शादी में मिला तोहफ़ा… और एक पल में उजड़ गया पूरा घर | सौम्या शेखर साहू परिवार मामला
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शादी का गिफ्ट: एक पल में उजड़ गया पूरा घर
प्रस्तावना
26 मई 2025 को ओडिशा की एक अदालत ने जो फैसला सुनाया, वह भारतीय न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक मिसाल बन गया। लेकिन इस फैसले को समझने के लिए हमें सात साल पहले की उस घटना को जानना पड़ेगा, जिसने एक खुशहाल परिवार को पल भर में तबाह कर दिया था।
यह कहानी है पटनागढ़, ओडिशा के साहू परिवार की, जहां एक शादी के गिफ्ट ने पूरे परिवार का सुख-चैन छीन लिया।
सौम्या शेखर साहू का परिवार
पटनागढ़ ओडिशा राज्य का एक छोटा सा शहर है। यहाँ 26 वर्षीय सौम्या शेखर साहू एक इलेक्ट्रॉनिक कंपनी में काम करते थे। उनके पिता भूविज्ञान के प्रोफेसर थे, मां एक कॉलेज की प्रधानाचार्या थीं, बहन कजाकिस्तान में पढ़ाई कर रही थी और दादी भी उनके साथ रहती थीं। यानी कुल मिलाकर उनका पांच लोगों का परिवार खुशी-खुशी रह रहा था।

18 फरवरी 2018 को परिवार में नई खुशी आई—सौम्या ने रीमा नामक लड़की से शादी कर ली। बुजुर्गों के आशीर्वाद और रिश्तेदारों की शुभकामनाओं के बीच शादी अच्छे से संपन्न हुई। रीमा ने बहुत सारे सपनों के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत की।
घटना का दिन
23 फरवरी 2018 की दोपहर थी। सौम्या की बहन कजाकिस्तान लौट रही थी, उसे एयरपोर्ट छोड़ने के लिए पिता रविंद्र कुमार उसके साथ गए थे। मां कॉलेज की प्रधानाचार्या थीं, वे छुट्टी नहीं ले सकती थीं, इसलिए उसी दिन ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी। घर में सौम्या, रीमा और दादी मौजूद थे।
करीब 12:45 बजे, रीमा रसोई में खाना बना रही थी। अचानक दरवाजे की घंटी बजी। सौम्या ने दरवाजा खोला तो देखा कि एक कूरियर डिलीवरी बॉय था, जिसके हाथ में बड़ा सा पैकेट था। उसने बताया कि यह पार्सल सौम्या के नाम पर आया है। सौम्या ने साइन करके पैकेट लिया और रसोई में आ गया। रीमा ने पूछा, “यह पैकेट क्या है?” सौम्या ने बताया कि यह रायपुर से भेजा गया एक गिफ्ट है, जिसे किसी एस के सिन्हा ने भेजा है।
“मैं रायपुर में किसी एस के सिन्हा को तो नहीं जानता, लेकिन हो सकता है कोई जानता हो,” सौम्या ने कहा और पैकेट खोलना शुरू किया। दादी भी उसके पास आ गईं। जब उस पार्सल को खोला गया तो उसके अंदर एक और तोहफे का डिब्बा था, हरे रंग के कागज में लिपटा हुआ। डिब्बे से एक सफेद धागा बाहर लटका हुआ था। सौम्या ने सोचा कि यह कोई सरप्राइज है और धागा खींच लिया।
एक पल में उजड़ गया परिवार
जैसे ही सौम्या ने धागा खींचा, पड़ोसियों ने एक जोरदार धमाका सुना। सबको लगा कि यह गैस सिलेंडर का धमाका है। वे डर गए, लेकिन जांचने के लिए दौड़ पड़े। घर के अंदर रसोई धुएं से भरी हुई थी, दीवारें, छत, खिड़कियां टूट चुकी थीं। सौम्या, उसकी पत्नी रीमा और दादी अधजली हालत में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे थे।
पड़ोसी घबरा गए, फायर सर्विस और एंबुलेंस को बुलाया। पहले सभी ने सोचा कि यह सिलेंडर के धमाके की वजह से हुआ है, लेकिन केवल उन तीनों को पता था कि यह पार्सल में आया एक बम था।
दरअसल वह पार्सल एक तोहफा बॉक्स नहीं बल्कि एक गिफ्ट बम था। एक अजीब और चौंकाने वाला मामला था।
अस्पताल और पुलिस जांच
तीनों को अस्पताल ले जाया गया। सौम्या और उसकी दादी बम के पास थे, उनका शरीर लगभग 90% जल चुका था। रीमा बम से थोड़ी दूर थी, उसका शरीर 40% जला था। डॉक्टरों ने दादी को मृत घोषित कर दिया, सौम्या की हालत गंभीर थी। इलाज के दौरान सौम्या की भी मृत्यु हो गई। रीमा की हालत स्थिर बनी रही, सब लोग दुआ कर रहे थे कि वह बच जाए।
पुलिस ने जांच शुरू की। बम स्क्वाड को बुलाया गया। रसोई में बारूद की गंध थी, पुष्टि हो गई कि यह बम विस्फोट था। लेकिन बम वहां कैसे और क्यों आया था, यह रहस्य था। जो सच जानते थे, उनमें से दो की मौत हो चुकी थी और रीमा भी बात करने की स्थिति में नहीं थी।
सुरागों की तलाश
पुलिस रीमा की हालत के बेहतर होने का इंतजार करती रही। एक सप्ताह बाद रीमा ने बयान दिया—सिलसिलेवार पूरी घटना बताई। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि पार्सल स्काई किंग कूरियर सर्विस से आया था। कूरियर ऑफिस में कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था।
पुलिस ने सौम्या के माता-पिता से पूछा कि क्या उन्हें किसी पर शक है? मां ने कहा, “जिस कॉलेज में मैं काम करती हूं, वहां एक अंग्रेजी विषय का शिक्षक है—पंजीलाल। उसके साथ मेरा ईगो क्लैश हुआ था।” दरअसल, कॉलेज का पहले वह प्राचार्य था, उसी को हटाकर मां को बनाया गया था। पुलिस ने पंजीलाल की जांच की, लेकिन सबूत नहीं मिला।
एक अनजान कॉल
कुछ महीनों पहले सौम्या को एक कॉल आई थी—एक अनजान व्यक्ति ने धमकी दी थी कि रीमा से शादी मत करना, वरना परिणाम भुगतने होंगे। पुलिस ने उस नंबर का पता लगाया, वह व्यक्ति रीमा से एकतरफा प्यार करता था। लेकिन उसने बम विस्फोट की योजना से इनकार किया और पॉलीग्राफ टेस्ट पास किया। उसे छोड़ दिया गया।
तीन सप्ताह बीत गए, 100 से अधिक लोगों की जांच हुई, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। केस क्राइम ब्रांच को सौंपा गया। क्राइम ब्रांच ने 250 सीसीटीवी कैमरों की जांच की, फिर भी केस में कोई सुधार नहीं हुआ।
एक रहस्यमय पत्र
4 अप्रैल 2018 को क्राइम ब्रांच के एएसपी को एक पत्र मिला। उसमें लिखा था—”विस्फोट का कारण विश्वासघात और जीवन तथा पैसे की हानि है।” पत्र में तीन लोगों के शामिल होने की बात थी। पत्र को फॉरेंसिक लैब में भेजा गया, लेकिन फिंगरप्रिंट नहीं मिले।
पुलिस ने पत्र को सौम्या के परिवार को पढ़ने को दिया। मां ने पत्र पढ़ा और एक व्यक्ति पर शक किया—वही अंग्रेजी शिक्षक पंजीलाल मेहर। पत्र में ‘अंडरटेइंग’ शब्द था, जो पंजीलाल की भाषा शैली थी। पुलिस ने फिर से पंजीलाल को बुलाया।
अपराधी का पर्दाफाश
पहले तो पंजीलाल ने इनकार किया। लेकिन जब पुलिस ने उसके घर की तलाशी ली तो एक महत्वपूर्ण सबूत मिला—पार्सल का बिल। पूछताछ में उसने सब कुछ स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि कॉलेज में प्रिंसिपल पद से हटाए जाने के बाद उसे शेखर की मां से नफरत हो गई थी। उसने 7 महीने तक हत्या की योजना बनाई, अपराध से संबंधित किताबें पढ़ीं, फिल्में देखीं और अंततः बम पार्सल भेजने का प्लान बनाया।
शेखर की शादी का निमंत्रण मिलते ही उसने पार्सल तैयार किया, फर्जी नाम से कूरियर किया, ताकि कोई शक न हो। शादी के बाद पार्सल घर पहुंचा और पांच दिन में ही सौम्या और उसकी दादी की मौत हो गई। रीमा की जिंदगी भी तबाह हो गई।
अदालत का फैसला
24 अप्रैल 2018 को पुलिस ने पूंजीलाल को गिरफ्तार कर लिया। मुकदमा करीब 7 साल चला। 26 मई 2025 को पटनागढ़ जिला अदालत ने फैसला सुनाया—पूंजीलाल मेहर को सौम्या और उसकी दादी की हत्या का दोषी माना गया और उम्र कैद की सजा सुनाई गई। जब तक वह जिंदा रहेगा, जेल से बाहर नहीं आ सकेगा।
समाज को मिला संदेश
यह केस सिर्फ एक अपराध नहीं था, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाला सबक था। इंसान के अंदर ईर्ष्या, प्रतिस्पर्धा, पद और पैसे का लालच किस हद तक उसे गिरा सकता है, इसका उदाहरण था। अगर पूंजीलाल ने अपने समय को एक अच्छा शिक्षक बनने में लगाया होता, तो शायद आज वह जेल में नहीं होता और एक परिवार उजड़ने से बच जाता।
जहाँ तक बात है अपराध फिल्मों और वीडियो की, वे सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि जागरूकता के लिए बनाए जाते हैं। हमें उनसे सिर्फ अच्छी बातें लेनी चाहिए, गलतियों से खुद को रोकना चाहिए। कोई अपराध पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता, जो अपराध करेगा एक दिन जरूर पकड़ा जाएगा—अगर कानून से बच भी जाए तो भगवान से नहीं बच सकता।
इसलिए हमें अपने अंदर की बुरी आदतों को नकारना चाहिए, दूसरों के साथ प्यार साझा करना चाहिए और एक बेहतर समाज बनाना चाहिए।
जय हिंद।
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