अमेरिका पहुँचने के 24 घंटे के भीतर अमृतधारी लड़की के साथ सगे मामा ने क्या किया?

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विश्वासघात की सरहदें: भाग 2 – न्याय की हुंकार और खौफनाक खुलासे

अध्याय 1: गुरुद्वारे की शरण और कड़वी सच्चाई

कैलिफोर्निया के उस प्रसिद्ध गुरुद्वारा साहिब में रूपेंद्र अब सुरक्षित थी। संगत की सेवा और गुरबाणी के कीर्तन ने उसके जख्मी दिल पर मरहम का काम किया था। लेकिन सुकून की यह परत बहुत पतली थी। जैसे ही शाम ढली, रूपेंद्र के मन में पंजाब में बैठे अपने माता-पिता का चेहरा घूमने लगा।

उसे पता चला कि मामा हरभजन सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार तो किया है, लेकिन अमेरिका के कानून के मुताबिक उसे जल्द ही ‘बेल’ (जमानत) मिल सकती है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य और एक वरिष्ठ वकील, सरदार कुलदीप सिंह, रूपेंद्र से मिलने आए। कुलदीप सिंह ने उसकी डायरी और मामा के घर से लाए गए कुछ कागजात देखे।

कागजात देखते ही कुलदीप सिंह की भौहें तन गईं। उन्होंने गंभीर स्वर में कहा, “बेटी, यह मामला सिर्फ बाल कटवाने या मारपीट का नहीं है। यह उससे कहीं ज्यादा गहरा और खतरनाक है। तेरा मामा एक बहुत बड़े ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग’ (मानव तस्करी) रैकेट का हिस्सा है।”

अध्याय 2: पंजाब में दहशत का साया

जैसे ही यह खबर रूपेंद्र के गांव पहुंची कि हरभजन सिंह जेल में है, वहां का नजारा ही बदल गया। रूपेंद्र के पिता, जो कल तक अपनी बेटी के अमेरिका जाने की खुशी में सबको लड्डू बांट रहे थे, आज घर के अंदर दुबके हुए थे।

हरभजन के कुछ गुंडे, जो पंजाब में सक्रिय थे, आधी रात को रूपेंद्र के घर पहुंचे। उन्होंने घर के बाहर हवाई फायरिंग की और चिल्लाकर धमकी दी, “अगर तुम्हारी बेटी ने बयान वापस नहीं लिया और हरभजन के खिलाफ गवाही दी, तो तुम सबको जिंदा जला देंगे। जो जमीन गिरवी रखी है, उसके कागजात भी अब हमारे पास हैं।”

रूपेंद्र की मां ने रोते हुए उसे फोन किया। फोन पर मां की सिसकियां सुनकर रूपेंद्र का कलेजा कांप गया। एक तरफ उसके गुरु की मर्यादा थी और दूसरी तरफ उसके बूढ़े माता-पिता की जान। हरभजन ने जेल के अंदर से ही अपना जाल बुनना शुरू कर दिया था।

अध्याय 3: मामा का खौफनाक कबूलनामा और षड्यंत्र

तीन दिन बाद हरभजन को जमानत मिल गई। बाहर आते ही उसने अपनी चाल बदली। उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डाला जिसमें उसने खुद को निर्दोष बताया। उसने आरोप लगाया कि रूपेंद्र का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है और वह भारत से ही किसी ‘कट्टरपंथी’ समूह के प्रभाव में थी।

हरभजन ने दावा किया, “मैंने उसे सुधारने की कोशिश की, उसे मुख्यधारा (Modern world) से जोड़ना चाहा, लेकिन उसने मुझ पर झूठा इल्जाम लगा दिया।” अमेरिका में बैठे कुछ लोग, जो सच से अनजान थे, हरभजन की बातों में आने लगे। रूपेंद्र के लिए अब अपने धर्म की लाज बचाना और खुद को सही साबित करना एक बड़ी चुनौती बन गया।

लेकिन रूपेंद्र ने हार नहीं मानी। उसे मामा के स्टोर रूम से एक छोटी सी काली डायरी मिली थी, जिसे वह अपने साथ ले आई थी। उस डायरी में हरभजन ने उन दर्जनों लड़के-लड़कियों के नाम लिखे थे जिन्हें उसने पंजाब से बुलाया था और बाद में उन्हें मैक्सिको की सीमा पर बंधुआ मजदूर के तौर पर बेच दिया था।

अध्याय 4: अंधेरी रात और कातिलाना हमला

एक रात, जब रूपेंद्र गुरुद्वारा साहिब के पास बने एक सुरक्षित आवास (Safe House) में सो रही थी, अचानक खिड़की का कांच टूटने की आवाज आई। हरभजन के भेजे हुए दो नकाबपोश हमलावर अंदर घुस आए। उनका मकसद रूपेंद्र को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे अगवा करना और वह काली डायरी छीनना था।

रूपेंद्र की नींद खुल गई। हमलावरों ने उसके मुंह पर हाथ रखा, लेकिन रूपेंद्र के भीतर उस समय ‘चंडी’ की शक्ति जाग उठी। उसने अपनी छोटी कृपाण (जो उसकी रक्षा के लिए हमेशा उसके साथ थी) निकाली। यद्यपि वह किसी को चोट नहीं पहुंचाना चाहती थी, लेकिन आत्मरक्षा के लिए उसने वीरता दिखाई। शोर सुनकर सुरक्षा गार्ड दौड़कर आए। हमलावर तो भाग गए, लेकिन एक का फोन वहीं गिर गया।

उस फोन ने पुलिस को वह सबूत दे दिए जिसकी उन्हें तलाश थी। उस फोन में हरभजन और मैक्सिको के ड्रग माफिया के बीच की बातचीत के रिकॉर्ड्स थे।

अध्याय 5: अदालत का संग्राम—सच्चाई की जीत

मामला अब कैलिफोर्निया की ‘सुप्रीम कोर्ट’ तक पहुंच गया। एक तरफ हरभजन सिंह के महंगे वकील थे और दूसरी तरफ सच्चाई की ताकत लिए सरदार कुलदीप सिंह और रूपेंद्र।

अदालत में हरभजन के वकील ने रूपेंद्र की ‘दस्तार’ (पगड़ी) का मजाक उड़ाने की कोशिश की। उसने कहा, “एक 21 साल की लड़की इस आधुनिक युग में ऐसी पुरानी परंपराओं के पीछे पागल है, यह इसकी दिमागी हालत दर्शाता है।”

रूपेंद्र कटघरे में खड़ी हुई। उसकी आवाज में पंजाब के शेर जैसा दहाड़ था। उसने जज की आंखों में आंखें डालकर कहा:

“माय लॉर्ड, यह दस्तार कोई कपड़ा नहीं, मेरे गुरु का दिया हुआ ताज है। अगर अपनी पहचान बचाना पागलपन है, तो मैं पागल हूं। मेरे मामा ने मेरा विश्वास नहीं तोड़ा, उन्होंने उस रिश्ते का खून किया है जिसे ‘मां’ का दर्जा दिया जाता है। यह काली डायरी गवाह है कि कितने परिवारों के चिराग इन्होंने बुझा दिए हैं।”

जब जज ने काली डायरी के पन्ने पलटे, तो पूरी अदालत में सन्नाटा छा गया। उसमें उन लड़कियों की तस्वीरें भी थीं जिन्हें जबरन देह व्यापार में धकेला गया था। हरभजन का चेहरा पीला पड़ गया।

अध्याय 6: न्याय का प्रहार और एक नई सुबह

अदालत ने हरभजन सिंह को मानव तस्करी, अपहरण, और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का दोषी पाया। उसे 25 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई और उसकी सारी संपत्ति जब्त कर ली गई।

अमेरिका की सरकार ने रूपेंद्र के साहस को देखते हुए उसे ‘U-Visa’ (पीड़ितों के लिए विशेष वीजा) प्रदान किया। अब वह कानूनी तौर पर वहां रह सकती थी और काम कर सकती थी। लेकिन रूपेंद्र का काम अभी पूरा नहीं हुआ था।

उसने अपनी पहली कमाई से पंजाब में अपने पिता की गिरवी रखी हुई जमीन वापस छुड़वाई। उसने गांव के उन गुंडों को भी सलाखों के पीछे भिजवाया जिन्होंने उसके माता-पिता को डराया था।

अध्याय 7: ‘रक्षक’ संस्था की स्थापना

रूपेंद्र अब केवल एक पीड़ित लड़की नहीं थी। उसने अमेरिका में रहने वाले सिख समुदाय और अन्य मानवाधिकार संगठनों के साथ मिलकर ‘रक्षक’ नाम की एक संस्था बनाई। इस संस्था का काम उन युवाओं की मदद करना था जो विदेशों में आकर अपनों के ही धोखे का शिकार हो जाते हैं।

वह हर हफ्ते एयरपोर्ट जाती और वहां आने वाले नए भारतीय छात्र-छात्राओं को जागरूक करती। वह उन्हें बताती कि “विदेशों की चमक-धमक में अपनी जड़ों और अपनी सुरक्षा को कभी मत भूलना।”

अध्याय 8: संदेश—रिश्तों की नई परिभाषा

आज रूपेंद्र कैलिफोर्निया के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई कर रही है। वह आज भी अपनी दस्तार और सिखी स्वरूप में उतनी ही अडिग है। उसके माता-पिता अब गर्व से कहते हैं कि उनकी बेटी ने केवल उनका नाम ही नहीं, बल्कि पूरी कौम का सिर ऊंचा किया है।