कानपुर में 1600 करोड़ की साजिश: मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर आतंकवादी गतिविधियों तक

कानपुर, उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक शहर, अपनी रफ्तार के लिए जाना जाता है। लेकिन 16 फरवरी, 2023 को यहां जो घटना घटी, उसने यूपी पुलिस को सकते में डाल दिया और कानपुर को ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया। एक मामूली सी लूट की वारदात ने महज कुछ घंटों में एक ऐसी साजिश का खुलासा किया, जिससे दिल्ली से लेकर मुंबई तक की जांच एजेंसियां भी चौंक गईं। यह कहानी सिर्फ एक लूट की नहीं, बल्कि एक मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और इसके पीछे की साजिश की है, जिसमें 1600 करोड़ रुपये का बड़ा खेल छिपा था।

लूट से शुरू होती है एक खतरनाक साजिश

कहानी की शुरुआत होती है यशोदा नगर के रहने वाले मोहम्मद वासिद और उनके साथी अरशद से। 16 फरवरी को ये दोनों फूलबाग स्थित IDBI बैंक से बड़ी रकम निकालकर बाइक से जाजमऊ की तरफ बढ़ रहे थे। तभी श्यामनगर के पास चार नकाबपोश लोग उनकी बाइक के पास आए और लूटपाट शुरू कर दी। इन बदमाशों ने वासिद और अरशद को घेर लिया और उनके पास से 3 करोड़ 20 लाख रुपये लूट लिए। लेकिन जब वासिद ने पुलिस को शिकायत करने की कोशिश की, तो उसका रवैया अजीब था। पहले उसने कहा कि 25 लाख लूटे गए, फिर 8 लाख और आखिरकार उसने पुलिस से कहा कि यह तो आपसी झगड़ा है, कोई लूट नहीं हुई।

पुलिस की जांच और महफूज़ का खुलासा

जब यूपी पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की, तो उन्हें बैंक की सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड में कुछ संदिग्ध गतिविधियाँ दिखीं। 16 फरवरी को जिस खाते से 3 करोड़ 20 लाख रुपये निकाले गए थे, वह खाता जाजमऊ के शिवांग एनरी के नाम पर था, और वह खाता एक स्क्रैप कारोबारी महफूज़ का था। यह जांच यहीं नहीं रुकी, बल्कि पुलिस को यह पता चला कि महफूज़ के खाते से पिछले कुछ समय में भारी रकम का लेन-देन हुआ था। महफूज़ के पैन कार्ड और मोबाइल की जानकारी से पता चला कि वह एक मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा था, जिसमें 68 संदिग्ध बैंक खातों से 1600 करोड़ रुपये की बड़ी रकम का लेन-देन हुआ था।

महफूज़ के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी और उसके बैंक खातों की जांच में यह पता चला कि उसने कानपुर, उन्नाव और फतेहपुर जैसे क्षेत्रों में फर्जी फॉर्मों के माध्यम से पैसे इकट्ठा किए थे और फिर उसे कैश में बदलकर ठिकाने लगा दिया था। इसके बाद पुलिस ने महफूज़ और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों की धरपकड़ शुरू की।

मास्टरमाइंड रहमान और लुटेरों की गिरफ़्तारी

महफूज़ के गिरोह का मास्टरमाइंड एक शख्स था जिसका नाम रहमान था। रहमान ने अपने साथी लुटेरों के साथ मिलकर पूरी साजिश को अंजाम दिया था। वह जानता था कि यह पैसा अवैध है, इसलिए उसने महीनों तक रेकी की और यह सुनिश्चित किया कि लूट के बाद पुलिस के पास कोई ठोस सबूत न पहुंचे। जब पुलिस ने जाल बिछाया और अहिरवा के पास मुठभेड़ में यासीन और मुजाहिद के पैर में गोली मारी, तो रहमान और उसके अन्य साथी भी पकड़ में आ गए। इनके पास से 10 लाख रुपये से ज्यादा की नकदी और हथियार बरामद हुए।

आतंकवादी गतिविधियों का संदेह और जांच

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि यह 1600 करोड़ रुपये की रकम किसके लिए इकट्ठा की जा रही थी? क्या इसका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था? क्या यह पैसा देश विरोधी साजिशों में लगाया जा रहा था? इन सवालों के जवाब खोजने के लिए पुलिस ने आरबीआई, ईडी और इनकम टैक्स विभाग के साथ मिलकर जांच को और गहराई से शुरू किया।

महफूज़ के डिजिटल डाटा से यह जानकारी मिली कि उसने कई फर्जी नामों से इंटरप्राइजेज खोली थीं, जिनका संबंध देश के विभिन्न हिस्सों से था। इन खातों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध व्यापार के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने महफूज़ की गिरफ्तारी के बाद इस मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को और विस्तार से खोला।

पुलिस की जांच और बड़े अधिकारियों की मिलीभगत

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि बैंकों के बड़े अधिकारियों की भी महफूज़ से मिलीभगत थी। सवाल यह उठता है कि कैसे एक ही पते पर इतने बैंक खाते खुल सकते हैं? और इतने बड़े पैमाने पर कैश विड्रॉल बिना किसी अलार्म के कैसे हो रहा था? इस मामले में बैंक के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

नतीजा और कानूनी कार्रवाई

फिलहाल, कानपुर पुलिस इस पूरे सिंडिकेट की जड़ों को खोदने में लगी है। महफूज़ भले ही फरार हो, लेकिन अब वह बच नहीं पाएगा। पुलिस ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ एक लूट का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के खिलाफ एक बड़ी साजिश है। महफूज़ की गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 1600 करोड़ रुपये का लेन-देन कहां जा रहा था और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा था।

कानपुर पुलिस और जांच एजेंसियों के इस मामले को हल करने में काफी वक्त लग सकता है, लेकिन यह घटना यह साबित करती है कि देश में मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी लेन-देन का कारोबार बहुत बड़ा और संगठित हो चुका है, जिसे नियंत्रित करना आसान नहीं है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कई नई जानकारी सामने आ सकती है, जो यह बताएगी कि यह साजिश कितनी गहरी थी।

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