Alwar Case: घर के अंदर छुपा वो सच जिसने एक परिवार उजाड़ दिया |

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संतोष और हनुमान की साजिश: एक परिवार की हत्या और कानून के सवाल

रिश्तों में प्यार और विश्वास का सबसे बड़ा मतलब होता है, लेकिन जब यही रिश्ते विश्वासघात और धोखे के शिकार हो जाएं तो परिणाम बेहद भयानक हो सकते हैं। राजस्थान के अलवर जिले में घटी एक खौ़फनाक घटना इस बात का उदाहरण बन गई है, जहां एक पत्नी ने अपने पति और बच्चों की हत्या करने की साजिश रची। इस घटना के दौरान केवल परिवार के पांच सदस्य मारे गए, बल्कि समाज और कानून के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ। यह कहानी एक महिला, संतोष शर्मा और उसके प्रेमी हनुमान प्रसाद की है, जिन्होंने अपने स्वार्थ और रिश्ते के लिए कई जिंदगियों को तबाह कर दिया। इस घटना में एक साजिश, धोखा, हत्या और एक हत्यारे के जीवन में चौंकाने वाली मोड़ आई, जो हमारे समाज के लिए एक बड़ा सबक है।

घटना का आरंभ

2 अक्टूबर 2017 की रात एक आम सी रात थी। अलवर के शिवाजी पार्क के एक दो मंजिला घर में शर्मा परिवार के सदस्य अपने-अपने कामों में व्यस्त थे। घर में कुल आठ सदस्य रहते थे, जिनमें परिवार के मुखिया बनवारी लाल शर्मा, उनकी पत्नी संतोष शर्मा, तीन बेटे (मोहित, हैप्पी और अजू), और उनके छोटे भाई मुकेश, मुकेश की पत्नी कविता और उनके बेटे निक्की शामिल थे। इस घर में आमतौर पर सब कुछ सामान्य था, लेकिन एक बदलाव ने इस परिवार की पूरी जिंदगी को बदल दिया।

अक्टूबर 2017 की रात कविता और संतोष को अचानक एक बदलाव का सामना करना पड़ा। संतोष की बहन कविता ने रात में अपनी बहन के साथ सोने का निर्णय लिया, जबकि कविता का बेटा निक्की इस बार अपने भाइयों के साथ नीचे सोने की जिद कर रहा था। किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह सामान्य रात उनके लिए एक भयानक और अंतिम रात साबित होने वाली थी।

अगली सुबह का खौ़फनाक दृश्य

3 अक्टूबर 2017 की सुबह, जैसे ही संतोष और कविता ने घर के ग्राउंड फ्लोर पर कदम रखा, उनके सामने एक खौ़फनाक दृश्य था। उनके बच्चों के शव बिस्तर पर पड़े हुए थे, जिनपर धारदार हथियार से हमला किया गया था। कमरे में संघर्ष के निशान थे, और फर्श पर खून फैला हुआ था। यह देख संतोष और कविता की चीख निकल गई। घर के भीतर का दृश्य भी और भयानक था। बगल के कमरे में बनवारी लाल और उनके बड़े बेटे अमन का भी कत्ल कर दिया गया था।

पुलिस को सूचना दी गई और कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घर के अंदर जांच शुरू की और पाया कि यह घटना एक अचानक हमला नहीं था, बल्कि पूरी तैयारी के साथ किया गया था। घर में कोई शोर नहीं हुआ था, जिससे यह शक हुआ कि यह हमला घर के ही किसी करीबी ने किया था।

हत्या की साजिश

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि इस हत्या का संबंध परिवार के भीतर के विवाद से था। संतोष की पत्नी बनवारी लाल से लंबे समय से विवाद चल रहा था, खासकर परिवार की संपत्ति और जमीन के बंटवारे को लेकर। पुलिस ने अनुमान लगाया कि यह हत्या संपत्ति विवाद के कारण की गई थी, लेकिन धीरे-धीरे एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।

संतोष का नाम हनुमान प्रसाद से जुड़ा हुआ था, जो उसका प्रेमी था। संतोष और हनुमान का अफेयर शुरू हो चुका था, और वह अपने पति से नाखुश थी। दोनों ने मिलकर बनवारी लाल और उनके बेटे अमन को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी। इस साजिश का हिस्सा था एक निर्दोष शख्स, अजय, जिसे संतोष और हनुमान ने फंसा लिया। अजय का पहले से एक आपराधिक रिकॉर्ड था और उसका परिवार उसे घर से बाहर निकाल चुका था। इसलिए उसे कोई नहीं ढूंढेगा और वह पूरी तरह से एक बलि का बकरा बन सकता था।

अपराध का मास्टरमाइंड

हनुमान और संतोष ने मिलकर अजय को अपनी साजिश में शामिल किया। अजय को यह यकीन दिलाया गया कि उसे नौकरी मिल गई है, और फिर उसे राजस्थान के सीकर भेजने की योजना बनाई गई। इस बीच, हनुमान और संतोष ने एक और प्लान तैयार किया। उन्होंने अजय को जानबूझकर इस साजिश का हिस्सा बनाया, ताकि उसका कत्ल करने के बाद पुलिस की नजरें उसी पर जाएं।

2 अक्टूबर 2017 की रात को संतोष ने पूरे परिवार को नींद की गोलियां खिला दी थीं। उसके बाद, जब घर में सभी लोग सो चुके थे, हनुमान और उसके दोस्तों ने घर में घुसकर निर्ममता से वारदात को अंजाम दिया। संतोष ने हनुमान को घर के मुख्य दरवाजे को खोलने का इशारा किया, और फिर पूरे परिवार को मौत के घाट उतार दिया। यह एक खौ़फनाक साजिश थी, जिसमें संतोष और हनुमान ने किसी भी हिचकिचाहट के बिना पांच जिंदगियों को खत्म कर दिया।

जांच और गिरफ्तारी

पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और कई सुरागों की तलाश की। इस बीच, पुलिस ने संतोष और हनुमान के बीच हुई बातचीत और उनके फोन रिकॉर्ड्स की जांच की। पुलिस को पता चला कि संतोष और हनुमान ने मिलकर अजय को इस साजिश में शामिल किया था, और उसके बाद उसे मारने की योजना बनाई थी। पुलिस ने हनुमान को गिरफ्तार किया और पूछताछ की। अंततः हनुमान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और बताया कि उसने संतोष के कहने पर यह सारी साजिश रची थी।

सजा और मामला

कई सालों तक चली सुनवाई के बाद 21 मार्च 2023 को अदालत ने संतोष और हनुमान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया गया। यह एक सजा थी, लेकिन यह कहानी एक और दुखद मोड़ पर भी पहुंची। हनुमान प्रसाद, जो कभी संतोष के लिए उसकी पूरी दुनिया से लड़ने का इरादा रखता था, अब एक दूसरी महिला के साथ विवाह कर चुका था। 23 जनवरी 2026 को वह पैरोल पर जेल से बाहर आया और उसने प्रिय

निष्कर्ष

यह घटना उन लोगों के लिए एक करारा सबक है जो प्रेम, लालच और जुनून में अपने रिश्तों को बर्बाद करने का सोचते हैं। यह कहानी इस बात का प्रतीक बन गई है कि कोई भी अपराध, चाहे कितना भी सोचा-समझा क्यों न हो, अंत में सामने आ ही जाता है। इसलिए हमें अपने रिश्तों में ईमानदारी और विश्वास बनाए रखना चाहिए और जीवन में सही रास्ते पर चलने की कोशिश करनी चाहिए।