देवर और भाभी दोनों के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/

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कानपुर का दोहरा हत्याकांड: अवैध रिश्तों, शक और गुस्से ने कैसे उजाड़ दिया एक पूरा परिवार

कानपुर, उत्तर प्रदेश — उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के एक छोटे से गांव सलेमपुर में दिसंबर 2025 में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। यह मामला केवल एक साधारण घरेलू विवाद का नहीं था, बल्कि इसमें अवैध संबंधों, आर्थिक तंगी, पारिवारिक तनाव और अचानक भड़क उठे गुस्से का ऐसा विस्फोट हुआ जिसने एक ही परिवार के दो लोगों की जान ले ली।

इस घटना में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और अपने ही छोटे भाई की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो घर के अंदर का दृश्य इतना भयावह था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति स्तब्ध रह गया। बाद में पुलिस की जांच में जो कहानी सामने आई, उसने पूरे गांव को हिला कर रख दिया।


सलेमपुर गांव का साधारण परिवार

सलेमपुर गांव में रहने वाला सुशील कुमार एक मजदूर था। वह गांव से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित एक कारखाने में काम करता था। मेहनत करने के बावजूद उसकी जिंदगी स्थिर नहीं थी, क्योंकि उसकी सबसे बड़ी कमजोरी शराब थी।

महीने भर की कमाई का बड़ा हिस्सा वह शराब और दोस्तों के साथ मौज-मस्ती में खर्च कर देता था। परिणाम यह हुआ कि उसके घर की आर्थिक स्थिति अक्सर खराब बनी रहती थी।

सुशील के परिवार में उसकी पत्नी अक्षरा देवी और उसका छोटा भाई गौरव भी रहते थे। गौरव एक फैक्ट्री में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करता था और उसे हर महीने लगभग 16 हजार रुपये वेतन मिलता था।

गौरव अपने बड़े भाई की आदतों से परिचित था। इसलिए वह अक्सर अपनी भाभी अक्षरा को कुछ पैसे दे देता था ताकि घर का खर्च किसी तरह चलता रहे।

अक्षरा देवी मेहनती महिला थी। वह घर के काम करने के साथ-साथ घर में पाले गए पशुओं की देखभाल भी करती थी। रोज सुबह वह खेतों में जाकर पशुओं के लिए चारा काटकर लाती थी। चूंकि उनके पास अपना खेत नहीं था, इसलिए वह आसपास के जमींदारों के खेतों से चारा काटती थी।

लेकिन इस साधारण दिखने वाले परिवार के भीतर धीरे-धीरे एक ऐसा जाल बन रहा था, जिसका अंत बेहद भयावह होने वाला था।


जमींदार कदम सिंह से मुलाकात

एक दिन, जब अक्षरा देवी खेत में चारा काट रही थी, तभी गांव का एक जमींदार कदम सिंह वहां पहुंच गया। उसने देखा कि एक महिला उसके खेत से चारा काट रही है।

पहले तो वह नाराज हुआ, लेकिन जब उसने पास जाकर देखा कि वह अक्षरा देवी है, तो उसकी सोच बदल गई। गांव में उसकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में थी जो महिलाओं में खास दिलचस्पी रखता था।

उसने अक्षरा से बातचीत शुरू की और कुछ ही देर में बातचीत का स्वर बदल गया। अक्षरा देवी ने भी खुलकर जवाब दिया और जल्द ही दोनों के बीच ऐसा रिश्ता बन गया जो समाज की नजर में गलत माना जाता है।

कदम सिंह ने उसे पैसे भी दिए और कहा कि वह जब चाहे उसके खेत से मुफ्त में चारा ले सकती है। इसके बाद दोनों के बीच गुप्त मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया।

हर दूसरे-तीसरे दिन अक्षरा देवी खेतों में जाती और वहां दोनों मिलते। धीरे-धीरे यह संबंध गहरा होता चला गया।


गांव में फैलने लगी चर्चाएं

कुछ समय बाद कदम सिंह की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि वह अक्षरा देवी के घर आने लगा। गांव छोटा था, इसलिए लोगों की नजरों से कुछ भी छिपना मुश्किल था।

एक पड़ोसी कमल सिंह ने कई बार कदम सिंह को उस घर में आते-जाते देखा। उसे शक हुआ कि कुछ गलत चल रहा है। आखिरकार उसने यह बात गौरव को बताने का फैसला किया।

एक शाम उसने गौरव से कहा कि उसकी भाभी के घर पर कदम सिंह अक्सर आता है।

यह सुनकर गौरव का गुस्सा भड़क उठा। उसी रात उसने अपनी भाभी से इस बारे में सवाल किया।

अक्षरा देवी ने डरने के बजाय साफ-साफ कहा कि उसका पति शराबी है और न तो उसे प्यार देता है और न ही आर्थिक सहारा। उसने कहा कि उसकी जरूरतें पूरी नहीं होतीं।

गौरव को यह सुनकर बहुत गुस्सा आया। उसने चेतावनी दी कि अगर कदम सिंह दोबारा घर आया तो वह उसे मार डालेगा।

लेकिन इस बातचीत का एक दूसरा मोड़ भी था।


देवर और भाभी के बीच भी बना संबंध

उस रात की बातचीत के बाद गौरव और अक्षरा देवी के बीच संबंध बदलने लगे। गौरव ने कहा कि वह उसकी आर्थिक और अन्य जरूरतों का ख्याल रखेगा।

कुछ ही दिनों में दोनों के बीच भी अवैध संबंध बन गए।

वे अक्सर खेतों में मिलने लगे। जब भी मौका मिलता, दोनों अकेले समय बिताते। गौरव कभी-कभी उसे पैसे भी देता था।

इस तरह अक्षरा देवी का जीवन एक ऐसे चक्र में फंस चुका था जिसमें तीन अलग-अलग पुरुष शामिल थे।

लेकिन घटनाओं की यह कड़ी यहीं नहीं रुकी।


मोबाइल दुकान का युवक भी बना हिस्सा

22 दिसंबर 2025 को अक्षरा देवी का मोबाइल फोन पानी में गिरकर खराब हो गया। वह उसे ठीक करवाने के लिए गांव की एक मोबाइल दुकान पर गई।

दुकान चलाने वाला युवक जतिन था।

जतिन ने बताया कि फोन ठीक करने में करीब दो हजार रुपये लगेंगे। अक्षरा देवी ने कहा कि उसके पास अभी पैसे नहीं हैं और वह बाद में दे देगी।

जतिन ने इसका फायदा उठाने की कोशिश की और कहा कि पैसे की जरूरत नहीं, लेकिन बदले में वह कुछ और चाहता है।

अक्षरा देवी ने उसे अपने घर आने का इशारा दे दिया।

कुछ देर बाद जतिन फोन ठीक करके उसके घर पहुंच गया। घर में कोई नहीं था। दोनों कमरे में चले गए और उनके बीच भी संबंध बन गए।

लेकिन उसी समय अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई।


देवर ने देख लिया सब कुछ

दरवाजा खोलने पर सामने गौरव खड़ा था।

जब वह कमरे में गया तो उसने जतिन को आपत्तिजनक हालत में देख लिया। यह देखकर वह बुरी तरह गुस्से में आ गया।

उसने जतिन की पिटाई शुरू कर दी, लेकिन जतिन किसी तरह भाग निकला।

इसके बाद गौरव का गुस्सा अक्षरा देवी पर फूट पड़ा। उसे लगा कि वह कई पुरुषों के साथ संबंध बना रही है।

गुस्से में उसने घर का दरवाजा बंद किया, अक्षरा देवी को रस्सी से बांध दिया और उसके साथ जबरदस्ती करने लगा।

उसे यह अंदाजा नहीं था कि इसी दौरान उसका बड़ा भाई घर लौटने वाला है।


पति की अचानक वापसी

कुछ देर बाद सुशील कुमार घर पहुंचा।

दरवाजा अंदर से बंद था। उसने कई बार आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। गुस्से में उसने दरवाजा तोड़ दिया।

जैसे ही वह कमरे में पहुंचा, सामने का दृश्य देखकर उसका दिमाग सुन्न हो गया।

उसने देखा कि उसका भाई गौरव उसकी पत्नी के साथ जबरदस्ती कर रहा था और उसकी पत्नी के हाथ-पैर बंधे हुए थे।

यह दृश्य देखकर सुशील का गुस्सा बेकाबू हो गया।


कुल्हाड़ी से किया हमला

घर के अंदर रखी एक कुल्हाड़ी उठाकर उसने पहले अपने भाई गौरव के सिर पर वार कर दिया।

गौरव जमीन पर गिर पड़ा और उसके सिर से खून बहने लगा। मरने से पहले उसने सुशील को बताया कि उसकी पत्नी कई पुरुषों के साथ संबंध रखती थी।

लेकिन उस समय सुशील के दिमाग पर गुस्सा पूरी तरह हावी था।

उसने कुल्हाड़ी से कई वार किए और गौरव की मौके पर ही मौत हो गई।

इसके बाद वह अपनी पत्नी अक्षरा देवी की तरफ बढ़ा और उस पर भी हमला कर दिया।


पड़ोसियों ने सुनी चीखें

अक्षरा देवी की चीखें सुनकर पड़ोसी घर के बाहर इकट्ठा हो गए।

जब उन्होंने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कमरे में दो लाशें पड़ी थीं — गौरव और अक्षरा देवी।

पड़ोसियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।


पुलिस जांच और गिरफ्तारी

पुलिस ने सुशील कुमार को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ के दौरान उसने पूरी घटना स्वीकार कर ली और बताया कि उसने गुस्से में आकर यह कदम उठाया।

पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर चार्जशीट तैयार कर ली।


गांव में मचा सनसनी

यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई। लोग हैरान थे कि एक साधारण परिवार के अंदर इतने जटिल रिश्ते और तनाव कैसे पनप गए।

कई लोगों का मानना था कि अगर शुरुआत में ही पारिवारिक समस्याओं को सुलझा लिया जाता, तो शायद यह त्रासदी टाली जा सकती थी।


एक परिवार का दुखद अंत

सलेमपुर गांव की यह घटना केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक तनाव की भी झलक है जो गरीबी, शराब, अविश्वास और टूटते रिश्तों से पैदा होता है।

कुछ ही मिनटों के गुस्से ने एक परिवार को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।

और आज भी गांव के लोग यही सवाल पूछ रहे हैं — क्या यह सब टाला जा सकता था?