4 साल बाद पत्नी IAS बनकर लौटी , तो पति बस स्टॉप पर समोसे बनाता मिला , फिर आगे जो हुआ …

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उदय प्रताप का संघर्ष

प्रारंभ

कानपुर के एक छोटे से मोहल्ले में, जहां की गलियां संकीर्ण और चौराहे व्यस्त होते हैं, वहीं एक साधारण सा ठेला था, जिस पर समोसे तले जा रहे थे। ठेले के पीछे खड़ा था उदय प्रताप, एक मेहनती व्यक्ति, जो अपने जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहा था। उसका चेहरा पसीने से भरा हुआ था, और उसकी आंखों में चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं।

उदय ने अपनी पत्नी संध्या की पढ़ाई के लिए अपनी सारी जमा पूंजी खर्च कर दी थी। संध्या ने अपनी मेहनत और लगन से IAS की परीक्षा पास की थी और अब वह जिले की डीएम बन चुकी थी। लेकिन उदय की जिंदगी में सब कुछ बदल गया था। अब वह बस स्टॉप पर समोसे बेचने पर मजबूर था, जबकि उसकी पत्नी उच्च पद पर बैठी थी।

संध्या की सफलता

संध्या ने अपनी कड़ी मेहनत से IAS की परीक्षा पास की थी। वह हमेशा से पढ़ाई में अव्‍वल रही थी। जब वह अपने पति उदय के साथ पढ़ाई कर रही थी, तब उसने अपने सपनों को साकार करने के लिए अपनी मेहनत को दोगुना कर दिया। उसने अपने पति की मदद से कोचिंग की और दिल्ली जाकर पढ़ाई की।

जब संध्या ने परीक्षा पास की, तो पूरे मोहल्ले में जश्न मनाया गया। सभी ने उसे बधाई दी, लेकिन उदय के मन में एक अजीब सा दर्द था। उसने अपनी पत्नी को अपने सपनों के लिए हर संभव मदद की थी, लेकिन अब वह अपने ठेले पर समोसे बनाते हुए अकेला महसूस कर रहा था।

बस स्टॉप का दिन

एक दिन, बस स्टॉप पर भीड़ थी। लोग अपनी-अपनी बसों का इंतजार कर रहे थे। उदय ने अपनी आवाज लगाई, “गर्म समोसे लो!” तभी एक चमचमाती गाड़ी आई। उसमें से संध्या उतरी। उसका चेहरा आत्मविश्वास से भरा हुआ था, और उसने अपने चारों ओर देखा।

उदय ने उसे पहचान लिया, लेकिन संध्या ने उसे नहीं देखा। वह अपने अधिकारियों के साथ आगे बढ़ गई। उदय का दिल टूट गया। उसे लगा जैसे समय रुक गया हो। उसने सोचा, “क्या मेरी पत्नी मुझे पहचान नहीं रही है?”

अपमान का सामना

उदय वहीं खड़ा रह गया। उसके चारों ओर लोग उसकी ओर देख रहे थे। किसी ने कहा, “देखो, यह तो समोसे बनाने वाला है।” उदय को बहुत अपमान महसूस हुआ। उसे समझ नहीं आया कि वह अपनी पत्नी से मिले बिना कैसे जी पाएगा।

तभी पुलिस के कुछ लोग वहां आए। एक पुलिस वाले ने कहा, “तू ही उदय प्रताप है?” उसने सिर झुकाकर हां कहा। फिर पुलिस ने उसे पकड़ लिया और थाने ले गए।

थाने में सब हंस रहे थे। कोई बोला, “समोसे वाला कह रहा है कि वह डीएम का पति है!” उदय ने चुप रहकर सब कुछ सहा। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन उसने किसी को नहीं दिखाया।

नई शुरुआत

अगले दिन, उदय ने अपने अपमान का बदला लेने का फैसला किया। उसने एक आरटीआई फॉर्म भरा और संध्या से जुड़े सवाल पूछे। उसने पूछा, “क्या डीएम संध्या शादीशुदा हैं?” यह पत्र संध्या के ऑफिस पहुंचा।

संध्या ने पत्र देखा और गुस्से में उसे फाड़ दिया। लेकिन यह मामला अब मीडिया तक पहुंच चुका था। उदय ने एक लोकल पत्रकार से संपर्क किया और अपनी कहानी सुनाई।

पत्रकार ने कहा, “आपकी कहानी बहुत दिलचस्प है। मैं इसे अपने चैनल पर दिखाऊंगा।” उदय ने सोचा कि यह उसका मौका है।

मीडिया का ध्यान

उदय की कहानी मीडिया में वायरल हो गई। सभी ने उसे पहचानना शुरू कर दिया। लोगों ने कहा, “क्या यह वही समोसे वाला है जो डीएम का पति है?” संध्या अब सवालों में थी।

कोर्ट में सुनवाई की तारीख आई। उदय ने कोर्ट में अपने सबूत पेश किए। उसने शादी का प्रमाण पत्र और तस्वीरें दिखाई। जज ने सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया।

कोर्ट का फैसला

अगली सुनवाई के दिन कोर्ट में भीड़ थी। जज ने कहा, “यह बात सच है कि संध्या और उदय प्रताप की शादी हुई थी। संध्या ने जानबूझकर अपने पति की पहचान छिपाई।”

संध्या के चेहरे पर निराशा थी। उदय ने सोचा, “मैंने अपनी पहचान खोई थी, लेकिन अब मैं इसे वापस पा चुका हूं।”

अंतिम परिणाम

उदय ने अपनी मेहनत और साहस से साबित कर दिया कि सच्चाई हमेशा सामने आती है। उसने अपने अपमान को सहा और अंततः अपनी पत्नी को पहचान दिलाई।

उदय ने फिर से अपने समोसे के ठेले पर लौटकर काम करना शुरू किया। लेकिन इस बार उसकी आंखों में आत्मविश्वास था। अब लोग उसे इज्जत से देख रहे थे।

निष्कर्ष

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि सच्चाई कभी छिप नहीं सकती। मेहनत और संघर्ष हमेशा रंग लाते हैं। उदय ने अपने प्यार और सम्मान के लिए लड़ाई लड़ी और अंततः जीत हासिल की।