हर दिन नई महिलाओं का लेता था मजा, फिर जो हुआ सबके होश उड़ गए || Crime Ki Kahani
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प्रेम का खौफनाक अंत
प्रस्तावना:
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में, जहां हर कोई एक-दूसरे को जानता था, वहां एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी को हिला कर रख दिया। यह कहानी है यूसुफ की, जो अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दिन-रात मेहनत करता था। लेकिन एक दिन उसकी जिंदगी में ऐसा मोड़ आया कि सब कुछ बदल गया।
पहला अध्याय: यूसुफ का परिवार
यूसुफ, 27 वर्षीय युवक, अपने पिता भूरे खान, पत्नी तबस्सुम और दो छोटे बच्चों के साथ रहता था। वह गल्ला मंडी में काम करता था, जहां से वह सुबह निकलता और शाम को लौटता। यूसुफ का परिवार साधारण था, लेकिन खुश था। उसकी पत्नी तबस्सुम हमेशा उसका इंतजार करती थी, क्योंकि वह जानती थी कि यूसुफ बच्चों के लिए कुछ न कुछ लेकर आएगा।
29 जुलाई 2025 को, यूसुफ अपनी ड्यूटी पर गया, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटा। तबस्सुम और बच्चे चिंतित हो गए। जब रात का अंधेरा छाने लगा, तब भूरे खान ने भी चिंता जताई। उन्होंने सोचा कि शायद यूसुफ को काम में ज्यादा समय लग गया होगा। लेकिन जब रात 9 बजे तक भी यूसुफ नहीं आया, तो भूरे खान ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने का फैसला किया।
दूसरा अध्याय: यूसुफ की गुमशुदगी
गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने यूसुफ की तलाश शुरू की। लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। इसी बीच, 2 अगस्त 2025 को कासगंज जिले के बिलराम पुलिस चौकी क्षेत्र में कुछ लोगों ने झाड़ियों में एक अधजला शव देखा। शव की पहचान करना मुश्किल था, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया।
शव की पहचान के लिए पुलिस ने आसपास के थानों से लापता लोगों की जानकारी जुटाई। जल्द ही पता चला कि यह शव यूसुफ का है। यूसुफ की हत्या की खबर सुनकर उसके परिवार में कोहराम मच गया। उसकी पत्नी और बच्चे गहरे सदमे में थे। पुलिस ने यूसुफ की हत्या के मामले में जांच शुरू की।
तीसरा अध्याय: हत्या की साजिश
जांच के दौरान पुलिस ने यूसुफ की पत्नी तबस्सुम और उसके दोस्त दानिश से पूछताछ की। धीरे-धीरे यह बात सामने आई कि यूसुफ की हत्या की साजिश तबस्सुम और दानिश ने मिलकर रची थी। दोनों के बीच अवैध प्रेम संबंध थे, और यूसुफ के विरोध करने पर उन्होंने उसे खत्म करने का निर्णय लिया।

पुलिस ने तबस्सुम के कॉल डिटेल्स की जांच की, जिसमें दानिश के साथ हुई लंबी बातचीत के सबूत मिले। पूछताछ के दौरान, तबस्सुम ने सब कुछ उगल दिया। उसने बताया कि कैसे उसने अपने पति को खत्म करने के लिए दानिश के साथ मिलकर योजना बनाई।
चौथा अध्याय: दानिश की गिरफ्तारी
3 अगस्त 2025 को पुलिस ने दानिश को गिरफ्तार किया। उसने स्वीकार किया कि यूसुफ की हत्या में उसकी भूमिका थी। उसने बताया कि यूसुफ को बेहोश करने के लिए उसने उसे नींद की गोलियां दी थीं। फिर उसने यूसुफ की हत्या कर दी और उसके शव को झाड़ियों में फेंक दिया।
जब पुलिस ने दानिश की निशानदेही पर तलाशी ली, तो हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद कर लिया गया। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
पाँचवां अध्याय: बिरहमा और राजकुमार की कहानी
इस बीच, उत्तर प्रदेश के थाना घिरोर क्षेत्र में एक और खौफनाक घटना घटित हुई। फिरोजाबाद से मैनपुरी जाने वाली सड़क पर दो शव मिले। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शवों की पहचान करने की कोशिश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
आखिरकार, एक दर्जी के स्टीकर के माध्यम से पुलिस ने शवों की पहचान की। यह शव राजकुमार और उसके भाई लक्ष्मीकांत के थे। राजकुमार की पत्नी गुड्डी ने बताया कि वह अपने पति और देवर को तलाश कर रही थी, जो एक दिन पहले फिरोजाबाद में अपनी बहन के घर जाने के लिए निकले थे, लेकिन वहां नहीं पहुंचे।
छठा अध्याय: हत्या की वजह
जांच में पता चला कि राजकुमार का एक महिला बिरहमा से संबंध था। बिरहमा का पति प्रहलाद, जो ब्याज पर पैसे देता था, अपने परिवार के साथ फिरोजाबाद में रहने लगा था। राजकुमार और बिरहमा के बीच अवैध संबंध बढ़ते गए। जब गुड्डी को इस बारे में पता चला, तो उसने अपने पति से कई बार शिकायत की, लेकिन राजकुमार ने उसकी बातों को अनसुना कर दिया।
गुड्डी की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी और अंततः उसकी मृत्यु हो गई। राजकुमार ने दूसरी शादी नहीं की, क्योंकि वह बिरहमा के साथ रहना चाहता था। लेकिन बिरहमा ने राजकुमार को छोड़कर अनुज यादव के साथ संबंध बना लिए।
राजकुमार ने जब यह देखा, तो उसने बिरहमा को धमकी दी। बिरहमा ने अनुज को राजकुमार से छुटकारा पाने के लिए राजकुमार को मारने की योजना बनाई।
सातवां अध्याय: राजकुमार की हत्या
राजकुमार को एक दिन उषा का फोन आया, जिसमें उसने एक अच्छी लड़की के बारे में बताया। राजकुमार ने अपनी चचेरे भाई लक्ष्मीकांत को भी साथ ले लिया। दोनों ने उषा के घर जाकर लड़की के साथ समय बिताने का निर्णय लिया।
लेकिन जब वे वहां पहुंचे, तो अनुज और उसके साथी पहले से ही वहां मौजूद थे। राजकुमार को मारने के लिए अनुज ने राजकुमार पर हमला किया और उसे मार डाला। लक्ष्मीकांत को भी नहीं बख्शा गया और उसकी भी हत्या कर दी गई।
आखिरी अध्याय: न्याय की प्रक्रिया
पुलिस ने उषा और बिरहमा को गिरफ्तार किया, लेकिन मुख्य आरोपी अनुज और उसके साथी पकड़े नहीं गए। पुलिस ने कई दिनों तक उनकी तलाश की, और अंततः अनुज को गिरफ्तार कर लिया। उसने अपनी भूमिका स्वीकार की, लेकिन राजकुमार की पिस्तौल और मोटरसाइकिल का पता नहीं चला।
आखिरकार, सभी आरोपी जेल की सलाखों के पीछे थे। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि प्रेम और वासना का अंधा खेल कभी-कभी खौफनाक अंत ला सकता है।
समापन:
इस कहानी का उद्देश्य किसी को दुख पहुंचाना नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक करना है। हमें यह समझना होगा कि प्रेम और वासना के चक्कर में हमें अपने परिवार और समाज का ध्यान रखना चाहिए। ऐसी घटनाओं से हमें सतर्क रहना चाहिए और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
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