Sambhal Hatyakand: संभल में हत्याकांड नीले ड्रम से भी खौफनाक

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सविता का संघर्ष

प्रारंभ

संबल के एक छोटे से मोहल्ले में, जहां हर कोई एक-दूसरे को जानता था, वहां की एक साधारण लड़की, सविता कुशवाहा, अपने परिवार   के साथ रहती थी। सविता हमेशा से पढ़ाई में प्रतिभाशाली रही थी। उसके माता-पिता ने उसे उच्च शिक्षा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया। लेकिन सविता का दिल किसी और में बस गया था। उसका प्रेमी, गौरव, उसके मोहल्ले का ही रहने वाला था। दोनों के बीच प्यार गहरा था, लेकिन यह प्यार एक दिन एक खतरनाक मोड़ लेने वाला था।

भागने का निर्णय

एक दिन, सविता और गौरव ने तय किया कि वे घर से भाग जाएंगे। सविता ने अपने माता-पिता को बिना बताए संजू के साथ भागने का निर्णय लिया। यह निर्णय उसके लिए आसान नहीं था, लेकिन प्यार की गर्मी ने उसे मजबूर कर दिया। उसने सोचा कि वह अपने परिवार को छोड़कर अपने प्रेमी के साथ एक नई जिंदगी शुरू कर सकती है।

जब उसके परिवार को पता चला कि सविता भाग गई है, तो वे बेताब हो गए। उन्होंने तुरंत पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। कुछ दिनों के बाद, पुलिस ने सविता को गौरव के साथ पकड़ लिया और थाने में बुलाया।

थाने में मुलाकात

जब सविता के माता-पिता थाने पहुंचे, तो उन्होंने अपनी बेटी को देखकर राहत की सांस ली। लेकिन सविता ने अपने माता-पिता से कहा कि वह घर नहीं लौटेगी। वह अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती थी। यह सुनकर उसके माता-पिता का गुस्सा और भी बढ़ गया।

“तुमने हमारे परिवार की इज्जत को गिरा दिया है!” उसके पिता ने गुस्से में कहा। सविता ने अपनी पसंद पर अडिग रहते हुए कहा, “मैं अपने जीवन का निर्णय खुद लूंगी। मैं गौरव के साथ रहना चाहती हूं।”

परिवार का निर्णय

सविता के माता-पिता ने उसे मरा हुआ मान लिया। उनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंची थी। उन्होंने तय किया कि अगर उनकी बेटी ने ऐसा किया है, तो वह उनके लिए मर चुकी है। परिवार ने एक शव यात्रा निकालने का निर्णय लिया।

सविता के पुतले को तैयार किया गया और पूरे मोहल्ले में शव यात्रा निकाली गई। रिश्तेदार, पड़ोसी और मोहल्ले के लोग इस शव यात्रा में शामिल हुए। सबने मिलकर अर्थी सजाई और श्मशान घाट तक ले गए। यह सब देखकर सविता के दिल में एक अजीब सा दर्द हुआ। वह अपने परिवार की भावनाओं को समझती थी, लेकिन वह अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती थी।

श्मशान घाट की यात्रा

श्मशान घाट पर पहुंचकर परिवार ने अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कीं। सविता अपने परिवार के साथ वहां खड़ी थी, लेकिन कोई उसे देख नहीं रहा था। उसकी आंखों में आंसू थे। उसने अपने परिवार को देखा, जो उसकी मौत का शोक मना रहा था।

“मैं जिंदा हूं!” वह चिल्लाना चाहती थी, लेकिन उसके गले से आवाज नहीं निकली। वह चाहती थी कि उसके परिवार को उसकी सच्चाई पता चले, लेकिन वह जानती थी कि इस समय उनकी सोच बदलना आसान नहीं होगा।

सविता का संघर्ष

सविता ने गौरव के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत की। लेकिन उसके मन में अपने परिवार की यादें हमेशा बनी रहीं। वह जानती थी कि उसने अपने परिवार को दुखी किया है। लेकिन उसने अपने प्यार को भी नहीं छोड़ा।

कुछ समय बाद, सविता ने अपने माता-पिता से मिलने का फैसला किया। उसने सोचा कि शायद अब वे उसे माफ कर देंगे। उसने गौरव से कहा, “मैं अपने परिवार से मिलना चाहती हूं। मुझे लगता है कि उन्हें मेरी जरूरत है।”

गौरव ने उसे समझाया, “लेकिन वे तुम्हें वापस घर नहीं आने देंगे। तुम क्या करोगी?”

सविता ने दृढ़ता से कहा, “मुझे अपने परिवार का सामना करना होगा। मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि मैं जिंदा हूं और खुश हूं।”

परिवार से मिलन

सविता अपने माता-पिता के घर गई। उसने दरवाजा खटखटाया। उसके माता-पिता ने दरवाजा खोला और उन्हें देखकर हैरान रह गए।

“सविता!” उसकी मां चिल्लाई। “तुम जिंदा हो?”

सविता ने कहा, “हाँ, माँ। मैं जिंदा हूं और खुश हूं। मैं गौरव के साथ रह रही हूं। मैं तुमसे माफी मांगती हूं। मैंने तुम्हें दुखी किया।”

उसके पिता ने कहा, “तुमने हमें धोखा दिया है। तुमने हमारे परिवार की इज्जत को गिरा दिया है।”

सविता ने कहा, “मैंने ऐसा नहीं किया। मैंने अपने लिए एक नया जीवन चुना है। कृपया मुझे माफ कर दो।”

निष्कर्ष

सविता के माता-पिता ने उसे माफ कर दिया, लेकिन उन्होंने उसे यह भी कहा कि उसे अपने परिवार की इज्जत का ध्यान रखना चाहिए। सविता ने समझा कि प्यार और परिवार दोनों महत्वपूर्ण हैं।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि कभी-कभी हमें अपने परिवार की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन प्यार भी एक महत्वपूर्ण भावना है। सविता ने अपने परिवार को माफ किया और एक नया जीवन शुरू किया।

यह कहानी एक संघर्ष और प्यार की है, जिसमें सविता ने अपने परिवार और प्रेम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की।