Canada में 2 Indians का म*र्डर, दोनों पढ़ने गए थे | अमरबीर के गिरफ्तारी वारंट |

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कनाडा में भारतीय सपनों का कत्लेआम: दो होनहार छात्रों की दर्दनाक मौत और सिस्टम पर उठते सवाल

विशेष रिपोर्ट: करमपाल

ओटावा/उज्जैन/नाभा: हर साल भारत से लाखों युवा अपनी आँखों में सुनहरे भविष्य के सपने संजोकर सात समंदर पार कनाडा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख करते हैं। माता-पिता अपनी जीवन भर की जमापूंजी, जमीन और यहाँ तक कि घर गिरवी रखकर अपने बच्चों को विदेश भेजते हैं ताकि वे वहां पढ़ लिखकर परिवार का नाम रोशन कर सकें। लेकिन जब उन्हीं घरों में विदेशी धरती से किसी अनहोनी की खबर आती है, तो वह केवल एक मौत नहीं होती, बल्कि पूरे परिवार के सपनों की अर्थी होती है।

हाल ही में कनाडा से दो ऐसी दर्दनाक खबरें सामने आई हैं जिन्होंने भारत में रह रहे हजारों परिवारों को झकझोर कर रख दिया है। एक मामला मध्य प्रदेश के उज्जैन के गुरकीरत सिंह का है और दूसरा पंजाब के नाभा की नवदीप कौर का।


मामला 1: गुरकीरत सिंह मनोचा – उज्जैन का वह सितारा जो कनाडा की सड़कों पर बुझ गया

मध्य प्रदेश के उज्जैन के रहने वाले 24 वर्षीय गुरकीरत सिंह मनोचा एक बेहद होनहार और मिलनसार युवक थे। उनकी शुरुआती शिक्षा कॉन्वेंट स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्होंने उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा किया। वे अपने पिता गुरजीत सिंह के फूड बिजनेस में हाथ बँटाते थे, लेकिन उनके सपने बड़े थे। वे बिजनेस की बारीकियां सीखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव प्राप्त करने के लिए सवा साल पहले कनाडा गए थे।

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में वे ‘नॉर्दन लाइट्स कॉलेज’ में बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे थे। अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए वे फोर्ट सेंट जॉन इलाके के एक वॉलमार्ट (Walmart) स्टोर में मैनेजर के रूप में पार्ट-टाइम नौकरी भी कर रहे थे।

वह काली रात: 14 मार्च की घटना

14 मार्च को गुरकीरत अपनी ड्यूटी खत्म करके स्टोर से घर की ओर लौट रहे थे। तभी वहां 10-12 छात्रों का एक समूह आया। बताया जा रहा है कि उन छात्रों के बीच आपस में कोई विवाद था, जिसमें गुरकीरत अनजाने में फंस गए। उन युवकों ने गुरकीरत पर हमला कर दिया और उन्हें इतनी बेरहमी से पीटा कि वे लहूलुहान हो गए। क्रूरता की हद तो तब पार हो गई जब उन हमलावरों ने गंभीर रूप से घायल गुरकीरत के ऊपर तेज रफ्तार गाड़ी चढ़ा दी।

अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक पिता जो दिल्ली के एक फूड एग्जीबिशन से वापस लौट रहा था, उसे फोन पर खबर मिली कि उसका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।

मजबूरी की पराकाष्ठा: शव लाने का खर्च ₹38 लाख

गुरकीरत की मौत के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव उनके घर पहुँचे और सांत्वना दी। परिवार की पहली मांग थी कि बेटे का शव भारत लाया जाए। लेकिन जब प्रक्रिया पता चली तो सबके होश उड़ गए। कनाडा से शव लाने में 3 से 4 हफ्ते का समय और लगभग 40,000 डॉलर (करीब 37-38 लाख रुपये) का खर्च बताया गया।

इतनी भारी रकम और समय के कारण परिवार ने भारी मन से अपना फैसला बदल लिया। अब उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि गुरकीरत के दो भाइयों का वीजा जल्द लगवाया जाए ताकि वे कनाडा जाकर अपने भाई का अंतिम संस्कार कर सकें।


मामला 2: नवदीप कौर – पंजाब की बेटी जिसकी लाश फ्रेजर नदी में मिली

दूसरी खबर पंजाब के नाभा से है, जहाँ की 28 वर्षीय नवदीप कौर कनाडा पढ़ाई करने गई थी। नवदीप के पिता गुरप्रीत सिंह ने अपनी 10 बीघे जमीन बेचकर ₹40 लाख जुटाए थे ताकि उनकी बेटी विदेश जा सके। लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस बेटी को वे उज्जवल भविष्य के लिए भेज रहे हैं, उसकी लाश के अवशेष उन्हें महीनों बाद मिलेंगे।

गायब होने से मर्डर मिस्ट्री तक

नवदीप कौर 22 फरवरी 2024 को अचानक गायब हो गई। जब परिवार का संपर्क टूटा, तो 23 फरवरी को पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। सीसीटीवी फुटेज में वह आखिरी बार रात 10:30 बजे सरे (Surrey) शहर के एक इलाके में देखी गई थी। महीनों तक पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला।

जुलाई में कनाडा की ‘इंटीग्रेटेड होमीसाइड इन्वेस्टिगेशन टीम’ (IHIT) को रिचमंड के एक इंडस्ट्रियल एरिया के पास फ्रेजर नदी में मानव अवशेष (कंकाल) मिले। डीएनए जांच के बाद पुष्टि हुई कि ये अवशेष नवदीप कौर के ही थे।

आरोपी अमरवीर सिंह: प्यार और धोखा

जांच में पुलिस ने पाया कि नवदीप कौर और भारतीय मूल के 24 वर्षीय अमरवीर सिंह के बीच प्रेम संबंध थे। पुलिस का मानना है कि किसी अनबन के चलते अमरवीर ने नवदीप की हत्या की और सबूत मिटाने के लिए उसे नदी में फेंक दिया।

कनाडा पुलिस ने अमरवीर सिंह के खिलाफ ‘सेकंड डिग्री मर्डर’ का मामला दर्ज किया है और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। हालांकि, पुलिस को अंदेशा है कि अमरवीर सिंह गिरफ्तारी से बचने के लिए भारत भाग गया है। कनाडा पुलिस अब इंटरपोल और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के जरिए उसकी तलाश कर रही है।


कनाडा में बढ़ती असुरक्षा और छात्रों का भविष्य

ये दो घटनाएं केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं हैं, बल्कि यह उस असुरक्षा की ओर इशारा करती हैं जिसका सामना भारतीय छात्र विदेशों में कर रहे हैं। कनाडा में बढ़ती गैंगवार, नस्लीय हमले और आपसी विवादों में छात्रों की मौत एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

आर्थिक बोझ: एक औसत भारतीय परिवार विदेश भेजने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है। गुरकीरत और नवदीप के परिवारों ने लाखों रुपये खर्च किए थे, जो अब कभी वापस नहीं आएंगे।

कानूनी पेचीदगियां: शव को वापस लाने की प्रक्रिया इतनी महंगी और जटिल है कि गरीब या मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चे का आखिरी चेहरा भी नहीं देख पाते।

न्याय की गुहार: नवदीप कौर के पिता आज भी केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से अपील कर रहे हैं कि उनकी बेटी के कातिल को सलाखों के पीछे भेजा जाए।


निष्कर्ष: जागरूक रहने की जरूरत

विदेश जाकर पढ़ना एक बड़ा अवसर है, लेकिन वहां के बढ़ते अपराध और बदलती परिस्थितियों को देखते हुए छात्रों और उनके अभिभावकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। सरकारों को भी चाहिए कि वे विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा के लिए अधिक पुख्ता इंतजाम करें और ऐसी घटनाओं में त्वरित कानूनी और आर्थिक सहायता प्रदान करें।

गुरकीरत और नवदीप की कहानी हमें याद दिलाती है कि कामयाबी की चमक के पीछे कभी-कभी बहुत गहरा अंधेरा भी होता है। ईश्वर इन दोनों युवाओं की आत्मा को शांति दे और उनके परिवारों को यह असीम दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।