वीडियो कॉल पर बात करते हुए हुआ बहुत बड़ा हादसा/पूरे परिवार की हुई मौ#त/
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डिजिटल मायाजाल और मौत का तांडव: वाराणसी की एक खौफनाक दास्तां
अध्याय 1: आदमपुर की गलियां और बृजमोहन का संघर्ष
उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वाराणसी के पास बसे आदमपुर गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। यहाँ बृजमोहन सिंह नाम का एक व्यक्ति रहता था। बृजमोहन एक सीधा-सादा मजदूर था, जिसकी दुनिया उसकी इकलौती बेटी मीना के इर्द-गिर्द घूमती थी। कई साल पहले पत्नी की मृत्यु के बाद, उसने मीना को मां और बाप दोनों का प्यार दिया।
मीना पढ़ी-लिखी थी, उसने बी.ए. पास किया था, लेकिन उसका मन घर के कामकाज या सम्मानजनक जीवन में नहीं लगता था। गांव के लोग अक्सर दबी जुबान में उसकी चर्चा करते थे। एक साल पहले वह किसी के साथ भाग गई थी, जिससे बृजमोहन की समाज में काफी बदनामी हुई। तब से बृजमोहन अपनी बेटी पर कड़ी नजर रखता था। उसे डर था कि उसकी बेटी फिर कोई गलत कदम न उठा ले।
अध्याय 2: बंद कमरे का रहस्य
बृजमोहन की गरीबी के कारण मीना की शादी में देरी हो रही थी। 26 साल की मीना स्वभाव से जिद्दी और चालाक थी। रात होते ही वह अपने कमरे का दरवाजा बंद कर लेती थी। पिता को लगता कि बेटी सो रही है, लेकिन हकीकत कुछ और थी। मीना अपने मोबाइल के जरिए अनजान पुरुषों से वीडियो कॉल पर बात करती थी। वह उन्हें अपनी बातों में फंसाती और उनसे पैसे मंगवाती थी।
एक रात बृजमोहन ने उसे रंगे हाथों वीडियो कॉल करते देख लिया। उसने चेतावनी दी, “मीना, अगर दोबारा किसी अजनबी से बात की, तो यह फोन तोड़ दूंगा।” डर के मारे मीना शांत तो हो गई, लेकिन उसके भीतर की आग अभी बुझी नहीं थी।

अध्याय 3: राकेश के साथ नया जीवन
बेटी के बिगड़ते चरित्र को देखते हुए बृजमोहन ने जल्दबाजी में उसकी शादी तय कर दी। उसे राकेश नाम का एक लड़का मिला। राकेश गरीब था, लेकिन मेहनती था और बिना दहेज शादी के लिए तैयार हो गया। धूमधाम से शादी हुई और मीना अपने ससुराल चली गई।
शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा। राकेश खेतों में मजदूरी करता और शाम को थक-हारकर घर लौटता। लेकिन 25 सितंबर 2025 का दिन मीना की जिंदगी में तूफान लेकर आया। कपड़े धोते समय मीना का मोबाइल पानी में गिरकर खराब हो गया।
अध्याय 4: फोन की तलब और रवि का प्रवेश
मोबाइल मीना के लिए सांस लेने जैसा था। उसने राकेश से नया फोन मांगा, लेकिन राकेश के पास पैसे नहीं थे। उसने अगले महीने का वादा किया। इसी बीच, राकेश ने ज्यादा पैसे कमाने के लिए एक कारखाने में काम शुरू किया। वहाँ उसकी दोस्ती रवि से हुई।
रवि एक शातिर किस्म का लड़का था। वह राकेश के घर आने-जाने लगा। मीना की नजरें रवि पर टिक गईं। एक सुबह, जब राकेश काम पर गया हुआ था, रवि घर आया। मीना ने अपनी गरीबी और फोन न होने का दुखड़ा रोया। रवि ने मौका ताड़ लिया। उसने कहा, “फोन तो मिल जाएगा, लेकिन तुम्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।”
फोन की लालच में मीना ने अपनी मर्यादा भूलकर रवि के साथ गलत संबंध बनाए। रवि ने उसे नया फोन और सिम कार्ड दिला दिया। मीना फिर से अपने पुराने धंधे में लग गई—अजनबियों को वीडियो कॉल करना और पैसे कमाना।
अध्याय 5: राकेश का गुस्सा और फोन की बर्बादी
मीना अब और भी शातिर हो गई थी। वह रात को राकेश के सोने का इंतजार करती और फिर दूसरे कमरे में जाकर वीडियो कॉल शुरू कर देती। एक रात 10 बजे, राकेश की अचानक आंख खुल गई। उसने देखा मीना बिस्तर पर नहीं है।
जब वह दूसरे कमरे में गया, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। मीना आपत्तिजनक हालत में वीडियो कॉल पर किसी से बात कर रही थी। गुस्से में पागल होकर राकेश ने मीना को पीटा और उसका फोन दीवार पर दे मारा। फोन के टुकड़े-टुकड़े हो गए। मीना ने माफी मांगी और झूठ बोल दिया कि वह सिर्फ अपने पिता से बात कर रही थी।
अध्याय 6: दरोगा कांतिलाल और नया जाल
फोन टूटने के बाद मीना फिर से बेचैन हो गई। अब उसने अपने पड़ोस में रहने वाले दरोगा कांतिलाल को अपना निशाना बनाया। कांतिलाल एक भ्रष्ट और शराबी पुलिसवाला था, जिसकी पत्नी उसे छोड़ चुकी थी।
मीना काम मांगने के बहाने उसके घर गई। कांतिलाल उसकी खूबसूरती पर मोहित हो गया। उसने मीना को घर की साफ-सफाई के काम पर रख लिया। पहले ही दिन मीना ने फोन के लिए पैसे मांगे। कांतिलाल ने शर्त रखी—”सेवा के बदले पैसा।” मीना ने फिर वही रास्ता चुना। कांतिलाल ने उसे ₹15,000 दिए, जिससे उसने एक महंगा स्मार्टफोन खरीदा।
अध्याय 7: कत्ल की वह खौफनाक रात
8 नवंबर 2025 की रात थी। राकेश ने फोन कर बताया कि कारखाने में काम ज्यादा है, इसलिए वह रात भर वहीं रुकेगा। मीना खुश हो गई। उसने घर में कांतिलाल को बुला लिया। दोनों बंद कमरे में अपनी अनैतिकता में डूबे थे।
लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। राकेश का मन नहीं लगा और वह रात 11:30 बजे घर लौट आया। जैसे ही उसने दरवाजा खोला और कमरे का नजारा देखा, उसका दिमाग सुन्न हो गया। अपनी पत्नी को एक पुलिसवाले के साथ उस हालत में देखकर उसकी बरसों की मेहनत और इज्जत खाक में मिल गई।
राकेश ने कुल्हाड़ी उठाई। पहली वार में उसने मीना की गर्दन काट दी। कांतिलाल कुछ समझ पाता, उससे पहले राकेश ने उसके भी टुकड़े-टुकड़े कर दिए। कमरे की दीवारें खून से लाल हो गईं।
अध्याय 8: साजिश और आग का खेल
हत्या करने के बाद राकेश घबरा गया। खुद को बचाने के लिए उसने एक शैतानी योजना बनाई। उसने घर में रखा केरोसिन तेल निकाला और दोनों लाशों पर छिड़क दिया। उसने मीना का वही मोबाइल उसकी छाती पर रखा और आग लगा दी।
राकेश घर से बाहर निकला और जोर-जोर से चिल्लाने लगा, “बचाओ! बचाओ! मेरी पत्नी का फोन फट गया! घर में आग लग गई!” पड़ोसी इकट्ठा हो गए। उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
अध्याय 9: खुला राज और इंसाफ
आग बुझने के बाद जब पुलिस अंदर गई, तो उन्हें एक नहीं, बल्कि दो जली हुई लाशें मिलीं। जब दूसरी लाश की पहचान दरोगा कांतिलाल के रूप में हुई, तो पुलिस के होश उड़ गए। फोन फटने से कोई अजनबी घर के अंदर कैसे मर सकता था?
पुलिस ने राकेश को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जब पुलिस ने थोड़ी सख्ती दिखाई, तो राकेश टूट गया। उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने बताया कि कैसे एक मोबाइल फोन ने उसकी पत्नी को गुमराह किया और कैसे उसने अपनी इज्जत बचाने के लिए दो हत्याएं कीं।
निष्कर्ष और संदेश
यह घटना हमें सिखाती है कि आधुनिक तकनीक जहाँ हमारे जीवन को आसान बनाती है, वहीं अगर इसका इस्तेमाल अनैतिक कार्यों के लिए किया जाए, तो यह विनाश का कारण बन सकती है। विश्वासघात और लालच का अंत हमेशा दुखद होता है। वाराणसी की इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया।
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