26 Dec से 10 Jan तक की NEET स्टूडेंट की पूरी कहानी, जांच से जुड़े एक Police अफ़सर ने बताया

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एक खौ़फनाक सच

पटना, बिहार में एक साधारण परिवार की बेटी रूपेंद्र कौर, जो एक अमृतधारी सिख लड़की थी, अपने जीवन के सबसे अहम मोड़ पर खड़ी थी। वह 2023 में पहली बार पटना आई थी, और उस समय के बाद उसने मेडिकल की तैयारी शुरू की थी। उसकी इच्छा थी कि वह डॉक्टर बने और समाज में एक बड़ा नाम कमाए। अपने माता-पिता की तरह, जो हमेशा सिख धर्म और अपने संस्कारों का पालन करते थे, रूपेंद्र ने भी अपनी सिखी का पालन करना शुरू किया था।

रूपेंद्र ने जो कोचिंग सेंटर जॉइन किया था, वहां उसे एक हॉस्टल में रहने की सलाह दी गई थी, क्योंकि वह एक नए शहर में अकेली थी। शंभू गर्ल्स हॉस्टल में उसे एक छोटी सी जगह मिली थी, जहां वह अपनी पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करती थी। 26 दिसंबर 2023 को उसने घर जाने का मन बनाया, क्योंकि कोचिंग बंद था। उसके माता-पिता ने उसे स्कॉर्पियो कार में बैठाकर गांव भेजा, लेकिन जब वह वहां पहुंची तो उसे न सिर्फ अपने परिवार से दूर, बल्कि खुद को एक नई जिंदगी में फंसा हुआ पाया।

वह 5 जनवरी 2024 को जब वापस पटना लौटी, तो उसका हाल अलग था। अब वह पहले जैसी खुश और संतुष्ट नहीं थी। हॉस्टल में उसे एक असमंजस और डर का सामना करना पड़ा। जब उसे हॉस्टल में वापस लाया गया, तो सब कुछ सामान्य नहीं था। 6 जनवरी को उसे बेहोश पाया गया, और उसके बाद से पुलिस की जांच शुरू हुई।

बिहार पुलिस की शुरुआती जांच से यह पता चला कि रूपेंद्र ने 26 दिसंबर को मेडिकल स्टोर से नींद की गोलियां खरीदी थीं। उसने अपने पिता के लिए नींद की दवाइयाँ खरीदी थीं, लेकिन इस बार उसने ज्यादा दवाइयाँ खरीदी थी। इसका एक कनेक्शन उसकी मानसिक स्थिति से जुड़ा था, क्योंकि उसके पिता नींद की गोलियाँ लेते थे और वह भी डिप्रेशन के कारण उन दवाओं का इस्तेमाल कर रही थी।

इसी दौरान, हॉस्टल में एक घटना हुई जो सभी के लिए चौंकाने वाली थी। रूपेंद्र के कमरे में उसने सर्च की थी और इंटरनेट पर साइनाइड से लेकर पैरासिटामॉल जैसी दवाइयाँ भी खोजी थीं। यह सब देखकर पुलिस ने अंदाजा लगाया कि वह अपनी जान लेने की कोशिश कर रही थी। हालांकि, पुलिस की जांच में कई सारे सवाल थे जो अभी तक हल नहीं हुए थे। सबसे बड़ा सवाल यह था कि रूपेंद्र के शरीर पर मिले जख्म किसके थे और क्यों उसे इस तरह की स्थिति में डाला गया?

पुलिस के अनुसार, जब 5 जनवरी को रूपेंद्र पटना लौटी तो वह अकेले ट्रेन से आई थी और हॉस्टल पहुंचने के बाद भी उसका व्यवहार सामान्य नहीं था। उसे दिन में सिर्फ पानी के लिए कमरे से बाहर निकलते हुए देखा गया था और इसके बाद वह कमरे में बंद हो गई। जब हॉस्टल के स्टाफ ने उसका दरवाजा खटखटाया, तो कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद गार्ड को बुलाया गया और दरवाजा खोला गया, जहां रूपेंद्र बेहोश पाई गई। उसे तुरंत अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी हालत गंभीर थी।

पुलिस के अनुसार, इसके बाद जब रूपेंद्र के पिता और परिवार को सूचना दी गई, तो उन्होंने पुलिस से मामले को न सुलझाने की गुजारिश की। लेकिन अस्पताल ने मामला पुलिस के पास भेजा और पुलिस ने पूरी जांच शुरू की। लेकिन इस पूरे मामले में कुछ घटनाएँ ऐसी थीं जिनसे पुलिस को शक हुआ कि कहीं कुछ तो गलत है।

जांच के दौरान, पुलिस को पता चला कि रूपेंद्र के कमरे से नींद की गोलियाँ मिली थीं और उसकी डायरी में कुछ पंक्तियाँ लिखी थीं, जिनसे उसकी मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता था। डायरी में लिखा था कि वह अपने माता-पिता को धोखा दे रही है और वह खुद को एक जिम्मेदार बेटी नहीं मानती है। इसके अलावा, पुलिस को यह भी पता चला कि रूपेंद्र ने इंटरनेट पर सर्च किया था कि किस तरह की दवाइयाँ उसकी स्थिति के लिए ठीक हो सकती हैं।

इसके बाद, अस्पताल में रूपेंद्र की हालत और जांच की गई, तो फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि उसके शरीर पर जख्म थे जो रेप की कोशिश को दर्शाते थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उसके कपड़ों पर जो निशान थे, वह किसी पुरुष के थे। यह सवाल उठता है कि अगर 5 से 6 जनवरी तक इस हॉस्टल में कोई पुरुष प्रवेश नहीं किया था, तो यह निशान किसके थे?

अब पुलिस के सामने यह मामला बहुत जटिल हो गया था। पुलिस ने यह भी जांच की कि लड़की के साथ क्या हुआ था, लेकिन जवाब नहीं मिल रहे थे। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट्स में कई असमानताएँ थीं, जिनसे यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या रूपेंद्र के साथ छेड़छाड़ की गई थी या फिर उसे किसी और ने फंसाया था।

यह कहानी उस जटिल मामले की है, जहां पुलिस की जांच के बावजूद बहुत सारे सवाल बाकी रह गए हैं। रूपेंद्र का क्या हुआ, यह सवाल आज भी अनसुलझा है। क्या वह किसी मानसिक दबाव या परिस्थितियों के कारण आत्महत्या करने की कोशिश कर रही थी या उसे किसी ने नुकसान पहुँचाया है? यही वह सवाल हैं, जिनका जवाब पुलिस को अब तक नहीं मिला है।

समाप्त!