Student के Viral Video ने खोला कॉलेज का बड़ा राज़

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एक छात्रा की हिम्मत और एक कॉलेज का राज़

भाग 1: एक उम्मीद भरा भविष्य

यह कहानी एक ऐसी छात्रा की है, जिसका नाम कृति वर्मा है। कृति ग्रेटर नोएडा के विश्वेश्वरया ग्रुप ऑफ इंस्टीटशंस में बी.फार्मा की फाइनल ईयर की छात्रा है। उसने अपने भविष्य के सपनों को संजोया है, जिसमें डॉक्टर या फार्मासिस्ट बनने की चाह है। उसके माता-पिता ने उसे पढ़ाई के लिए शहर से दूर भेजा है, यह सोचकर कि उनकी बेटी एक सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ रही है। कृति मेहनती और समर्पित छात्रा है, जो अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर है।

एक दिन, कॉलेज में प्रैक्टिकल एग्जाम का दिन आता है। सभी छात्र तनाव में हैं, क्योंकि यह उनका अंतिम साल है और इस परीक्षा का परिणाम उनके करियर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कृति भी इसी तनाव में है, लेकिन उसे अपने ज्ञान और मेहनत पर विश्वास है। वह कॉलेज में पहुंचती है, जहां सभी छात्र अपनी फाइल्स और लैब कोट्स लेकर इधर-उधर भाग रहे हैं।

भाग 2: प्रैक्टिकल एग्जाम की घड़ी

प्रैक्टिकल एग्जाम का माहौल काफी तनावपूर्ण है। कृति अपनी बारी का इंतजार कर रही है, और जब उसका नंबर आता है, तो वह लैब के अंदर जाती है। वहां ललित राणा नाम का एक एक्सटर्नल प्रैक्टिकल एग्जामिनर मौजूद होता है। ललित राणा एक जाने-माने प्रोफेसर हैं, लेकिन छात्रों के बीच उनकी छवि अच्छी नहीं है। कृति को पता नहीं था कि उसे उस दिन एक भयानक अनुभव का सामना करना पड़ेगा।

जैसे ही प्रैक्टिकल शुरू होता है, कृति को महसूस होता है कि ललित राणा का व्यवहार सामान्य नहीं है। वह उसे असहज महसूस कराने की कोशिश करता है। कृति ने पहले ही अपने दोस्तों से ललित के बारे में सुन रखा था, लेकिन अब वह खुद उस स्थिति का सामना कर रही थी। कृति ने अपने वायरल वीडियो में जो आरोप लगाए, उनके अनुसार ललित ने अपनी सीमाएं लांघने की कोशिश की।

भाग 3: एक भयानक घटना

कृति ने विरोध किया और खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन ललित ने उसे धक्का दिया और उसके साथ बदसलूकी की। कृति का एक दोस्त, जो उसे बचाने आया, उसे भी बुरी तरह पीटा गया। उस दिन की घटना ने कृति को इतना डरा दिया कि उसने सोचा कि अब उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा है।

जब कृति और उसका घायल दोस्त प्रिंसिपल प्रदीप शर्मा के पास मदद मांगने पहुंचे, तो उन्हें अपेक्षा थी कि प्रिंसिपल उनकी बात सुनेंगे और कार्रवाई करेंगे। लेकिन प्रिंसिपल ने उल्टा उन्हें ही धमकाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने मुंह खोला, तो उनका करियर खत्म कर देंगे।

भाग 4: आवाज उठाने का फैसला

कृति ने चुप रहने का फैसला नहीं किया। उसने तय किया कि वह इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएगी। उसने अपना मोबाइल उठाया, कैमरा ऑन किया और अपनी कहानी दुनिया को बताने का फैसला किया। वह वीडियो जो आज हर जगह वायरल है, एक सबूत बन गया उस लाचारी और गुस्से का।

कृति ने वीडियो में कहा, “सर, मेरे साथ आज मेरे एक्सटर्नल प्रैक्टिकल में बहुत गलत हुआ है। ललित राणा ने मुझे फिजिकली हर्ट किया, गिरा हुआ व्यवहार किया। मुझे गिराने की कोशिश की।” उसने अपने घायल दोस्त के बारे में भी बताया कि कैसे उसे पीटा गया है।

भाग 5: वायरल वीडियो का असर

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड हुआ, यह आग की तरह फैल गया। छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप्स में, फेसबुक पर, इंस्टाग्राम पर हर जगह कृति का रोता हुआ चेहरा और उसकी चेतावनी गूंजने लगी। कॉलेज कैंपस में भूचाल आ गया। जो छात्र अब तक डरे हुए थे, कृति की हिम्मत देखकर वे भी बाहर निकल आए।

छात्रों ने नारे लगाना शुरू कर दिया, “हमें न्याय चाहिए। ललित राणा मुर्दाबाद। प्रिंसिपल को हटाओ।” यह आवाजें ग्रेटर नोएडा के आसमान में गूंजने लगीं। छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर था।

भाग 6: पुलिस का हस्तक्षेप

इस घटना की जानकारी पुलिस को हुई और दादरी कोतवाली पुलिस तुरंत हरकत में आई। पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाती हुई कॉलेज कैंपस में दाखिल हुईं। पुलिस ने प्रिंसिपल प्रदीप शर्मा को हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने ललित राणा और प्रदीप शर्मा के खिलाफ मारपीट और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

भाग 7: एफआईआर में अंतर

जब कृति और उसके साथी पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो उन्होंने अपनी एफआईआर दर्ज करवाई। लेकिन इसमें लिखी बातें वीडियो में कही गई बातों से थोड़ी अलग थीं। पुलिस का कहना था कि उन्हें जो लिखित शिकायत मिली है उसमें मारपीट का जिक्र है, लेकिन गंभीर दुराचार या छेड़खानी का जिक्र नहीं है।

यह सवाल खड़ा होता है कि ऐसा क्यों हुआ? क्या कृति ने समाज के डर से या किसी दबाव में आकर वह बातें लिखित में नहीं दीं? या फिर क्या यह हो सकता है कि गुस्से में आकर वीडियो में कुछ बातें बढ़ा-चढ़ाकर बोली गई?

भाग 8: छात्रों का प्रदर्शन जारी

कॉलेज के बाहर छात्रों का प्रदर्शन जारी था। वे मानने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि जब तक दोनों आरोपियों को जेल नहीं भेजा जाता और उन्हें कॉलेज से बर्खास्त नहीं किया जाता, वे हटने वाले नहीं हैं। छात्रों का आरोप था कि कॉलेज प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है।

भाग 9: एक बड़ा सवाल

इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हमारे शिक्षण संस्थानों में फैकल्टी की नियुक्ति करते वक्त उनके चरित्र की जांच नहीं होनी चाहिए? क्या छात्रों के लिए कोई ऐसा फोरम नहीं होना चाहिए जहां वे बिना डरे अपनी शिकायत दर्ज करा सकें?

भाग 10: कृति की हिम्मत

कृति ने आवाज उठाई तो आज पूरा कॉलेज उसके साथ खड़ा है। पुलिस हरकत में है और मीडिया इस खबर को दिखा रहा है। अगर वह उस दिन प्रिंसिपल की धमकी से डरकर चुपचाप घर चली जाती, तो शायद ललित राणा का शिकार कल कोई और लड़की बनती।

इस पूरी कहानी ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि हम किस तरह के समाज में जी रहे हैं। जहां एक गुरु शिष्य के रिश्ते को तार-तार कर दिया जाता है।

भाग 11: निष्कर्ष

इस मामले में आगे क्या होता है, यह समय बताएगा। लेकिन एक बात तय है कि इस घटना ने ग्रेटर नोएडा के कॉलेज की साख पर जो बट्टा लगाया है, उसे मिटने में बहुत वक्त लगेगा।

इस कहानी ने हमें यह भी सिखाया है कि अगर आपके साथ कुछ गलत हो रहा है, तो चुप मत रहिए। अन्याय सहना अन्याय करने से भी बड़ा अपराध है।

भाग 12: अंत

कृति वर्मा की हिम्मत की दाद देनी होगी कि उसने चुप रहने के बजाय बोलने का रास्ता चुना। उसने अपने करियर की परवाह किए बिना उन ताकतवर लोगों से पंगा लिया जो उसकी जिंदगी बर्बाद करने की धमकी दे रहे थे।

इस कहानी ने हमें यह भी याद दिलाया है कि यदि हम एकजुट हों, तो हम किसी भी अन्याय का सामना कर सकते हैं। इसलिए, हमें हमेशा सच के साथ खड़ा होना चाहिए और अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

संदेश:

इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि कभी भी किसी भी तरह के अन्याय के खिलाफ चुप नहीं रहना चाहिए। अगर हम सब मिलकर आवाज उठाएंगे, तो समाज में बदलाव लाने में सफल हो सकते हैं।

जय हिंद!