दादा ने सगी पोती के साथ खेत में कर दिया कारनामा/लेकिन अंजाम ठीक नहीं हुआ/

मर्यादा की बलि और प्रतिशोध की आग: मेरठ की एक सत्य घटना
अध्याय 1: पंचली गाँव की सादगी और रोहतास का स्वभाव
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक छोटा सा गांव है—पंचली। इस गांव की गलियों में वैसी ही हलचल होती थी जैसी किसी भी आम भारतीय गांव में होती है। इसी गांव के एक कोने में रहता था रोहतास सिंह। रोहतास के पास दो एकड़ जमीन थी, लेकिन खेती से इतनी आय नहीं होती थी कि घर का खर्च आराम से चल सके।
गुजर-बसर के लिए रोहतास ने दो-तीन पशु पाल रखे थे। वह सुबह दूध बेचता और दिन में कभी-कभी मजदूरी भी कर लिया करता था। हालांकि, रोहतास के स्वभाव में एक बड़ी बुराई थी। वह अपनी मेहनत की कमाई को गलत आदतों और बुरी सोहबत में उड़ा दिया करता था। गांव के लोग उसे एक साधारण बुजुर्ग समझते थे, लेकिन उसके भीतर जो अंधकार पनप रहा था, उससे हर कोई अनजान था।
रोहतास के परिवार में उसकी बहू नैना देवी और उसकी पोती सपना रहती थी। नैना के पति का देहांत हो चुका था, इसलिए वह अपने ससुर के साथ ही रहती थी। सपना ने दसवीं तक पढ़ाई की थी, लेकिन आर्थिक तंगी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उसने आगे की पढ़ाई छोड़ दी और अपनी मां के साथ घर और खेत के काम में हाथ बंटाने लगी।
अध्याय 2: अभाव, कर्ज और सरपंच की बुरी नजर
10 दिसंबर 2025 का दिन था। नैना ने सपना से कहा, “बेटी, घर का राशन खत्म हो गया है, कुछ सामान ले आओ।” सपना जब दुकान पर गई, तो उसने देखा कि गांव में केवल कुछ ही दुकानें हैं। उसने आकर अपनी मां को सुझाव दिया, “मां, तुम पढ़ी-लिखी हो, क्यों न हम खुद की एक किराने की दुकान खोल लें?”
नैना को विचार पसंद आया, लेकिन समस्या थी पैसों की। उन्होंने रोहतास से बात की। रोहतास के पास केवल एक लाख रुपये थे, जबकि दुकान के लिए कम से कम तीन लाख की जरूरत थी। रोहतास ने कहा, “गांव का सरपंच सेवक राम ब्याज पर पैसे देता है, मैं उससे बात करता हूं।”
जब रोहतास सेवक राम के पास गया, तो सरपंच ने सीधे उसे पैसे देने से मना कर दिया और कहा, “अपनी बहू को भेजो, मैं हिसाब-किताब उसी से समझूंगा।”
नैना जब सरपंच के पास पहुंची, तो सेवक राम की नीयत डगमगा गई। उसने नैना की मजबूरी का फायदा उठाना चाहा। उसने कहा, “मैं तुम्हें तीन लाख रुपये दे दूंगा और ब्याज भी नहीं लूंगा, लेकिन तुम्हें इसके बदले मेरी अनैतिक शर्तों को मानना होगा।” नैना, जो अपने परिवार को गरीबी से निकालना चाहती थी, एक गलत रास्ते पर चल पड़ी। उसने सरपंच की शर्त मान ली और उसे अगले दिन खेत पर बुलाया।
अध्याय 3: घर के भीतर का विश्वासघात
अगले दिन खेत के सन्नाटे में नैना और सरपंच के बीच एक गलत समझौता हुआ। नैना को पैसे मिल गए, लेकिन उसकी मर्यादा का सौदा हो चुका था। जब वह पैसे लेकर घर लौटी, तो उसने रोहतास को बताया कि सरपंच ने कर्ज दे दिया है।
लेकिन अब रोहतास के मन में भी खोट आ गया था। उसे लगा कि जब सरपंच फायदा उठा सकता है, तो वह क्यों नहीं? उसने अपनी बहू को बाकी के पैसे देने के बदले वही अनैतिक मांग रख दी जो सरपंच ने रखी थी। नैना दंग रह गई। उसने कहा, “पिताजी, आप मेरे पिता समान हैं, यह आप क्या कह रहे हैं?”
परंतु रोहतास जिद पर अड़ा था। नैना ने सोचा कि जब बाहर वाले के साथ मर्यादा टूट ही चुकी है, तो घर की बात घर में ही दफन रहे। उसने रोहतास की बात मान ली। इस तरह, उस घर की पवित्रता पूरी तरह नष्ट हो गई। रोहतास ने पैसे दिए और गांव में दुकान खुल गई।
अध्याय 4: मासूमियत पर प्रहार
दुकान अच्छी चलने लगी थी। नैना सुबह जल्दी दुकान चली जाती और रात को लौटती। इधर रोहतास और सपना खेत का काम संभालते थे। रोहतास का जमीर अब पूरी तरह मर चुका था। उसे अब अपनी पोती सपना पर भी बुरी नजर डालने में शर्म नहीं आ रही थी।
25 दिसंबर 2025 को, जब नैना दुकान पर थी, रोहतास ने शराब पी और सपना को लेकर खेत पर गया। वहां सन्नाटा पाकर उसने अपनी ही पोती के साथ जबरदस्ती की और उसे धमकी दी, “अगर तुमने किसी को बताया, तो मैं तुम्हें और तुम्हारी मां को जान से मार दूंगा।” सपना बुरी तरह डर गई। उसने अपनी मां को कुछ नहीं बताया, यह सोचकर कि उसकी मां की जान को खतरा हो सकता है। रोहतास लगातार कई दिनों तक सपना का शोषण करता रहा।
अध्याय 5: सच का सामना और भयानक प्रतिशोध
28 जनवरी 2026 की सुबह सपना की तबीयत खराब हुई। वह बेहोश होने लगी। नैना उसे डॉक्टर के पास ले गई। जब डॉक्टर ने बताया कि सपना गर्भवती है, तो नैना के पैरों तले जमीन खिसक गई।
घर आकर जब नैना ने सपना पर दबाव डाला, तो सपना ने रोते हुए सारा सच उगल दिया। उसने कहा, “मां, वह दादा नहीं, राक्षस है। उसने मेरा जीवन बर्बाद कर दिया और उसने तुम्हारे साथ भी वही किया।”
नैना को जब अहसास हुआ कि उसके ससुर ने न केवल उसके साथ, बल्कि उसकी मासूम बेटी के साथ भी जघन्य अपराध किया है, तो उसका खून खौल उठा। उसने उसी वक्त फैसला किया कि अब वह न्याय के लिए कानून का इंतजार नहीं करेगी।
उस रात 9:30 बजे, रोहतास शराब के नशे में धुत होकर लौटा और सो गया। रात के करीब 10:30 बजे, नैना और सपना रसोई से चाकू लेकर उसके कमरे में दाखिल हुईं। सपना ने गुस्से में चाकू से वार किए और नैना ने अपने अपमान और बेटी की तबाही का बदला लेने के लिए रोहतास का अंत कर दिया।
अध्याय 6: आत्मसमर्पण और न्याय की प्रतीक्षा
वारदात को अंजाम देने के बाद, दोनों घबराई नहीं। रात के करीब 12:30 बजे, मां और बेटी पैदल चलकर नजदीकी पुलिस स्टेशन पहुंचीं। उन्होंने दरोगा के सामने अपना अपराध कबूल किया और रोहतास के घिनौने कृत्यों की पूरी जानकारी दी।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया। नैना और सपना को गिरफ्तार कर लिया गया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। गांव में इस घटना से सनसनी फैल गई। कोई नैना और सपना के कदम को सही बता रहा था, तो कोई कानून को हाथ में लेने के खिलाफ था।
यह घटना आज भी समाज के सामने कई सवाल छोड़ जाती है। क्या नैना का प्रारंभिक समझौता गलत था? क्या समाज में महिलाओं की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या उस स्थिति में नैना और सपना के पास कोई और रास्ता बचा था?
निष्कर्ष: यह कहानी एक चेतावनी है कि जब घर के संरक्षक ही भक्षक बन जाएं और मर्यादाएं तार-तार हो जाएं, तो समाज में ऐसी ही हिंसक घटनाएं जन्म लेती हैं।
समाप्त
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