सलीम खान को वेंटिलेटर पर देख फूट-फूटकर रो पड़े सलमान खान!💔 ब्रेन क्लॉट के चलते ICU में हुए भर्ती!😭

.

सलीम खान की हालत बेहद नाजुक: वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग, लिवर कैंसर की आशंका से सदमे में परिवार

मुंबई: हिंदी सिनेमा के इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले दिग्गज पटकथा लेखक Salim Khan को लेकर आई ताजा खबरों ने पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। मुंबई के प्रतिष्ठित Lilavati Hospital में भर्ती 90 वर्षीय सलीम खान इस समय आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं और डॉक्टरों की निगरानी में जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। पहले से ब्रेन हेमरेज और ब्रेन क्लॉट से जूझ रहे सलीम खान के स्वास्थ्य को लेकर अब एक नई आशंका ने परिवार और प्रशंसकों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है।


दोहरी मार: ब्रेन हेमरेज के बाद अब लिवर कैंसर की आशंका

मस्तिष्क पर गंभीर असर

बताया जा रहा है कि हाई ब्लड प्रेशर के कारण उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ था। मस्तिष्क में रक्तस्राव और जमे हुए खून के थक्के (ब्रेन क्लॉट) को हटाने के लिए सर्जरी की गई। हालांकि ऑपरेशन के बाद भी उनकी चेतना पूरी तरह वापस नहीं आई है। डॉक्टरों ने उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा हुआ है और हर पल उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।

लिवर में संदिग्ध गांठें

स्थिति ने तब और भयावह रूप ले लिया जब जांच के दौरान उनके लिवर में गंभीर असामान्यताएं पाई गईं। चिकित्सा सूत्रों का कहना है कि लिवर में कुछ गांठें दिखाई दी हैं, जिनसे लिवर कैंसर की आशंका जताई जा रही है। यह खबर सामने आते ही परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

बायोप्सी रिपोर्ट का इंतजार

डॉक्टरों ने लिवर की बायोप्सी की है और अब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अगले 24 से 48 घंटों में आने वाली यह रिपोर्ट तय करेगी कि सलीम खान की लड़ाई कितनी लंबी और जटिल होगी। उम्र, पहले से कमजोर होती शारीरिक स्थिति और वेंटिलेटर सपोर्ट—इन सबके बीच यह नई आशंका बेहद गंभीर मानी जा रही है।


टूट गए सलमान खान: ‘दबंग’ की आंखों में दिखा असहनीय दर्द

इस कठिन समय में सबसे ज्यादा भावुक कर देने वाला दृश्य उनके बेटे Salman Khan का रहा। पर्दे पर ‘दबंग’ छवि के लिए मशहूर सलमान इस बार एक असहाय बेटे के रूप में नजर आए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब डॉक्टरों ने लिवर कैंसर की आशंका जताई और बायोप्सी की जानकारी दी, तो सलमान खुद को संभाल नहीं पाए। उन्हें अस्पताल के गलियारे में अपने भाइयों अरबाज और सोहेल के साथ गले लगकर रोते हुए देखा गया। उनकी आंखों से बहते आंसू इस बात का प्रमाण थे कि यह वक्त उनके लिए कितना भारी है।

अस्पताल से बाहर निकलते समय उनका झुका हुआ सिर, नम आंखें और चुप्पी बहुत कुछ कह रही थी। कैमरों की चमक के बीच उन्होंने कुछ पल के लिए आंखें बंद कर लीं—मानो भीतर से टूट चुके हों, लेकिन फिर भी खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हों।

सलमान कई बार सार्वजनिक मंचों पर कह चुके हैं कि उनके पिता ही उनके जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं। ऐसे में पिता की यह हालत उन्हें भीतर तक झकझोर चुकी है।


एकजुट लेकिन गमगीन खान परिवार

संकट की इस घड़ी में पूरा खान परिवार अस्पताल में मौजूद है।
दोनों माताएं—सलमा खान और Helen—आईसीयू के बाहर लगातार दुआ कर रही हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी वहीं डटे हुए हैं।

करीबी मित्रों और फिल्मी हस्तियों का अस्पताल पहुंचना जारी है। अभिनेता Sanjay Dutt ने अस्पताल पहुंचकर परिवार का हौसला बढ़ाने की कोशिश की। निर्माता Sajid Nadiadwala भी वहां देखे गए। लेकिन कैंसर की आशंका ने हर किसी को खामोश कर दिया है। अस्पताल के गलियारों में सिर्फ दुआएं और चिंता की फुसफुसाहट सुनाई दे रही है।


एक युग की चिंता

सलीम खान केवल एक पिता या परिवार प्रमुख नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर के निर्माता रहे हैं। Javed Akhtar के साथ उनकी जोड़ी ने ऐसी कहानियां गढ़ीं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी।

Sholay और Deewaar जैसी फिल्मों ने नायक को संघर्ष, साहस और न्याय की लड़ाई का प्रतीक बनाया। आज विडंबना यह है कि वही लेखक, जिसने परदे पर नायकों को मौत से लड़ना सिखाया, खुद अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है।


इंतजार की घड़ियां और उम्मीद की लौ

अगले 24–48 घंटे बेहद अहम बताए जा रहे हैं। बायोप्सी की रिपोर्ट से स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। उम्र और वर्तमान स्वास्थ्य परिस्थितियों को देखते हुए डॉक्टर किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर रहे।

अस्पताल के बाहर प्रशंसकों की भीड़ उमड़ रही है। सोशल मीडिया पर #SalimKhan के नाम से दुआओं का सिलसिला जारी है। हर कोई बस एक चमत्कार की उम्मीद कर रहा है—वैसा ही चमत्कार जैसा उनकी फिल्मों में आखिरी दृश्य में होता था।

पूरा देश आज यही प्रार्थना कर रहा है कि सिनेमा का यह शेर एक बार फिर मुश्किलों को मात देकर घर लौटे। जिंदगी की यह पटकथा अभी अधूरी है, और करोड़ों दिलों की ख्वाहिश है कि इसका अंत सुखद हो।