लाल किले पर भिखारी लड़के का भाषण जिसने पूरा देश खड़ा कर दिया | 26 जनवरी Republic Day Story Hindi

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लाल किले पर भिखारी लड़के का भाषण जिसने पूरा देश खड़ा कर दिया

यह कहानी 26 जनवरी 2024 के गणतंत्र दिवस की है, जब एक भिखारी लड़के ने लाल किले पर ऐसा भाषण दिया कि पूरा देश सन्न रह गया। यह एक कहानी है आत्मविश्वास, संघर्ष, और असली गणतंत्र की, जो सिर्फ बड़े नेताओं के लिए नहीं बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है, जिसे कभी समाज ने अनदेखा किया।

गणतंत्र दिवस की तैयारी

26 जनवरी 2024, भारत का 75वां गणतंत्र दिवस था। देशभर में हर जगह इस दिन की तैयारी जोरों-शोरों से चल रही थी। दिल्ली का लाल किला, जहां हर साल गणतंत्र दिवस की परेड होती है, उस दिन सजधज कर तैयार था। आसमान में तिरंगे के रंगों वाली घटाएं, सुरक्षा की तगड़ी व्यवस्था, और मंच पर बैठने के लिए प्रमुख नेताओं की लिस्ट तैयार थी। इस साल प्रधानमंत्री ने देश के सबसे प्रसिद्ध युवा वक्ता, डॉक्टर विक्रम, को बुलाया था, जो पिछले साल संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे और जिनके भाषणों को करोड़ों लोग सुनते थे।

हालांकि, इस दिन एक ऐसी घटना घटी, जो किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

डॉक्टर विक्रम का न आना

सुबह 9 बजे, जब मंच पर हर कुछ सेट था और भाषण देने के लिए डॉक्टर विक्रम का इंतजार हो रहा था, अचानक खबर आई कि उनका कार एक्सीडेंट हो गया है और वह अस्पताल में हैं। प्रधानमंत्री और उनके अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें थीं। भाषण तैयार था, लेकिन अब इसे कौन पढ़ेगा? यह कोई मामूली सवाल नहीं था। यह मंच इतना बड़ा था कि वहां कोई भी नेता या वक्ता खड़ा होकर उसी प्रभावशाली अंदाज में भाषण नहीं दे सकता था जैसा कि डॉक्टर विक्रम देते थे।

समाज के सबसे बड़े मंच पर, जहां प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक सभी लोग बैठे थे, कोई भी वक्ता नहीं था। प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव के माथे पर पसीना था। उन्होंने सोचा, क्या कोई विकल्प है? लेकिन विकल्प न के बराबर थे। 90 मिनट में भाषण देना था और कोई भी वक्ता इस समय तक वहां नहीं पहुंच सकता था।

आकाश का साहस

उसी समय, जब लाल किले के पिछले हिस्से में एक लड़का कूड़े के डिब्बे के पास खड़ा था, उसने सबकी नजरें अपनी तरफ खींच लीं। यह लड़का भिखारी जैसा लग रहा था, और उसकी हालत ऐसी थी कि कोई उसे गंभीरता से नहीं ले सकता था। उसका नाम आकाश था, और उसकी उम्र शायद 14 या 15 साल होगी। उसके कपड़े फटे हुए थे, और वह नंगे पैर था। उसने कभी स्कूल नहीं देखा था, लेकिन उसका दिल कुछ अलग ही था। उसकी आंखों में एक भूख थी, न कि खाने की, बल्कि ज्ञान की। वह हर भाषण को ध्यान से सुनता था और हमेशा लाल किले के आसपास खड़ा हो जाता था, जब कोई बड़ा नेता मंच से भाषण देता।

आज जब आकाश ने सुना कि मुख्य वक्ता नहीं आएंगे, तो वह चुपचाप उस ग्रुप की ओर बढ़ गया जहां प्रधानमंत्री और अन्य बड़े अधिकारी खड़े थे। सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोक लिया, लेकिन आकाश ने कहा, “मैं भाषण दे सकता हूं।”

प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव ने उसे देखा। फटे कपड़े, गंदे पैर, उलझे बाल, और नन्हा सा लड़का। उन्होंने हंसी में कहा, “यह लाल किला है, तेरा स्कूल नहीं।” लेकिन आकाश ने फिर से कहा, “मैं बोल सकता हूं। मैंने हर भाषण सुना है।”

प्रधानमंत्री ने धीरे से पूछा, “तुझे कैसे पता कि क्या कहना है?” आकाश ने अपनी जेब से एक कागज का टुकड़ा निकाला, जिस पर लिखा था, “गणतंत्र मेरे लिए क्या है?” वह कागज काफी पुराना था, और उसकी लिखावट भी बचकानी थी, लेकिन शब्दों में सच्चाई थी।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों ने कागज को देखा, और फिर प्रधानमंत्री ने आकाश से पूछा, “तू इतना छोटा है, तुझे डर नहीं लगता?” आकाश ने जवाब दिया, “डर तो लगता है, लेकिन बोलने से कम लगता है।”

प्रधानमंत्री को उसकी बातों में एक ऐसी ताकत दिखी, जो शब्दों से ज्यादा बोल रही थी। उन्होंने आकाश से कहा, “ठीक है, तू बोलेगा, लेकिन एक शर्त है। तुझे वही बोलना है जो तेरे दिल में है।” आकाश ने सिर हिलाया, “मैं वही बोलूंगा जो मैंने महसूस किया है।”

आकाश का भाषण

आखिरकार, आकाश मंच पर खड़ा हुआ। उसके हाथ कांप रहे थे, लेकिन उसके दिल में एक दृढ़ विश्वास था। उसने माइक पकड़ते हुए कहा, “नमस्ते, मेरा नाम आकाश है।” जैसे ही उसने यह कहा, पूरे लाल किले में हलचल मच गई। एक भिखारी लड़का, जो कूड़े के डिब्बे के पास खड़ा था, अब देश के सामने खड़ा था। उसने जो कहा, वह पूरे देश के लिए एक सबक बन गया।

“गणतंत्र मेरे लिए क्या है? जब मैं भूखा हूं, तो मुझे मुफ्त दाने की लाइन दिखती है। जब मेरी दादी को अस्पताल में बिस्तर नहीं मिलता, तब मुझे यह सवाल नहीं पता चलता कि गणतंत्र क्या है। जब मैं स्कूल के बाहर खड़ा रहता हूं और देखता हूं कि बच्चे क्या पढ़ते हैं, तो मुझे यही लगता है कि गणतंत्र क्या है?”

आकाश ने माइक से कहा, “गणतंत्र वह नहीं है, जब हम सिर्फ झंडा फहराते हैं, और नेताओं के भाषण सुनते हैं। गणतंत्र वह है जब मेरे जैसे बच्चों को भी स्कूल जाने का मौका मिले। गणतंत्र वह है जब मेरे जैसे बच्चों को भी वही इलाज मिले, जो किसी अमीर को मिलता है।”

यह शब्द सुनते ही पूरा देश खड़ा हो गया। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और सभी नेता खड़े हो गए। आकाश ने जो कहा, वह सिर्फ उसके लिए नहीं, बल्कि उस पूरी जनता के लिए था जो समाज में असमानता का सामना करती है। आकाश की आवाज ने हर दिल को छू लिया।

आकाश का सपना

आकाश ने कहा, “मैं जो मांगता हूं, वह सिर्फ एक मौका है। मेरे जैसे बच्चों को भी वही शिक्षा मिले, जो अन्य बच्चों को मिलती है। मैं नहीं चाहता कि मेरे जैसे बच्चों को समाज से बाहर किया जाए। मैं चाहता हूं कि हर बच्चा, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, या वर्ग से हो, उसे समान अधिकार मिलें।”

इस भाषण के बाद, आकाश को न सिर्फ भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में सम्मान मिला। प्रधानमंत्री ने आकाश के भाषण के बाद कहा, “आज हम सब ने जो सुना, वह किसी बड़े नेता का नहीं, बल्कि एक छोटे से लड़के की आवाज थी। यह वह आवाज है, जो हमारे देश के हर गरीब बच्चे की है। हमें इन बच्चों के लिए कुछ करना होगा।”

आकाश की यात्रा जारी है

आकाश का भाषण अब एक आंदोलन बन गया। उसने एक एनजीओ की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य उन बच्चों को शिक्षा देना था, जो समाज के हाशिए पर थे। वह हर 26 जनवरी को लाल किले पर जाता है, लेकिन अब वह भाषण देने के लिए नहीं, बल्कि उन बच्चों के साथ खड़ा होने के लिए। वह जानता है कि गणतंत्र तभी मजबूत होता है जब हर आवाज सुनी जाए।

आज आकाश दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान पढ़ता है, और उसका सपना है कि वह एक दिन उस मंच से बोलेगा, जहां से उसने शुरुआत की थी। उसकी कहानी अब हर बच्चे की कहानी बन चुकी है, जो कभी सपने देखने का हक नहीं मानता था।

आकाश ने यह साबित किया कि गणतंत्र सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि हर दिन का होता है, जब हर एक आवाज सुनने को मिले। और आज वह उन सभी बच्चों के लिए लड़ रहा है, जिनकी आवाज कभी नहीं सुनी जाती थी।