विशेषज्ञ ने मेरे पति के सामने बात करने से इनकार कर दिया और मुझे अकेले मिलने को कहा — पता चला 3 साल…

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मेरे पति 30 साल तक हर गुरुवार बैंक जाते रहे, जब उनकी मौत हुई, तब मुझे पता चला क्यों…

अध्यान 1: एक साधारण महिला, एक साधारण जिंदगी

मेरा नाम सरस्वती कोहली है। मैं 54 साल की हूं और दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 24 में अपने छोटे से मेडिकल स्टोर को संभालती हूं। मेरी जिंदगी बहुत साधारण रही है। मैंने शादी के बाद अपने पति रमेश के साथ मिलकर अपना जीवन संजोया, और हम दोनों ने मिलकर एक छोटे से घर को सजाया। हमारे पास कोई बड़ी दौलत नहीं थी, लेकिन हमने अपनी मेहनत और ईमानदारी से जो भी कमाया, उसी से जीते रहे।

रमेश मेरे जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि मेरे सबसे अच्छे दोस्त भी थे। हमारी शादी को 28 साल हो चुके थे और हमारे पास एक प्यारी सी बेटी निधि थी, जो आज एक सफल आईटी प्रोफेशनल है। हमारे पास बहुत कुछ नहीं था, लेकिन हम दोनों में एक-दूसरे के लिए बहुत प्यार था। हर चीज की शुरुआत हमारी मेहनत से हुई थी, और यही हमारा सबसे बड़ा धन था।

रमेश बैंक में काम करते थे और मेरी अपनी मेडिकल दुकान थी। हम दोनों मिलकर अच्छे से घर चलाते थे। हमारे पास एक छोटा सा फ्लैट था, जहां हमने खुशहाल जीवन बिताया। रमेश रिटायर हो गए थे, और मैं भी अब मेडिकल स्टोर से रिटायरमेंट की सोच रही थी। फिर एक दिन ऐसा हुआ, जो मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा हादसा बन गया।

अध्यान 2: अचानक बुरी खबर और फिर बदलाव

3 साल पहले एक दिन अचानक मुझे अस्पताल जाना पड़ा। मैं रसोई में बर्तन धो रही थी जब मुझे चक्कर आने लगे। मेरी हालत इतनी खराब हो गई कि मैं गिर पड़ी। मेरे पड़ोसी ने तुरंत रमेश को फोन किया और वह मुझे अस्पताल ले गए। डॉक्टर ने कहा कि मुझे डायबिटीज हो गया है। रमेश बहुत परेशान हुए और उन्होंने मुझसे वादा किया कि वह अब मेरी पूरी देखभाल करेंगे।

रमेश ने मेरी दवाइयों का ख्याल रखा, मुझे डॉक्टर के पास लेकर गए और मेरी हर छोटी-छोटी चीज का ख्याल रखा। उन्होंने बहुत सारा समय मेरे साथ बिताया, मुझे दवाइयां लाकर दीं और डॉक्टर से बात की। मुझे बहुत अच्छा लगता था कि मेरा पति कितना समर्पित है।

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, मेरी तबियत सुधारने के बजाय बिगड़ने लगी। मुझे चक्कर आने लगे, हाथ पैर कांपने लगे, और कभी-कभी मुझे याददाश्त में भी दिक्कत होने लगी। मैंने सोचा शायद डायबिटीज बढ़ गई है, लेकिन रमेश ने मुझे हमेशा डॉक्टर से मिलने के लिए तैयार किया।

कभी गुड़गांव, कभी नोएडा, कभी द्वारका। रमेश हमेशा नए डॉक्टर से दिखाने के लिए मुझे लेकर जाते, और कभी-कभी मुझे यह अजीब लगता था। मैंने उनसे पूछा कि “इतनी दूर क्यों जा रहे हो?” लेकिन वह हमेशा कहते, “यह स्पेशलिस्ट हैं, तुम्हारी हालत गंभीर है। इन्हीं से दिखाना पड़ेगा।”

अध्यान 3: डॉली के बारे में खुलासा

मुझे यह हमेशा समझ में आता था कि रमेश मुझे बचाने के लिए सब कुछ कर रहे हैं, लेकिन फिर एक दिन मुझे कुछ ऐसा हुआ जिससे मेरी पूरी दुनिया बदल गई। एक दिन मैं अपने मेडिकल स्टोर पर बैठी थी, जब एक नियमित ग्राहक आया। उन्होंने अपना प्रिस्क्रिप्शन दिखाया, और मुझे देखा तो मेरी आँखें चौंधिया गईं। उनका प्रिस्क्रिप्शन वही था जो मेरे पति रमेश ने लाया था। और फिर मुझे याद आया कि मेरे डॉक्टर ने कहा था कि मैं डायबिटीज की दवाइयां लूं, लेकिन वह दवाइयां ही गलत थीं। मैंने यह सोचा कि यह कैसा है? क्यों मेरी दवाइयों में कोई सच्चाई नहीं थी?

मुझे यह सब बहुत ही अजीब और डरावना लगा। मैंने यह सोचा कि क्या यह सब गलत है? क्या मेरे पति ने मुझे जानबूझकर गलत दवाइयां दीं?

अध्यान 4: मेरी खुद की जांच और रमेश का राज़

मैंने अपने घर की अलमारी में रखी हुई अपनी सारी मेडिकल रिपोर्ट्स को निकाला। मैंने देखा कि मेरी रिपोर्ट्स में बहुत अजीब चीजें थीं। रिपोर्ट्स में एक तस्वीर थी, लेकिन वह मेरी नहीं थी। रिपोर्ट का नाम तो मेरा था, लेकिन वह मेरी नहीं थी। मेरी सांसें रुक गईं। मुझे लगा कि यह क्या हो रहा है? क्या रमेश ने जानबूझकर मुझे बीमार किया?

रात में मैंने महेश से पूछा, “क्या तुम जानते हो कि ये रिपोर्ट्स असल में क्या हैं?” उसने जवाब दिया, “तुम परेशान हो रही हो, कुछ नहीं है, बस थोड़ा सा आराम करो।” लेकिन मैं जान गई थी कि कुछ बहुत गड़बड़ है।

अगले दिन मैं अपनी मेडिकल दुकान से बाहर निकली, और एक अच्छे एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से मिलने के लिए डॉक्टर अश्विन मेनन से अपॉइंटमेंट ली। मैंने डॉ. मेनन से अपनी सारी रिपोर्ट्स दिखाई, और उन्हें सब कुछ समझाया। डॉक्टर ने मुझे बताया कि वह सब कुछ असल में फर्जी था। जो दवाइयां मैं ले रही थी, वह गलत थीं। उन्होंने कहा कि मेरी बीमारी को बढ़ाने के लिए किसी ने जानबूझकर गलत दवाइयां दी थीं। यह जानकर मेरा दिल बैठ गया।

अध्यान 5: महेश के राज़ का खुलासा

डॉक्टर ने मुझसे कहा, “मैम, आपको रिपोर्ट्स से पता चला है कि किसी ने जानबूझकर आपको गलत दवाइयां दी हैं। आपको अब क्या करना चाहिए, यह आपकी मर्जी है।” मेरी आंखों में आंसू थे, लेकिन मैंने खुद को संभालते हुए डॉक्टर से पूछा, “मेरे पति ने ऐसा क्यों किया?”

डॉक्टर ने कहा, “इसका मतलब यह हो सकता है कि आपकी संपत्ति पर किसी की नजर थी।” यह सुनकर मेरा दिल डूब गया। क्या रमेश ने मुझे कभी अपना पार्टनर नहीं माना? क्या वह मेरी मेहनत की कमाई पर कब्जा करना चाहता था?

मैंने खुद को संजीवनी दी और एक कदम आगे बढ़ने का फैसला किया। मैंने अपने सारे सबूत जुटाए और महेश से पूछताछ शुरू की।

अध्यान 6: महेश की जालसाजी

मेरे पास सबूत थे। मैंने महेश से सख्ती से पूछा कि उसने क्यों मुझे गलत दवाइयां दी थीं, क्यों उसने मेरे ऊपर इतने सालों तक यह जालसा किया था? उसने झूठ बोलने की कोशिश की, लेकिन अब मुझे सारी सच्चाई का पता चल चुका था।

महेश ने माना कि उसकी नीयत ठीक नहीं थी। वह जानबूझकर मुझे बीमार बनाए रखना चाहता था, ताकि मेरी संपत्ति पर उसका अधिकार हो। रमेश के इस जालसाजी के कारण मुझे यह समझ में आ गया कि मेरी मेहनत को उन्होंने किस तरह से बेकार किया।

मैंने यह तय किया कि अब मैं उनका सामना करूंगी, और अपनी सारी मेहनत की कमाई को लेकर लड़ाई लूंगी। महेश ने जो किया, वह सिर्फ मेरी जिंदगी को नहीं, बल्कि मेरे परिवार को भी तोड़ने की साजिश थी।

समाप्त।