उसे गरीब समझकर उसने टिकट फाड़ दिया… लेकिन वह हवाई जहाज का असली मालिक निकला…
मुंबई के एक छोटे से मोहल्ले में राघव अरोड़ा नाम का एक साधारण लड़का रहता था। उसकी उम्र 22 साल थी, लेकिन उसकी आंखों में एक गहरी चिंता और माथे पर हमेशा पसीना रहता था। राघव के पास साधारण कपड़े थे, लेकिन उसके सपने बड़े थे। वह एक दिन अपने परिवार को एक बेहतर जिंदगी देना चाहता था। उसके पिता एक छोटे से दुकान के मालिक थे और अचानक उनकी तबीयत खराब होने के कारण राघव को जल्दी से मुंबई लौटना पड़ा।
एक सुबह, राघव ने अपने कंधे पर एक पुराना बैग लटकाया और हाथ में एक टिकट मजबूती से पकड़ा। वह एयरपोर्ट की ओर दौड़ रहा था, उसके मन में सिर्फ एक ही ख्याल था—”हे भगवान, बस टाइम पर पहुंच जाऊं।” सिक्योरिटी गेट पर लंबी लाइन लगी थी। लोग अपने महंगे सूटकेस खींचते हुए बातों में मशगूल थे। कहीं से परफ्यूम की खुशबू आती थी, कहीं मोबाइल की रिंगटोन। राघव उन सबके बीच अपनी जगह ढूंढने की कोशिश कर रहा था।
जब वह गेट पार करने ही वाला था, तभी अचानक एक भारी शरीर वाला अमीर आदमी तेजी से मुड़ता है और उससे टकरा जाता है। टकराते ही उस आदमी की महंगी घड़ी की पट्टी खुल जाती है और उसका कॉफी कप गिरकर जमीन पर बिखर जाता है। वह झुझला कर तुरंत राघव पर चिल्ला उठता है, “अरे, देख के नहीं चल सकते तुम लोग? हर जगह घुस जाते हो जैसे यह कोई स्टेशन हो।”
भीड़ एक पल के लिए रुक जाती है। सबकी नजरें अब राघव पर टिक जाती हैं। राघव घबराकर अपने हाथ जोड़ता है। उसकी आवाज कांपती है, लेकिन लहजे में इज्जत और विनम्रता थी। “सॉरी सर, मुझसे गलती हो गई। प्लीज जाने दीजिए। मुझे मुंबई पहुंचना बहुत जरूरी है।”
अमीर आदमी अपनी घड़ी झाड़ते हुए नाक सिकोड़ कर कहता है, “मुंबई? तुम्हारे जैसे लोग तो ट्रेन की जनरल बोगी में बैठने के लायक लगते हो और यहां एयरपोर्ट में घुस आए।” वह हंसता है और आसपास खड़े कुछ लोग भी मुस्कुराते हैं। उसकी आवाज में अहंकार और तिरस्कार दोनों भरे हैं।
राघव अपनी जेब से टिकट निकालता है और दोनों हाथों से उसे संभालते हुए कहता है, “नहीं सर, यह मेरी टिकट है। मैंने खुद खरीदी है। बस मुझे टाइम पर जाने दीजिए। बहुत जरूरी काम है।”
अमीर आदमी टिकट उसके हाथ से छीन लेता है। एक नजर डालता है और ठहाका लगाता है, “बिजनेस क्लास? हां हां हां, बेटा, इतनी बड़ी हिम्मत कहां से आई? कहीं इंटरनेट कैफे से प्रिंट आउट तो नहीं निकाला या किसी अमीर का टिकट चोरी कर लिया?” भीड़ में कुछ लोग हंसने लगते हैं। कुछ लोग मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर देते हैं। राघव बस नीचे नजरें झुकाए खड़ा रहा। उसकी आंखों में शर्म नहीं, बल्कि एक अजीब सी शांति थी।
अमीर आदमी सिक्योरिटी गार्ड को इशारा करता है और कहता है, “गार्ड, जरा चेक करो इसकी टिकट। मुझे नहीं लगता यह असली है। आजकल ठग हर जगह पहुंच गए हैं।” सिक्योरिटी गार्ड टिकट स्कैन करता है। सिस्टम पर कुछ सेकंड लोडिंग होती है और स्क्रीन पर हरी लाइट जलती है—”वैलिड बिजनेस क्लास टिकट।”
भीड़ में सन्नाटा फैल जाता है। अमीर आदमी के चेहरे की हंसी एक पल में गायब हो जाती है। वह झेपते हुए कहता है, “यह कैसे हो सकता है? यह टिकट असली नहीं हो सकती।” सिक्योरिटी गार्ड कहता है, “सर, यह असली है और इनका नाम भी फ्लाइट लिस्ट में मौजूद है।” अब सब लोग उस लड़के को अलग नजरों से देखने लगते हैं। कुछ लोग फुसफुसाते हैं, “सच में बिजनेस क्लास? यह तो लगता ही नहीं था।”
अमीर आदमी के चेहरे पर गुस्सा और झेप का मिलाजुला भाव है। वह गुस्से में टिकट के टुकड़े करता है और जमीन पर फेंक देता है। “अब तो नहीं जाओगे। यह जगह तुम जैसे लोगों के लिए नहीं है।”
राघव नीचे झुकता है। धीरे-धीरे उन टुकड़ों को उठाता है। वह कुछ पल तक चुप रहता है। फिर बहुत शांत स्वर में कहता है, “₹2 कमाकर अपने आप को अमीर समझते हो। आप जानते नहीं हो मुझे। बहुत बड़ी गलती कर रहे हो। चाहूं तो मैं आपको 2 मिनट में बर्बाद कर सकता हूं।”
उसके शब्दों के साथ पूरे माहौल में एक अजीब सी खामोशी फैल जाती है। लोगों की हंसी थम जाती है। वह लड़का धीरे-धीरे उन कागज के टुकड़ों को सीधा करता है। उन पर उंगलियां फेरता है, मानो किसी टूटे सपने को जोड़ने की कोशिश कर रहा हो। आंखों में हल्की नमी है। पर कोई शिकायत नहीं।
वह अपने बैग की जिप खोलता है। अंदर से पासपोर्ट निकालता है और सिक्योरिटी के पास जाकर कहता है, “सर, देख लीजिए, मेरा पासपोर्ट है। असली टिकट थी। बस गलती से फट गई। प्लीज मुझे मुंबई पहुंचना बहुत जरूरी है।”
सिक्योरिटी गार्ड जो अभी कुछ मिनट पहले उसी अमीर आदमी के इशारे पर हंस रहा था, वह घड़ी देखता है, जमाई लेता है और कहता है, “देखो भाई, अब यह टिकट फट चुकी है। हम ऐसे अंदर नहीं जाने दे सकते। नियम है, टिकट डैमेज हो तो दोबारा कंफर्म करानी पड़ती है। जाओ काउंटर पर जाओ।”
लड़का कहता है, “पर सर, मेरी फ्लाइट टाइम पर है। बस कुछ मिनट बचे हैं। अगर मैं अब काउंटर गया तो मेरी फ्लाइट छूट जाएगी।” गार्ड कठोर लहजे में बोलता है, “तो छूट जाने दो। हमारे पास वक्त नहीं है हर किसी की कहानी सुनने का। अमीर लोग भी लाइन में लगते हैं। तुम क्या खास हो?”
वह लड़का कुछ पल के लिए चुप रह जाता है। भीड़ उसके पास से निकलती जाती है। कुछ लोग उसे देखकर मुस्कुराते हैं। कुछ सिर हिलाते हुए आगे बढ़ जाते हैं। एयरपोर्ट के कांच की दीवारों से आती तेज रोशनी उसके चेहरे पर गिरती है और उस रोशनी के बीच उसका चेहरा किसी थके हुए पर दृढ़ इंसान का प्रतीक बन जाता है।
वह धीरे से कहता है, “सर, अगर मैं कहूं कि यह मेरी जिंदगी का सबसे जरूरी सफर है तो क्या आप विश्वास करेंगे?” गार्ड हंसते हुए कहता है, “हर कोई यही कहता है भाई। किसी को शादी में जाना है, किसी को मां से मिलना है, किसी को नौकरी का इंटरव्यू है। पर यहां नियम सबसे ऊपर है।”
उसी वक्त पास से वही अमीर आदमी निकलता है जो कुछ देर पहले उसका मजाक उड़ा रहा था। वह अब भी मुस्कुरा रहा है। अपने महंगे सूट का कॉलर ठीक करता है और कहता है, “अभी भी यहीं खड़ा है। समझ नहीं आया कि यह जगह तेरे जैसे लोगों के लिए नहीं है। धमकी देना आम बात है। लेकिन उसे पूरा कर पाना तुम जैसों की औकात नहीं है।”

लड़का उसकी ओर देखता है लेकिन जवाब नहीं देता। सिर्फ उसकी आंखों में एक ऐसी शांति है जो शायद उस आदमी के लिए सबसे बड़ा जवाब है। वह धीरे-धीरे एयरलाइन काउंटर की ओर बढ़ता है, जहां एक युवती बैठी है। चेहरे पर मेकअप पर लहजे में झुंझुलाहट। वह कंप्यूटर स्क्रीन पर झुक कर टाइप करती हुई कहती है, “जी बोलिए। क्या प्रॉब्लम है?”
लड़का विनम्रता से जवाब देता है, “मैम, मेरी टिकट बिजनेस क्लास की थी लेकिन गलती से फट गई। कृपया चेक कर लीजिए। मुझे आज ही मुंबई पहुंचना बहुत जरूरी है।” वह उसकी ओर देखती भी नहीं। बस टाइप करते हुए कहती है, “आपका नाम?”
लड़का कहता है, “राघव।” वह फिर पूछती है, “पूरा नाम?” “राघव अरोड़ा।” वह नाम सुनते ही भौहे सिकोड़ती है। कंप्यूटर स्क्रीन की तरफ देखती है और कहती है, “यहां तो कोई राघव अरोड़ा नहीं दिख रहा। शायद आपने गलत फ्लाइट बुक की है।”
लड़का थोड़ा झुक कर कहता है, “नहीं मैम, यही फ्लाइट है। देखिए, मेरे ईमेल में भी कंफर्मेशन है।” वह झुंझुलाकर कहती है, “आपको समझ में नहीं आता। हमारे पास हर रोज 100 लोग आते हैं फर्जी टिकट लेकर। सब कहते हैं बहुत जरूरी है। लेकिन सिस्टम में नाम नहीं है। मतलब टिकट वैलिड नहीं है। अब प्लीज दूसरों का टाइम बर्बाद मत कीजिए।”
वह हाथ के इशारे से उसे किनारे कर देती है। राघव कुछ पल तक वहीं खड़ा रहता है। चारों तरफ लोग हैं। किसी के हाथ में कॉफी, किसी के कानों में एयरपॉड्स, हर चेहरा व्यस्त, हर दिल निष्ठुर। वह धीरे से पीछे हटता है। अपनी जेब से टिकट के टुकड़े निकालता है। उन्हें फिर से जोड़ने की कोशिश करता है। पर इस बार टुकड़े जैसे उसकी उंगलियों से फिसलते जा रहे हैं।
उसकी आंखें लाल हो जाती हैं। पर वह खुद को संभाल लेता है। वह सिक्योरिटी की ओर देखता है और कहता है, “सर, अगर आप चाहें तो मैं आपको अपना कंफर्मेशन मेल दिखा सकता हूं। देख लीजिए। बस एक मिनट।” गार्ड कठोर स्वर में जवाब देता है, “देखो भाई, हमें ईमेल से कुछ नहीं लेना। हमारे पास सिस्टम है। अगर तुम्हारा नाम नहीं दिखा रहा, तो तुम अंदर नहीं जा सकते। अब हटो यहां से। भीड़ लग रही है।”
वह अपनी जेब में मोबाइल रखता है। गहरी सांस लेता है और चुपचाप पीछे हट जाता है। कांपते होठों से धीरे से फुसफुसाता है, “शायद वक्त मुझसे नाराज है।”
तभी पूरा एयरपोर्ट अचानक शोर में डूब जाता है। अनाउंसर की आवाज स्पीकर पर गूंजती है, “अटेंशन प्लीज। ऑल फ्लाइट्स आर टेंपरेरीली ऑन होल्ड। एक विशेष वीवीआईपी विमान उतरने वाला है। अगली सूचना तक सभी परिचालन रोक दिए गए हैं।”
सभी लोग एक दूसरे की तरफ देखने लगते हैं। कुछ मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगते हैं। काउंटर पर वही लड़की जो अभी कुछ मिनट पहले राघव पर झुंझला रही थी, अब अपने दोस्तों से कहती है, “पता नहीं कौन है यह वीवीआईपी? शायद कोई बहुत बड़ा बिजनेसमैन।”
अमीर आदमी जो पास में खड़ा है, मुस्कुरा कर कहता है, “जरूर कोई अरबपति होगा। ऐसे लोगों के लिए ही तो यह एयरपोर्ट बना है। हमारे लिए नहीं, उनके लिए।” राघव दूर खड़ा सब सुन रहा है।
लड़की उसके पास आती है। आंखों में तंज और लहजे में कटुता थी। “अरे वाह, तुम अभी भी यहां खड़े हो। इस तरह के लोग तो कॉफी काउंटर पर भी जगह नहीं बना पाते। और तुम यहां बिजनेस काउंटर पर? क्या मजाक है?”
राघव चुपचाप बस अपना टिकट दिखाने की कोशिश करता है। पर रिया की बदतमीजी बढ़ती चली जाती है। रिया कड़क आवाज में कहती है, “चलो हटो। ऐसे लोग हमें परेशान करते हैं। हम सबको काम है। तुम्हारी दास्तान मुझे नहीं सुननी।”
राघव शांति से कहता है, “मैडम, मेरी फ्लाइट है। मैंने सब कुछ पहले से कंफर्म करवा लिया है।” रिया हंसी रोक नहीं पाती। फिर अचानक हाथ बढ़ाकर उसके कंधे पर धक्का मारती है। वह धक्का इतना तेज होता है कि राघव संतुलन खो देता है और कुछ कदम पीछे हटकर खुद को संभाल लेता है।
सिक्योरिटी गार्ड तुरंत बीच में आकर राघव को घसीट कर बाहर निकालने की कोशिश करते हैं। रिया बोलती है, “देखा मैंने कहा था, ऐसे लोग यहां नहीं टिकते। बाहर निकालो इसे।”
राघव की आंखों में क्रोध का एक ठंडा आभास आता है। पर बाहरी रूप से वह नियंत्रित रहता है। वह धीरे-धीरे उठता है। टिकट के फटे टुकड़े हाथ में दबाता है और रिया की ओर सीधे खड़ा होकर आवाज कड़क करके कहता है, “तुम सोचती हो कि तुम किसी से ऊपर हो? तुम्हें लगता है तुम्हारी हंसी किसी के दर्द को छोटा कर देगी।”
रिया और आसपास खड़ा वो अमीर आदमी दोनों एक साथ ढाका मारते हैं। अमीर आदमी अपनी ऊंची आवाज में घमंड भरे शब्द फेंकता है, “हंसो ना बेटा। यह हमारी दुनिया है। तुम जैसे यहां टिक नहीं सकते। आज किस्मत आजमाओगे तो पिट जाओगे।”
राघव का चेहरा गर्म होता है। आंखें चमक उठती हैं और एक पल के लिए सब कुछ धीमा सा दिखता है। फिर वह गहरी सांस लेकर सीधे अमीर आदमी की ओर झुक कर बोलता है, “तुम खुद को बहुत अमीर समझते हो। है ना? बहुत बड़ा समझते हो। देखो, मैं तुम्हें याद दिला दूं। अमीरी सिर्फ पैसों से नहीं मिलती। और अगर तुमने मेरे ऊपर एक और कदम उठाया तो मैं अभी तुम्हें बर्बाद कर दूंगा। समझे?”
भीड़ चुप हो जाती है। रिया के चेहरे पर संदेह की रेखा खींच जाती है। उसने शायद इस तरीके की चुनौती की उम्मीद नहीं की थी। राघव बिना किसी और संकेत के अपनी जेब से फोन निकालता है। मगर उसकी आवाज अब नरम नहीं बल्कि आज्ञा परायण थी। वह एक नंबर डायल करता है।
जब दूसरी तरफ आवाज उठती है तो राघव का स्वर कमांडिंग होता है, “हेलो, तुरंत एयरपोर्ट कंट्रोल को बताओ। लैंडिंग और टैक्सी सर्विसेज को रोक दो। पूरी टर्मिनल पर सर्विसेस बंद कर दो। किसी को अंदर जाने आने की इजाजत मत देना।”
कुछ ही क्षणों में एयरपोर्ट में अचानक अलर्ट की आवाज गूंजती है। एसएमएस टोन की तरह तेज और फिर अनाउंसमेंट का सख्त संदेश, “ध्यान दें। सभी जमीनी परिचालन निलंबित है। सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण सभी बोर्डिंग, उतरना, ईंधन भरना और टैक्सी सेवाएं अस्थाई रूप से रोक दी गई हैं। सभी यात्री कृपया अगली सूचना तक अपने वर्तमान स्थान पर ही रहें।”
एक ठंडा सन्नाटा फैल जाता है। लोग अपने-अपने मोबाइल स्क्रीन देखते हैं। कुछ लोग हैरान होकर एक दूसरे की तरफ देखते हैं। और वही अमीर आदमी जिसकी हंसी अभी तक गूंज रही थी, अब उसके पैरों के नीचे का भरोसा खोता दिखता है।
रिया जो अभी कुछ मिनट पहले राघव को धक्का देकर बाहर करवा रही थी, अब अचानक खुद को असहाय महसूस करती है। अमीर आदमी जो अभी तक हंस रहा था, उसका चेहरा लाल हो चुका है और उसके होंठ जकड़े हुए हैं। राघव बिना दिखावे के शांत खड़ा है।
उसके चेहरे पर ना तो खुशी, ना ही घमंड, सिर्फ एक सख्त ठहराव है। एयरपोर्ट के बड़े-बड़े दरवाजे जिनके पंख खुले थे, अब बंद होते नजर आते हैं। बोर्ड पर “ऑपरेशंस हल्टेड” चमकता है और पूरा हॉल अचानक उस एक आदमी की तुलना में छोटा पड़ जाता है, जिसे अभी तक सबने सिर्फ कपड़ों के आधार पर आंका था।
भीड़ की भनकें बढ़ती हैं। लोग एक दूसरे से फुसफुसाते हैं। कैमरे वाला युवक रिकॉर्ड रोक कर धीरे-धीरे पीछे हटता है। अमीर आदमी अपना सिर झुकाता दिखता है और रिया बेपरवाह सी तरह पलट कर पीछे हट जाती है। उसकी आंखों में अब शर्म और डर का मिश्रित भाव है।
राघव अपना फोन जेब में रखता है। टिकट के फटे टुकड़ों को बारीकी से समेटकर अपनी पॉकेट में रख लेता है और खामोशी से उस काउंटर की ओर चल देता है, जहां उससे पहले उसे अपमानित किया गया था। इस बार सब उसकी तरफ देखने को मजबूर थे।
राघव अब शांत खड़ा है। उसके चेहरे पर ना तो गुस्सा है ना गर्व। बस एक ठंडा आत्मविश्वास। वो सिक्योरिटी गार्ड जिसने कुछ देर पहले उसे धक्के मारकर बाहर किया था, अब खुद उलझन में खड़ा है। चारों तरफ लोग फुसफुसा रहे हैं। “कौन है यह? इसने कैसे पूरे एयरपोर्ट को रुकवा दिया? कहीं कोई बड़ा आदमी तो नहीं?”
रिया जिसने अभी कुछ देर पहले अपने नाखून दिखाते हुए उसे बाहर फेंकवाया था, अब अपनी जगह पर सिहरती हुई बैठी है। उसके होठों पर अब मुस्कान नहीं। बस डर है कि कहीं उसने किसी गलत शख्स से उलझ तो नहीं ली।
उसी समय एयरपोर्ट के मुख्य दरवाजे से चार ब्लैक सूट वाले सिक्योरिटी ऑफिसर अंदर आते हैं। उनके हाथों में वॉकी टॉकी है और उनकी चाल में अनुशासन। सारे लोग खड़े हो जाते हैं। उनके पीछे-पीछे एयरपोर्ट का जनरल मैनेजर आता है, जो घबराया हुआ सीधे राघव की तरफ बढ़ता है।
जनरल मैनेजर घबराते हुए कहता है, “सर, हमें बहुत खेद है। हमें पता नहीं था कि आप खुद यहां आए हैं। आपकी सिक्योरिटी टीम को सूचना नहीं मिली थी, वरना यह सब नहीं होता।” भीड़ सन्न रह जाती है। सब एक दूसरे की ओर देखने लगते हैं।
अमीर आदमी जो कुछ देर पहले घमंड में कह रहा था, “अपनी किस्मत आजमा ले बेटा,” अब धीरे-धीरे खड़ा होता है। उसके चेहरे से सारा रंग उड़ गया। वह हकलाकर पूछता है, “सर, सर यह यह सर है। कौन सर?”
जनरल मैनेजर जवाब देता है, “आपको नहीं पता? यह राघव सिंह चौहान है। एयरफोर्ड ग्रुप के मालिक। वो आदमी जिसकी कंपनी इस पूरे एयरपोर्ट की 70% सर्विस संभालती है।”
भीड़ में सन्नाटा गहरा जाता है। हर निगाह अब राघव पर टिक जाती है। वह अब किसी गरीब थके हारे लड़के जैसा नहीं दिखता। उसके चेहरे पर सख्ती, आंखों में अनुभव और चाल में वह ठहराव है जो सिर्फ उन लोगों में होता है जिन्होंने जिंदगी की हर ठोकर से कुछ सीखा हो।
वो धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। उसी अमीर आदमी के सामने आकर रुकता है। दोनों की नजरें मिलती हैं। अमीर आदमी का सिर झुक जाता है। राघव की आवाज शांत लेकिन अंदर तक काट देने वाली होती है। “अभी थोड़ी देर पहले तुमने कहा था कि यह जगह मेरे जैसे लोगों के लिए नहीं है। अब बताओ, कौन है असली मालिक इस जगह का?”
अमीर आदमी की आंखें झुक जाती हैं। उसके होंठ कांपते हैं पर आवाज नहीं निकलती। राघव मुड़कर सिक्योरिटी गार्ड की ओर देखता है, जो अब शर्म से सिर झुकाए खड़ा है। “तुमने सिर्फ मेरा नहीं, इस यूनिफार्म का भी अपमान किया है। गरीबी या सादगी को कभी कमजोरी मत समझो। क्योंकि जो इंसान अपनी पहचान छिपाकर चलता है, वह दुनिया को असली चेहरा दिखाने की ताकत रखता है।”
राघव की आवाज पूरे एयरपोर्ट में गूंज उठती है। लोगों की आंखें भर आती हैं। कोई सिर झुका कर सोचने लगता है। वो अब रिया की तरफ मुड़ता है। वो अब भी चुप है। आंखों में पछतावा और चेहरे पर डर।
राघव कुछ पल उसे देखता है। फिर धीरे से कहता है, “तुमने मुझे गंदे कपड़ों में देखा और फैसला कर लिया कि मैं छोटा हूं। कभी किसी को उसकी हालत से मत तोलो। वरना जिंदगी किसी दिन तुम्हें भी आईना दिखा देगी।”
लड़की की आंखों से आंसू बहने लगते हैं। वो सिर झुकाकर बस इतना कहती है, “मुझे माफ कर दीजिए सर।” राघव एक पल के लिए कुछ नहीं कहता। फिर उसकी तरफ देखे बिना धीरे से कहता है, “माफी तब कबूल होती है जब इंसान बदलने की कोशिश करे। शब्दों से नहीं, काम से।”
वो अपना फोन निकालता है और उसी कड़क वॉइस में आर्डर देता है, “कंट्रोल रूम, सभी सर्विसेज वापस चालू कर दो।” कुछ ही सेकंड में अनाउंसमेंट आता है, “सभी हवाई अड्डे पर परिचालन फिर से शुरू हो गया है। अस्थाई देरी के लिए हम क्षमा चाहते हैं।” लाइट्स दोबारा चमक उठती हैं। एयरपोर्ट की चहल-पहल लौट आती है।
लेकिन इस बार माहौल में एक अलग सी खामोशी है। वो खामोशी जो सबको अपने भीतर झांकने पर मजबूर कर दे। राघव अपनी फटी हुई टिकट को धीरे से देखता है, मुस्कुराता है और कहता है, “कभी-कभी जिंदगी हमें गिराती नहीं, बल्कि दिखाती है कि हमें कहां खड़ा होना है।”
वो चल देता है एयरपोर्ट लाउंज की ओर। पीछे वह अमीर आदमी झुके सिर से बस उसे जाता देखता रहता है। कुछ ही देर में राघव के फोन पर फोन आता है। “हेलो सर, अब आपके पिताजी की तबीयत बिल्कुल ठीक है। आपको घबराने की जरूरत नहीं है।”
यह सुनकर राघव के चेहरे पर हंसी आ जाती है और उन्हें थोड़ी तसल्ली मिलती है।
दोस्तों, आपको यह कहानी कैसी लगी? हमें कमेंट में जरूर बताना और आप हमारी वीडियो को देश के किस कोने से देख रहे हो, यह भी जरूर बताना। मिलते हैं अगली कहानी के साथ। धन्यवाद!
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