, “भगवान के घर से निकले और पहला शब्द यार।” आदित्य थोड़ा हैरान हुआ। लड़की साड़ी में लिपटी थी, माथे पर बड़ी सी बिंदी और आंखों में घमंड था। उसने आदित्य से कहा कि आजकल के लड़के सिर्फ दिखावे के लिए मंदिर आते हैं, असली आस्था कहां है। आदित्य कुछ कह नहीं पाया।
शाम को रेलवे स्टेशन पहुंचा तो टिकट काउंटर पर भारी भीड़ थी। उसकी ट्रेन दो घंटे बाद थी पर टिकट नहीं मिला था। वेटिंग रूम में बैठा तो देखा वही लड़की, इस बार जींस और टॉप में, सिर पर केप लगाए। उसने आदित्य को देखा और नजरें फेर लीं। तभी अनाउंसमेंट हुई कि दिल्ली जाने वाली सभी ट्रेनें आठ घंटे के लिए रद्द कर दी गई हैं। आदित्य का दिमाग चकरा गया। होटल इतनी रात को महंगा था और फर्श पर बैठने वाले यात्री देख कर उसे लगा कि यह जगह सुरक्षित नहीं है। उसने लड़की से कहा कि वह उसे होटल तक छोड़ देगा। लड़की झल्लाई, पर फिर धीरे से बोली कि वह साथ चल सकती है। उसने खुद को राधा बताया।
बारिश हो रही थी, सड़कें सुनसान थीं। एक ऑटो मिला और वे होटल पहुंचे। रिसेप्शनिस्ट ने कहा कि सिर्फ एक रूम बचा है। आदित्य ने कहा कि वह लॉबी में रहेगा और राधा को रूम दे दिया। राधा ने पहली बार आदित्य में कोमलता देखी। सुबह जब वह नीचे आई तो आदित्य वहीं था। उसने होटल के पैसे देने की कोशिश की पर आदित्य ने मना कर दिया। आदित्य ने कहा यह एहसान नहीं, इंसानियत है।
आदित्य दिल्ली लौट गया, पर मन कहीं और था। राधा भी अपने फ्लैट में अकेली बैठी थी। उसने आदित्य को नंबर नहीं दिया था। वह एक निजी फर्म में अकाउंटेंट थी। बॉस की सख्ती, काम का दबाव और अकेलापन उसे तोड़ रहे थे। बचपन से ही उसने सीखा था कि भावनाएं दिखाना कमजोरी है। इसलिए वह कठोर बनी रहती थी।
कुछ दिन बाद आदित्य को कोलकाता जाने का मौका मिला। कोलकाता में पार्क स्ट्रीट पर एक कैफे के बाहर उसने राधा को देखा। उनकी आंखें मिलीं। राधा का चेहरा सफेद पड़ गया। आदित्य ने उससे बात की। राधा ने बताया कि वह किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती, इसलिए कठोर बनी है। आदित्य ने कहा कि वह उसे अकेला नहीं छोड़ेगा। राधा ने अपना नंबर दिया।

धीरे-धीरे दोनों की बातचीत बढ़ी। राधा का कठोर मुखौटा पिघलने लगा। एक दिन राधा ने बताया कि उसे ब्लड कैंसर है। शुरुआती स्टेज में। आदित्य ने तुरंत अस्पताल जाकर उसका पूरा ख्याल रखना शुरू किया। उसने अपनी नौकरी से छुट्टी ली और कोलकाता में रुक गया। राधा की केमोथेरेपी शुरू हुई। बाल झड़ने लगे। वह आईने में खुद को देखकर रोती। आदित्य ने कहा, “तुम मेरे लिए सबसे खूबसूरत हो।”
चार महीने के इलाज के बाद राधा ठीक होने लगी। डॉक्टर ने कहा कि कैंसर काबू में आ गया है। राधा ने आदित्य से कहा कि उसने उसकी जान बचाई है और अब वह उसे कभी नहीं छोड़ेगी। आदित्य ने कहा कि वह भी उसे कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। छह महीने बाद दोनों ने शादी कर ली। उनकी शादी छोटी थी पर दिल से भरी हुई।
एक शाम छत पर बैठकर राधा ने आदित्य से माफी मांगी कि उसने शुरुआत में बुरा व्यवहार किया था। आदित्य ने कहा कि वह समझता है, उसने खुद को बचाने के लिए कठोर बनना सीखा था। राधा ने कहा कि आदित्य ने उसे जीना, प्यार करना और भरोसा करना सिखाया। आदित्य ने मुस्कुराते हुए कहा कि उसने सब कुछ पाया है, राधा को पाया, प्यार पाया और जिंदगी का असली मतलब जाना।
यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा प्यार हर मुश्किल का सामना कर सकता है। कभी-कभी अनजान मुलाकातें जिंदगी बदल देती हैं। समाज का दबाव और कठिनाइयां इंसान को कठोर बना देती हैं, लेकिन प्यार और सहारा ही जीवन की असली ताकत है। आदित्य का निर्णय सही था क्योंकि उसने राधा की मदद की और उसके साथ खड़ा रहा, जिससे दोनों ने मिलकर मुश्किलों को पार किया।
आपको क्या लगता है, आदित्य का निर्णय सही था या गलत? कृपया कमेंट में बताएं। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो इसे लाइक करें, शेयर करें और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें।
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