11 अक्टूबर की वह रात, जब रिश्तों की सच्चाई सामने आई | सचिन उपाध्याय मामला : पूरी कहानी

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सचिन उपाध्याय का संघर्ष

प्रारंभ

कहते हैं, शादी सिर्फ दो लोगों का रिश्ता नहीं होती, बल्कि दो परिवारों का जुड़ाव होती है। शादी के बाद दूल्हा और दुल्हन की जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। यह बदलाव कभी स्वर्ग जैसा होता है और कभी नर्क से भी बदतर। आज की यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक संपन्न परिवार, जिनके पास किसी भी चीज की कमी नहीं थी। पढ़े-लिखे लोग, अच्छे खासे पदों पर काम करने वाले और आपस में बेहद प्यार करने वाला परिवार। लेकिन एक दिन ऐसा आया जब यह पूरा परिवार बिखर कर रह गया।

आगरा का परिवार

यह कहानी उत्तर प्रदेश के आगरा शहर की है। आगरा के ताजगंज थाना क्षेत्र के शमसाबाद इलाके में राम रघु एग्जोटिका नाम की एक कॉलोनी है। इस कॉलोनी में एक हाउस नंबर 11 लक्ष्मी निवास में सचिन उपाध्याय, उनकी पत्नी प्रियंका उपाध्याय और उनके दो बच्चे, 6 साल का बेटा और 3 साल की बेटी रहते थे। सचिन उपाध्याय बैंक ऑफ इंडिया में बैंक मैनेजर थे और प्रियंका एक शिक्षित महिला थीं, जो एक प्रभावशाली परिवार से आती थीं।

सचिन का मूल घर आगरा के मनसुखपुरा थाना क्षेत्र के टीकमपुरा गांव में था। उनके पिता केशवदेव शर्मा एक रिटायर्ड टीचर थे और मां राजेश्वरी गृहिणी। सचिन का परिवार एक खुशहाल और संस्कारी परिवार था। शादी के बाद, सचिन और प्रियंका ने गुजरात में कुछ समय बिताया, जहां उनके पहले बेटे का जन्म हुआ। फिर, 2020 में सचिन की पोस्टिंग आगरा में हुई और वे अपने शहर लौट आए।

खुशियों का घर

सचिन और प्रियंका का परिवार खुशियों से भरा हुआ था। 2020 में एक बेटी के जन्म के साथ उनका परिवार पूरा हो गया। घर में हमेशा रिश्तेदारों और अपनों का आना-जाना लगा रहता था। प्रियंका का मायका भी पास में था, जिससे वह अक्सर अपने माता-पिता से मिलती थीं। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन धीरे-धीरे रिश्तों में खटास आने लगी।

11 अक्टूबर की रात

11 अक्टूबर 2023 की रात, सब कुछ सामान्य लग रहा था। प्रियंका ने सुबह रजनी और मुन्नी नाम की मेड को घर में काम करने के लिए बुलाया था। रजनी ने घर की सफाई की और मुन्नी ने खाना बनाया। प्रियंका ने कुक से कहा कि आज खड़ी चावल और 16 रोटियां बनाना। यह रोटियों की संख्या बाद में एक रहस्य बनेगी।

दोपहर में प्रियंका ने देखा कि सचिन अपने कमरे से बाहर नहीं आए। उसने सोचा कि शायद वह थक गए हैं और सो रहे हैं। लेकिन जब शाम होने लगी और सचिन नहीं उठे, तो प्रियंका ने चिंता जताई। उसने धीरे-धीरे कमरे की ओर बढ़ी और दरवाजा खोला।

एक भयानक दृश्य

जब प्रियंका ने दरवाजा खोला, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। सचिन कमरे में लटके हुए थे। प्रियंका की चीख निकल गई। उसने तुरंत पड़ोसी के घर जाकर फोन मांगा और अपने पिता को कॉल किया। प्रियंका के पिता ने तुरंत अपने बेटे कृष्णा रावत को वहां भेजा।

पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो सचिन को एंबुलेंस में अस्पताल ले जाने की तैयारी हो रही थी। लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद साफ कह दिया कि बहुत देर हो चुकी है। सचिन की मौत हो चुकी थी।

आरोप और प्रत्यारोप

पुलिस ने परिवार से पूछताछ की। प्रियंका ने सीधे-सीधे अपने ससुराल वालों पर आरोप लगाया। उसने कहा कि सचिन को परिवार लगातार परेशान करता था। प्रियंका ने कहा, “मेरे पति सचिन को कोई अहमियत नहीं देता था। वे हमेशा दबाव में रहते थे।”

सचिन के परिवार ने प्रियंका पर आरोप लगाया। इस मामले में दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। पुलिस ने सचिन के शव का पोस्टमार्टम कराया, जिससे कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। सचिन के शरीर पर कई चोटों के निशान थे, जो यह दर्शाते थे कि उसे बेरहमी से मारा गया था।

पुलिस की जांच

पुलिस ने जांच शुरू की और सचिन के परिवार से पूछताछ की। प्रियंका ने कहा कि सचिन के माता-पिता और भाई ने उसे परेशान किया था। लेकिन सचिन के परिवार ने प्रियंका पर आरोप लगाया कि उसने ही सचिन के साथ बुरा व्यवहार किया।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज चेक किया और पाया कि 11 अक्टूबर की रात को प्रियंका का भाई कृष्णा घर पर आया था। पुलिस ने कृष्णा को हिरासत में लिया और उससे पूछताछ की।

कृष्णा की स्वीकार्यता

कृष्णा ने आखिरकार पुलिस के सामने सचिन की हत्या की बात स्वीकार कर ली। उसने बताया कि प्रियंका और उसने मिलकर सचिन पर हमला किया था। उन्होंने सचिन को मारने के लिए पहले उसे पीटा और फिर रस्सी से लटका दिया।

प्रियंका ने अपने पिता को भी इस मामले में शामिल किया। पुलिस ने प्रियंका और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया।

न्याय का रास्ता

इस घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया। प्रियंका और उसके परिवार ने अपने पद और शक्ति का दुरुपयोग किया। सचिन की मौत ने यह साबित कर दिया कि रिश्तों में प्यार और सम्मान की कमी कितनी खतरनाक हो सकती है।

पुलिस ने प्रियंका और कृष्णा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। मामला कोर्ट में गया और न्याय की प्रक्रिया शुरू हुई।

निष्कर्ष

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि रिश्तों में ईमानदारी और विश्वास होना बहुत जरूरी है। जब रिश्तों में स्वार्थ और लालच घुस जाता है, तो परिणाम भयानक होते हैं। हमें हमेशा अपने परिवार के सदस्यों के साथ प्यार और सम्मान से पेश आना चाहिए।

सचिन की कहानी एक चेतावनी है कि हमें अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना चाहिए और कभी भी चुप नहीं रहना चाहिए। अगर हम चुप रहेंगे, तो हमें अपने रिश्तों का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।