Iran में पढ़ रही Indian Muslim लड़की की Internet पर Video Viral! क्यों हो रही ट्रोल, वजह चौंका देगी

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वह वीडियो जो वतन लौटा लाया

ईरान के एक कोने में, जहां तेहरान की सड़कों पर विरोध की लपटें जल रही थीं, एक कमरे के अंदर भारतीय मुस्लिम छात्रा सायरा अली अपने दोस्त के फोन से रिकॉर्डिंग शुरू करती है। हिजाब में लिपटी सायरा का चेहरा थका हुआ लेकिन आत्मविश्वास से भरा हुआ है। कैमरे के सामने वह मुस्कुराती है, लेकिन उसकी आंखों में वह बेचैनी साफ झलकती है जो एक अजनबी देश में जारी उथल-पुथल के बीच एक छात्रा को महसूस होती है।

“अब्बू, अम्मी, मैं ठीक हूं,” वह कहती है। “मत घबराओ। जो भी हो रहा है, मैं अंदर ही रहती हूं, सुरक्षित हूं।”

सायरा लखनऊ की रहने वाली है। दो साल पहले उसने तेहरान यूनिवर्सिटी में फारसी साहित्य में मास्टर्स के लिए दाखिला लिया था। शुरू में सब कुछ ठीक था — क्लासेस, दोस्त, घूमना-फिरना। लेकिन फिर सब कुछ बदल गया।

सितंबर के महीने में तेहरान की एक युवती की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया। विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, सबसे पहले यूनिवर्सिटी से। सायरा की यूनिवर्सिटी भी चुप नहीं रही। लेकिन सायरा ने खुद को इन सबसे दूर रखा। उसके लिए यह उसकी पढ़ाई का अंतिम वर्ष था, और वह चाहती थी कि किसी भी तरह डिग्री लेकर लौट जाए।

लेकिन जैसे-जैसे दिनों में विरोध तेज होता गया, सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया, सड़कें बंद होने लगीं, कर्फ्यू लगने लगा। सायरा का डर धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहा था। भारत सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की — “भारतीय नागरिकों को तत्काल ईरान छोड़ देना चाहिए।” एयर इंडिया ने उड़ानें सीमित कर दीं।

Iran में पढ़ रही Indian Muslim लड़की की Internet पर Video Viral! क्यों हो  रही ट्रोल, वजह चौंका देगी

सायरा उलझन में थी। एक ओर मां-बाप की चिंता, दूसरी ओर पढ़ाई का सपना। उसका थेसिस अधूरा था, लेकिन अब सवाल था जान का।

तभी उसने वह वीडियो रिकॉर्ड किया। एक दोस्त के फोन से — क्योंकि उसका खुद का सिम काम नहीं कर रहा था। वह वीडियो महज एक मिनट का था। लेकिन उसने एक तूफान खड़ा कर दिया।

वीडियो एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपलोड होते ही वायरल हो गया। हजारों ने शेयर किया, लाखों ने देखा। लेकिन तारीफ से ज्यादा उसे मिला ट्रोल। किसी ने कहा, “अब सरकार को दोष मत देना जब कुछ हो जाए।” किसी ने लिखा, “हिजाब में बैठकर वही ईरान की प्रशंसा कर रही है, बाद में रोएगी।”

सायरा हैरान थी। उसने किसी को गाली नहीं दी, सरकार को दोष नहीं दिया। बस इतना कहा था, “मैं ठीक हूं, घबराइए मत।” लेकिन ट्रोलर्स ने उसे उस भीड़ में डाल दिया, जो हर बार किसी संकट के समय सरकार को कोसती है।

सोशल मीडिया पर चल रही बहस में कुछ ने उसका समर्थन भी किया। “एक लड़की जो अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती है, उसे इतना ट्रोल करना क्या जायज़ है?” एक पत्रकार ने लिखा। एक रिटायर्ड आर्मी अफसर ने कहा, “हम जिन बच्चों को विदेश पढ़ने भेजते हैं, उन्हें हमें वापस बुलाना चाहिए, लेकिन उन्हें नीचा दिखाकर नहीं।”

सायरा का वीडियो अब न्यूज़ चैनलों पर भी चलने लगा। एक दिन उसे अपने देश के एक मंत्री का बयान भी देखने को मिला — “हम सभी छात्रों को जल्द से जल्द वापस लाने के प्रयास कर रहे हैं। भारत सरकार उनके साथ है।”

लेकिन फिर भी, एक हिस्सा ऐसा था जो उसे दोष दे रहा था — जैसे वह वहां पढ़ने नहीं, कोई साजिश करने गई हो। उसकी चुप्पी को उसकी गलती माना जा रहा था।

वीडियो की सबसे मार्मिक लाइन थी — “मैं जिंदा हूं।”

सायरा ने यह शब्द शायद मज़ाक में कहे थे, लेकिन उन शब्दों ने एक सच्चाई को छू लिया था — हर वह छात्र, जो विदेश में फंसा होता है, जानता है कि एक बार सिस्टम ने साथ छोड़ दिया, तो जिंदा लौटना भी सौभाग्य है।

सायरा आखिरकार भारत लौटी, ऑपरेशन ‘संजीवनी’ के तहत एयरलिफ्ट होकर। उसकी आंखें नम थीं। कैमरे वाले उसके पीछे दौड़ रहे थे, लेकिन वह रुकी नहीं।

आज, दो साल बाद, वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रही है। मीडिया से वह अब भी दूर रहती है। लेकिन जब मैंने उससे पूछा, “वह वीडियो आपने क्यों बनाया था?” तो वह मुस्कुराई और बोली, “क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि मेरे अब्बू अम्मी टीवी पर देखें कि तेहरान में गोली चली, और सोचें कि मैं वहां मर गई।”

सायरा की कहानी सिर्फ एक वीडियो की नहीं थी। यह उस डर की कहानी थी, जो एक लड़की ने दुनिया को दिखाया बिना सहा। वह ट्रोल हुई, लेकिन वह टूटी नहीं।

उसने साबित किया कि कभी-कभी, एक फोन कैमरा भी ढाल बन सकता है।

और एक वीडियो, वतन लौटा सकता है।