विशेष रिपोर्ट: मेरठ में रिश्तों का क-त्ल – गरीबी, लालच और हवस ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार
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मेरठ, उत्तर प्रदेश।
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के चकमरना गांव से एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और वैवाहिक पवित्रता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। एक पति ने अपनी ही पत्नी को ऐसी भ-या-नक मौ-त दी, जिसे सुनकर रूह कांप जाए। इस पूरी घटना के पीछे गरीबी, ए-का-की-पन और रातों-रात अमीर बनने की ग-ंदी चाहत का एक काला ताना-बाना बुना गया था।
परिवार की पृष्ठभूमि और आर्थिक तंगी
घटना की शुरुआत परवेश कुमार नाम के एक युवक से होती है, जो चकमरना गांव का निवासी है। परवेश पास के ही एक पेट्रोल पंप पर मेहनत-मजदूरी का काम करता था। उसकी मासिक आय मात्र 14,000 रुपये थी। परवेश के परिवार में उसकी वृद्ध मां शांति देवी और उसकी बेहद खूबसूरत पत्नी महक शामिल थे।
परवेश की मां अक्सर बीमार रहती थी, जिसके कारण उसकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा दवाइयों और डॉक्टरों की फीस में चला जाता था। घर में आर्थिक तंगी का आलम यह था कि बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा था। परवेश अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए दिन-रात मेहनत करता था। वह शाम 7:00 बजे काम पर जाता और अगली सुबह 7:00 बजे घर लौटता। काम की थकान के कारण वह घर आते ही सो जाता था, जिसके कारण वह अपनी पत्नी महक को समय नहीं दे पाता था।
ब्यूटी पार्लर की आड़ में ‘धं-धा’
महक अपने अकेलेपन और घर की गरीबी से परेशान थी। उसने परवेश से काम करने की इच्छा जताई और गांव में एक ब्यूटी पार्लर खोलने का प्रस्ताव रखा। परवेश ने अपनी पत्नी की खुशी के लिए कहीं से 15,000-20,000 रुपये कर्ज लेकर दुकान खुलवा दी।
शुरुआत में ब्यूटी पार्लर नहीं चला, जिससे महक और भी उदास रहने लगी। इसी दौरान उसकी मुलाकात उसकी पड़ोसन कांता देवी से हुई। कांता देवी, जो पहले खुद ग-लत कामों में संलिप्त रह चुकी थी, उसने महक को मशविरा दिया कि ब्यूटी पार्लर की आड़ में वह ज-ि-स्म का धं-धा (प्रॉ-स्टि-ट्यूशन) शुरू करे। कांता ने लालच दिया कि इससे बहुत पैसा आएगा और उसे ‘पति सुख’ भी मिलेगा। महक ने पैसों के लालच में आकर इस ग-ंदे रास्ते पर चलने का फैसला कर लिया।
ट्रक ड्राइवरों का आना और बढ़ता ‘का-ले कारनामे’ का जाल
कांता देवी ने पास के एक कारखाने से ट्रक ड्राइवरों को महक के घर लाना शुरू कर दिया। महक अपनी सास को रात में नीं-द की दवा देकर सुला देती थी और परवेश के काम पर जाने के बाद घर के दरवाजे गैर-मर्दों के लिए खोल देती थी।
4 जनवरी 2026: पहली बार ‘मौसम’ नाम का एक ट्रक ड्राइवर महक के घर आया। महक ने उससे 2,000 रुपये लिए और उसके साथ ग-लत रि-श्ते कायम किए।
10 जनवरी 2026: मौसम अपने एक और दोस्त ‘गुलशन’ को लेकर आया। उस रात महक ने दोनों ड्राइवरों के साथ वक्त गुजारा और 4,000 रुपये कमाए।
पैसों की चमक ने महक को इतना अंधा कर दिया था कि उसने अपनी पड़ोसन कांता को उसका कमीशन देने से भी इनकार कर दिया। यहीं से इस सा-जिश में दरार पड़नी शुरू हुई।
सरपंच अजीत सिंह और ‘हाई प्रोफाइल’ का-ला धं-धा
कांता देवी ने अब एक बड़ा दांव खेलने की सोची। उसने महक को गांव के रईस सरपंच अजीत सिंह के बारे में बताया। सरपंच की पत्नी का देहांत हो चुका था और वह काफी शौकीन मिजाज व्यक्ति था। कांता के माध्यम से महक और सरपंच के बीच अ-वैध रि-श्ते शुरू हो गए। सरपंच उसे एक रात के 4,000 रुपये देता था। महक अब अमीर होने के सपने देखने लगी थी और उसने ट्रक ड्राइवरों से मिलना बंद कर दिया था।
विश्वासघात और कांता का बदला
जब महक ने सरपंच से मिले पैसों में से कांता को हिस्सा देने से मना कर दिया, तो कांता आगबबूला हो गई। उसने महक को बर्बाद करने की ठान ली। 12 फरवरी 2026 को कांता ने परवेश कुमार को जगाया और उसे महक के ‘काले कारनामों’ की पूरी जानकारी दे दी। शुरुआत में परवेश को यकीन नहीं हुआ, लेकिन उसके मन में शक का बीज बो दिया गया था।
22 फरवरी 2026: वो खौफनाक रात
परवेश ने अपनी पत्नी पर नजर रखनी शुरू की। 22 फरवरी की रात, परवेश हमेशा की तरह पेट्रोल पंप के लिए निकला, लेकिन वह रास्ते से वापस लौट आया। उसने देखा कि सरपंच अजीत सिंह उसके घर के अंदर गया है।
परवेश ने कुछ देर इंतजार किया और फिर अचानक घर का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुआ। जो दृश्य उसने देखा, उसने उसके होश उड़ा दिए। उसकी पत्नी महक सरपंच के साथ आपत्तिजनक स्थिति में थी। सरपंच ने शर्मिंदा होने के बजाय परवेश को यह कहकर झिड़क दिया कि वह इसके लिए पैसे देता है। सरपंच वहां से भाग निकला, लेकिन परवेश का गुस्सा सातवें आसमान पर था।
क्रू-रता की पराकाष्ठा: पे-ट्रो-ल से ज-ला-या
परवेश ने आव देखा न ताव, उसने महक को घसीटकर कमरे में बंद कर दिया। गुस्से में पागल परवेश ने महक के हाथ-पैर बांध दिए। उसने घर में रखा पे-ट्रो-ल उठाया और महक के प्र-ाइवेट पार्ट पर छिड़ककर आ-ग लगा दी। महक दर्द से चीखती रही, चिल्लाती रही, लेकिन परवेश का दिल नहीं पसीजा।
चीखें सुनकर पड़ोसी इकट्ठा हुए, लेकिन तब तक महक पूरी तरह जल चुकी थी और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया था।
पुलिस जांच और गिरफ्तारी
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने महक के झुलसे हुए श-व को कब्जे में लेकर पो-स्ट-मॉर्ट-म के लिए भेजा। परवेश कुमार को मौके से ही गिर-फ्तार कर लिया गया। पूछताछ में परवेश ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और पूरी कहानी पुलिस को सुनाई।
मेरठ पुलिस ने इस मामले में हत्या (IPC 302) और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब सरपंच अजीत सिंह और बिचौलिए कांता देवी की भूमिका की भी जांच कर रही है।
निष्कर्ष: समाज के लिए एक सबक
यह घटना केवल एक अ-प-राध नहीं है, बल्कि समाज के गिरते स्तर का प्रतिबिंब है। गरीबी एक अभिशाप हो सकती है, लेकिन अनैतिकता और लालच का रास्ता केवल वि-नाश की ओर ले जाता है। महक के लालच ने उसकी जान ले ली, परवेश के गुस्से ने उसे का-ति-ल बना दिया और एक वृद्ध मां बेसहारा हो गई।
आज चकमरना गांव में सन्नाटा है। लोग इस भ-या-नक अं-जाम को देखकर स्तब्ध हैं। कोर्ट अब यह तय करेगा कि परवेश को उसके इस क्रू-र कृत्य के लिए क्या सजा मिलेगी, लेकिन इस हा-द-से ने कई परिवारों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रिश्तों में विश्वास और मर्यादा का होना कितना अनिवार्य है।
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