ससुर ने बहु संग कर दिया कारनामा/पुलिस और गांव के लोगों के होश उड़ गए/

कोलायत की एक काली रात: रिश्तों का पतन
राजस्थान की तपती रेत और गौरवशाली इतिहास के बीच बसा बीकानेर जिला अपनी परंपराओं के लिए जाना जाता है। लेकिन कोलायत गाँव में भंवर सिंह नाम के एक किसान के घर जो हुआ, वह किसी डरावने सपने से कम नहीं था। भंवर सिंह के पास चार एकड़ जमीन थी, जिससे वह अपने परिवार का गुजारा करता था। उसके दो बेटे थे—नसीब सिंह और सुमित।
नसीब सिंह, जो बड़ा बेटा था, जन्म से एक आंख से देख नहीं सकता था। इस शारीरिक कमी के कारण उसकी शादी नहीं हो पा रही थी, लेकिन वह मेहनती था और गाँव में एक छोटी सी किराने की दुकान चलाता था। वहीं छोटा बेटा सुमित, जिसकी तीन साल पहले कांता नाम की एक सुशिक्षित और सरल लड़की से शादी हुई थी, महत्वाकांक्षी था।
ऑस्ट्रेलिया का सपना और घर की तन्हाई
सुमित को एक ही धुन सवार थी—विदेश जाना। वह हर दिन अपने पिता पर दबाव बनाता कि जमीन का हिस्सा बेचकर उसे ऑस्ट्रेलिया भेज दिया जाए। भंवर सिंह ने शुरू में मना किया, लेकिन अंततः बेटे की जिद के आगे घुटने टेक दिए और अपनी दो एकड़ जमीन बेचकर सुमित को विदेश भेज दिया।
सुमित के जाते ही घर में सन्नाटा पसर गया। कांता, जो अब घर में केवल अपने ससुर भंवर सिंह और जेठ नसीब सिंह के साथ रह गई थी, धीरे-धीरे खुद को अकेला महसूस करने लगी। शुरू में सुमित वीडियो कॉल करता था, लेकिन समय के साथ उसकी बातों में कड़वाहट और फिर चुप्पी छा गई। कांता एक गरीब परिवार से थी, इसलिए वह चाहकर भी अपनी पीड़ा किसी से कह नहीं पाती थी।
जेठ की गंदी नीयत
10 दिसंबर 2025 की सुबह, जब सूरज की किरणें अभी पूरी तरह से नहीं फूटी थीं, नसीब सिंह की नीयत अपनी ही छोटी बहू पर खराब हो गई। उसे लगा कि सुमित तो सात समंदर पार है और कांता का अकेलापन उसका हक बन चुका है।
उस दिन जब भंवर सिंह खेत पर गए हुए थे, नसीब सिंह बहाने से दुकान से घर लौटा। उसने कांता को कपड़े धोते हुए देखा और उसकी सुंदरता उसे विचलित कर गई। उसने घर का मुख्य दरवाजा बंद किया और जबरन कांता को कमरे में घसीट लिया। कांता की चीखें उसकी अपनी ही चुन्नी के नीचे दब गईं। नसीब ने उसके हाथ-पांव बांधकर उसके साथ कुकर्म किया और बाद में उसे जान से मारने की धमकी दी।
ससुर का बदलता स्वरूप
दुखद बात यह थी कि कांता की मुसीबतें अभी खत्म नहीं हुई थीं। ससुर भंवर सिंह, जो जमीन बेचने के बाद मिले पैसों से शराब और अय्याशी के आदी हो चुके थे, उनकी नजरें भी अपनी बहू पर टिक गईं। 25 दिसंबर 2025 को, जब नसीब दुकान के लिए सामान लेने शहर गया था, भंवर सिंह शराब के नशे में धुत होकर घर आए।
सब्जी काटने वाले चाकू की नोक पर उन्होंने कांता की अस्मत को तार-तार कर दिया। जिस ससुर को पिता का दर्जा दिया जाता है, उसी ने अपनी बहू को हवस का शिकार बनाया। कांता के पास अब न तो बोलने की हिम्मत थी और न ही कोई सहारा। वह खामोश रह गई, और यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।
सौदेबाजी और अंत
पाप का घड़ा तब भर गया जब 10 जनवरी 2026 को नसीब सिंह ने अपने एक दोस्त दीपक से ₹50,000 के बदले अपनी बहू (भाई की पत्नी) का सौदा करने की कोशिश की। कांता ने यह बात सुन ली। उसे समझ आ गया कि ये बाप-बेटा उसे जिस्मफरोशी के दलदल में धकेल देंगे।
उस रात कांता ने एक चाल चली। उसने नसीब को बताया कि उसका पिता भंवर सिंह भी उसके साथ गलत काम करता है। नसीब को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब उसने अपनी आँखों से अपने पिता को कांता के कमरे में देखा, तो उसका खून खौल उठा। विडंबना देखिए, एक बलात्कारी को दूसरे का कृत्य नागवार गुजरा। गुस्से में पागल होकर नसीब ने कुल्हाड़ी उठाई और अपने पिता भंवर सिंह की गर्दन काट दी।
निष्कर्ष और संदेश
जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो कांता की आपबीती सुनकर अधिकारियों के रोंगटे खड़े हो गए। नसीब सलाखों के पीछे है और भंवर सिंह मिट्टी में मिल चुका है। कांता की जिंदगी इन दोनों ने मिलकर उजाड़ दी।
सीख: यह घटना हमें सिखाती है कि अन्याय सहना भी उतना ही बड़ा अपराध है जितना अन्याय करना। यदि कांता ने पहली बार में ही आवाज उठाई होती, तो शायद यह खूनी अंजाम न होता।
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