400 KG Gold Stolen: 400 किलो सोना गायब 180 करोड रुपए की लूट! | मछलियों के बिल से बदला!

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400 किलो सोने की लूट — मास्टरमाइंड का जाल

1. प्रस्तावना

साल 2023 की गर्मियों की एक शाम थी। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हलचल हमेशा की तरह थी, लेकिन उस दिन कुछ अलग था। एयरपोर्ट की सुरक्षा टीम, कस्टम अधिकारी और इंटेलिजेंस एजेंसियां सब कुछ सामान्य मान रही थीं, परंतु एक ऐसी घटना होने वाली थी, जो भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के मीडिया की सुर्खियाँ बन जाएगी।

2. सोने की खेप

स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख से एक विशेष कार्गो फ्लाइट दिल्ली पहुँची थी। इसमें 400 किलो शुद्ध 24 कैरेट सोना और 20 करोड़ रुपये कैश था। यह सोना भारत के सबसे बड़े ज्वेलर्स संघ के लिए था, जिसे पहले टीडी बैंक की तिजोरी में जमा होना था, फिर वहाँ से अलग-अलग ज्वेलर्स को वितरित किया जाना था।

कैश को वेंकोर बुलियन एंड करेंसी एक्सचेंज में जमा किया जाना था। सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ, कस्टम, और बैंक के गार्ड्स तैनात थे। सब कुछ प्लान के अनुसार चल रहा था, लेकिन किसी को पता नहीं था कि एक मास्टरमाइंड, अर्जुन मेहरा, पिछले छह महीने से इस ऑपरेशन की प्लानिंग कर रहा था।

3. अर्जुन मेहरा — मास्टरमाइंड

अर्जुन मेहरा एक पढ़ा-लिखा, तेज-तर्रार और तकनीक में माहिर युवक था। उसकी जिंदगी में कभी गरीबी थी, लेकिन उसकी महत्वाकांक्षा बहुत बड़ी थी। उसे हमेशा लगता था कि दुनिया में पैसा ही सब कुछ है। उसने कई साल कनाडा, दुबई और सिंगापुर में छोटे-मोटे काम किए, लेकिन अपराध की दुनिया ने उसे आकर्षित किया।

अर्जुन ने एयरपोर्ट के अंदर और बाहर दोनों तरफ अपने आदमी फिट कर दिए थे। एयरपोर्ट के कार्गो विभाग में काम करने वाला उसका बचपन का दोस्त, सिमरन, उसकी सबसे बड़ी ताकत था। अर्जुन ने पूरी योजना बनाई — कब फ्लाइट आएगी, किस गेट से सोना बाहर निकलेगा, किस ट्रक में लोड होगा, कौन सा बिल लगेगा, किस वक्त सिक्योरिटी सबसे कम होगी, सब कुछ।

4. लूट की रात

17 अप्रैल 2023, रात के 7:00 बजे। कार्गो शेड में सोना और कैश सुरक्षित रखा गया था। उसी वक्त एक सफेद रंग का ट्रक, जिस पर ‘सी-फूड सप्लाई’ लिखा था, एयरपोर्ट के गेट पर पहुँचा। ड्राइवर ने एक एयरवे बिल दिखाया — ये बिल मछलियों के कार्गो का था, जो एक दिन पहले निकल चुका था।

अंदर से सिमरन ने कंप्यूटर सिस्टम में बिल बदल दिया। सीसीटीवी कैमरों के सामने सब कुछ सामान्य लग रहा था। ट्रक अंदर गया, सोना और कैश लोड किया गया। महज 23 मिनट में पूरा माल ट्रक में था। तीन मिनट में ट्रक बाहर निकल गया। असली ट्रक जब रात 9:00 बजे पहुँचा, तो वहाँ कुछ भी नहीं था — भंडारा खत्म हो चुका था।

5. पुलिस की हलचल

रात 2:23 बजे एयरपोर्ट अधिकारियों ने पुलिस को सूचना दी। दिल्ली पुलिस, सीआईएसएफ और इंटेलिजेंस एजेंसियाँ हरकत में आ गईं। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, लेकिन ट्रक के नंबर प्लेट फर्जी थे। ट्रक का ड्राइवर नकली पहचान के साथ आया था। एयरपोर्ट के अंदर काम करने वाले कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

कुछ ही घंटों में यह खबर देशभर में फैल गई। मीडिया ने इसे “भारत की सबसे बड़ी लूट” करार दिया। सोशल मीडिया पर #GoldHeist ट्रेंड करने लगा।

6. अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

जाँच में पता चला कि ट्रक दिल्ली से निकलकर हरियाणा, फिर पंजाब और वहाँ से नेपाल बॉर्डर की ओर गया था। पुलिस को शक हुआ कि लूट का मास्टरमाइंड भारत में नहीं, बल्कि कनाडा में बैठा है। इंटरपोल को अलर्ट किया गया। पता चला कि अर्जुन मेहरा पिछले दो साल से कनाडा में था और वहीं से ऑपरेशन चला रहा था।

कनाडा पुलिस ने भारतीय एजेंसियों के साथ मिलकर ऑपरेशन शुरू किया। अर्जुन के नेटवर्क में अमेरिका, दुबई और सिंगापुर के अपराधी भी थे। चोरी का सोना छोटे-छोटे हिस्सों में पिघला दिया गया था, उससे ज्वेलरी बनाई गई और अलग-अलग देशों में भेजी गई।

7. मास्टरमाइंड की तलाश

इधर भारत में दिल्ली पुलिस की एक स्पेशल टीम बनी, जिसमें आईपीएस अधिकारी आयुष शर्मा को लीडर बनाया गया। आयुष तेज, ईमानदार और टेक्नोलॉजी में माहिर थे। उन्होंने सबसे पहले एयरपोर्ट के सभी कर्मचारियों की कॉल डिटेल्स निकालीं। सिमरन का नाम बार-बार सामने आया। उसके बैंक खातों में अचानक लाखों रुपये आए थे। सिमरन फरार था, लेकिन उसकी गर्लफ्रेंड सोशल मीडिया पर एक्टिव थी।

आयुष ने उसकी लोकेशन ट्रैक की — चंडीगढ़ के एक फ्लैट में सिमरन छिपा था। पुलिस ने छापा मारा, सिमरन पकड़ा गया। पूछताछ में उसने अर्जुन मेहरा का नाम उगल दिया।

8. अर्जुन का जाल

अर्जुन को पकड़ना आसान नहीं था। वह कनाडा में था, लेकिन उसने अपने सारे डिजिटल फुटप्रिंट मिटा दिए थे। आयुष ने इंटरपोल के जरिए अर्जुन की माँ, बहन और दोस्तों की निगरानी शुरू की। अर्जुन अपनी माँ से बहुत प्यार करता था। पुलिस ने उसकी माँ को सुरक्षा के नाम पर दिल्ली बुला लिया।

अर्जुन को जब पता चला कि उसकी माँ बीमार है, तो उसने एक वीडियो कॉल की। पुलिस ने उस कॉल को ट्रेस किया — अर्जुन टोरंटो के एक होटल से कॉल कर रहा था। कनाडा पुलिस ने होटल घेर लिया और अर्जुन को गिरफ्तार कर लिया।

9. सोने की बरामदगी और न्याय

अर्जुन और उसके गैंग के आठ लोग पकड़े गए। दो अभी भी फरार थे। पुलिस ने छापेमारी कर 80 किलो सोना बरामद किया। बाकी सोना पिघला कर ज्वेलरी के रूप में बिक चुका था। अर्जुन ने कबूल किया कि लूट के पैसे से अमेरिका से हथियार मंगवाए गए थे, जो कनाडा के गैंगस्टरों को सप्लाई किए गए।

कोर्ट में केस चला। अर्जुन और उसके गैंग को उम्रकैद की सजा मिली। एयरपोर्ट के कई कर्मचारियों की नौकरी चली गई। सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया।

10. समाज को संदेश

आयुष शर्मा ने मीडिया से कहा, “क्राइम चाहे कितना भी हाई-टेक हो जाए, कानून से बड़ा कोई नहीं। ईमानदारी और टेक्नोलॉजी के जरिए हर अपराधी पकड़ा जा सकता है।”

इस केस के बाद देशभर के एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम और मजबूत कर दिए गए। आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

11. उपसंहार

अर्जुन मेहरा जेल में था, लेकिन एक दिन उसने जेलर से कहा, “मैंने सब कुछ पा लिया, लेकिन शांति खो दी। पैसा सब कुछ नहीं होता।”

आयुष शर्मा को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। उनकी टीम ने साबित कर दिया कि सच्ची लगन, मेहनत और तकनीक के इस्तेमाल से कोई भी केस सुलझाया जा सकता है।

कहानी का संदेश:
अपराध चाहे कितना भी बड़ा हो, उसका अंत हमेशा न्याय के साथ होता है। लालच, धोखा और अपराध की दुनिया में कोई भी जीत स्थायी नहीं होती। ईमानदारी, मेहनत और कानून का रास्ता ही सच्चा रास्ता है।