“शांतिपूर्वक सोइए, माँ! हम आपको यात्रा के लिए जगा देंगे” “मैं जागी और घर खाली था!”

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शांतिपूर्वक सोइए, माँ! हम आपको यात्रा के लिए जगा देंगे
मैं जागी और घर खाली था!

1. नींद और धोखा

“माँ, आराम से सो जाइए। सुबह जल्दी आपको ट्रिप के लिए उठा देंगे!”
वरुण ने मुस्कुराते हुए कहा। उसकी पत्नी ऋतु ने भी हां में हां मिलाई। मैं 68 साल की जागृति पाठक, गुड़गांव सेक्टर 56 के अपने 18 करोड़ के घर में बैठी थी, पहली बार बच्चों के साथ ट्रिप पर जाने की उम्मीद से खुश। मनाली की बर्फ, पहाड़, परिवार – सब सपने में था।

रात को ऋतु ने एक ट्रैवल सिकनेस की गोली दी। “माँ, फ्लाइट में उल्टी नहीं होगी।” मैंने विश्वास कर लिया। आँखें बंद की। दिल में उत्साह था।
सुबह आंख खुली – घर खाली। वरुण, ऋतु, पोता आर्यन – सब गायब। बैग नहीं, जूते नहीं, आवाज नहीं। फोन पर मैसेज था – “माँ, फ्लाइट निकल गई। अगली बार चलेंगे।”

उस पल मेरी दुनिया चकनाचूर हो गई। मां का दिल टूटना सबसे बड़ा दर्द है। मगर उन्हें क्या पता था कि जिस “बुढ़िया” को वे बेकार समझ रहे थे, उसके पास 32 साल के स्कूल प्रिंसिपल का अनुभव, 18 करोड़ की संपत्ति, 75 लाख की एफडी और कानून की गहरी समझ थी।

2. बीते दिन, बने सपने

शादी 38 साल पहले हुई थी। हरिओम पाठक – मेरे पति, दिल्ली के सरकारी ऑफिस में अकाउंटेंट। रोहिणी के छोटे किराए के घर से शुरूआत। दोनों ने मिलकर बचत की, सपने देखे, बेटे वरुण को जन्म दिया। मैं सेंट मैरीज स्कूल में जूनियर टीचर थी, धीरे-धीरे प्रिंसिपल बनी। हर महीने तनख्वाह का हिस्सा बचत में जाता। पोस्ट ऑफिस, बैंक, एफडी – धीरे-धीरे रकम बढ़ती गई।

वरुण के लिए सब कुछ किया। पढ़ाई, स्कूल, राजमा चावल, त्योहारों पर खीर, गाजर का हलवा। उसकी आईआईटी की फीस के लिए एफडी तोड़ी। उसकी शादी ऋतु से – पढ़ी-लिखी, स्मार्ट बहू। तीन दिन का समारोह, 50 लाख खर्च। सब कुछ बेटे के लिए।

हरिओम के रिटायरमेंट के बाद 28 लाख की प्रोविडेंट फंड, 18 हजार महीने की पेंशन। जिंदगी सुकून से चल रही थी। देश घूमने, मंदिर जाने के सपने थे।

3. अकेलापन और बदलता व्यवहार

2019 में हरिओम को पार्क में स्ट्रोक आया। फोर्टिस हॉस्पिटल – चार दिन बाद वे चले गए। मेरा संसार उजड़ गया। हर कोने में उनकी यादें, उनकी कुर्सी, किताबें, चाय की प्याली। वरुण और ऋतु शुरू में आते रहे। “माँ, हमारे साथ चलो।” मगर मैंने मना कर दिया। यह मेरा घर था, मेरी यादों का घर।

धीरे-धीरे वरुण और ऋतु का आना कम हो गया। खाना मना करने लगे, त्योहारों पर अकेला छोड़ दिया। दिवाली, आर्यन का जन्मदिन – सब अकेले बीता। पड़ोसियों की रोशनी, पटाखे, और मेरे घर में खामोशी। मैंने डायरी लिखना शुरू किया – हर अपमान, हर घटना, सब नोट करती रही।

4. लालच और संपत्ति की चाल

2020 में वरुण और ऋतु ने कहा, “माँ, घर बहुत बड़ा है। बेच दीजिए। छोटा फ्लैट ले लीजिए।” मुझे सब समझ आ गया – उन्हें घर चाहिए था। सेक्टर 56 की प्रॉपर्टी आसमान छू रही थी। मैंने मना कर दिया। “यह मेरा और तुम्हारे पिताजी का सपना था।”

उनका व्यवहार और बदल गया। खाना छोड़ना, बातों में कटुता, मुझे बोझ समझना। मैंने निर्मला, अपनी दोस्त और एक्स-जज से सलाह ली। “जागृति, सावधान रहना। कागजात संभालो, वसीयत बनाओ, डॉक्युमेंटेशन करो।” मैंने अपनी भतीजी को भी नॉमिनी बना दिया। कागजात बैंक लॉकर में रख दिए। सब कुछ सुरक्षित किया।

5. भावनात्मक प्रताड़ना और कानूनी लड़ाई

फिर मांग आई – “माँ, हमें 25 लाख चाहिए। नया फ्लैट लेना है।” मैंने मना किया। “यह मेरी रिटायरमेंट की बचत है।” वरुण ने गुस्से में कहा – “माँ, सब तो वैसे भी मुझे मिलना है।” मतलब – मेरे मरने का इंतजार। मैंने निर्मला और वकील अदिति नायर से सलाह ली। “एक पैसा मत देना।”

फिर ट्रिप का धोखा – दो बार। “माँ, हम आपको जगा देंगे।” मगर दोनों बार मुझे नींद की दवा देकर छोड़ गए। मैंने ताले बदल दिए, सोसाइटी को निर्देश दिया – बिना मेरी परमिशन कोई अंदर न आए। हर घटना रिकॉर्ड की, सबूत संभाले।

6. रिश्तों की टूटन और समाज की सच्चाई

वरुण और ऋतु ने मुझे मानसिक रूप से कमजोर साबित करने की कोशिश की। कोर्ट में केस किया – “माँ पागल हैं, हमें गार्डियन बनाओ।” मैंने काउंटर नोटिस दिया – इमोशनल क्रुएल्टी, एल्डर अब्यूज, प्रॉपर्टी हथियाने की कोशिश। सोसाइटी में सच बताया, लोग मेरे साथ खड़े हो गए।

कोर्ट ने फैसला सुनाया – वरुण और ऋतु को 500 मीटर के दायरे में आने की मनाही, ₹10,000 महीने का मेंटेनेंस, एल्डर अब्यूज का केस, पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज। वरुण की कंपनी ने प्रमोशन रोक दिया, ऋतु की कंपनी ने सस्पेंड कर दिया। रिश्तेदारों ने मुंह फेर लिया। आर्यन स्कूल में परेशान हुआ।

7. माफी, शर्तें और सम्मान की वापसी

एक दिन वरुण ने लंबा मैसेज भेजा – “माँ, हमसे गलती हुई। आर्यन आपसे मिलना चाहता है।” मैंने पार्क में मिलने की शर्त रखी। आर्यन मासूम था, उससे प्यार किया। वरुण और ऋतु को मौका दिया – सच्ची माफी, प्रॉपर्टी पर कोई दावा नहीं, नियमित मुलाकात, त्योहारों पर शामिल करना। शर्तें मान ली गईं। केस वापस लिया, मगर सतर्कता नहीं छोड़ी। कागजात अभी भी सुरक्षित, वसीयत में आधा-आधा।

8. नई शुरुआत और असली जीत

69वें जन्मदिन पर वरुण और ऋतु ने छोटी सी पार्टी रखी। दिवाली पर साथ रहे। मगर मैं जानती थी – विश्वास वापस बनने में समय लगता है। मैंने खुद को साबित किया – मैं कमजोर नहीं, मजबूत, स्वतंत्र, सम्मानित महिला हूं। बच्चों ने मुझे तोड़ने की कोशिश की, मगर मैं और मजबूत बन गई।

9. समाज के लिए संदेश

अगर आप भी ऐसी मुश्किल से गुजर रहे हैं, चुप मत रहिए। अपने हक़ के लिए आवाज उठाइए। कानून आपके साथ है। अगर बच्चे आपको बोझ समझते हैं, उन्हें याद दिलाइए – उनकी हर सफलता आपकी मेहनत से है। आपकी इज्जत का हक़ आपको है।

आज मैं सुकून से रहती हूं। मेरे पास घर है, बचत है, इज्जत है। बेटे-बहू ने सबक सीख लिया है। पोता मेरे साथ समय बिताता है। और सबसे बड़ी बात – मैंने खुद को साबित कर दिया।