नई साल पर दो लड़कियों ने लड़की का पूरी रात रेप किया हो गई मौत

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नीरज की कहानी – विश्वासघात और न्याय की लड़ाई

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के छर्रा कस्बे का रहने वाला नीरज एक साधारण परिवार से था। उसके पिता का निधन हो चुका था, और मां घर संभालती थी। नीरज पढ़ा-लिखा था, पास के कॉलेज में दाखिला लिया था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। मां और परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए नीरज ने जल्दी ही पैसे कमाने की ठानी।

फिर उसे फरीदाबाद में एक कंपनी में नौकरी मिल गई। वहां वह अपने मेहनत से काम करता और अपनी सैलरी का एक हिस्सा मां को भेजता। नीरज का स्वभाव सरल और नेक था। वह कभी किसी से झगड़ा नहीं करता था। उसकी सादगी और सुंदरता दोनों ही लोगों का ध्यान खींचती थी।

कंपनी में नीरज के साथ दो लड़कियां काम करती थीं – रजनी और बबीता। दोनों की उम्र लगभग 22-23 साल थी। ये लड़कियां अपने काम से ज्यादा लड़कों को फंसाने और उनसे फायदा उठाने में रुचि रखती थीं। जब उन्होंने पहली बार नीरज को देखा, तो उसकी सुंदरता और मासूमियत ने उन्हें आकर्षित किया। उन्होंने सोचा कि अगर इस लड़के को अपने जाल में फंसा लिया जाए तो वे न सिर्फ उसकी सैलरी का हिस्सा ले सकती हैं बल्कि उसका पूरा नियंत्रण भी पा सकती हैं।

धीरे-धीरे रजनी और बबीता नीरज के करीब आने लगीं। लंच ब्रेक में वे उसके पास जातीं, उससे बातें करतीं, और दोस्ती का नाटक करतीं। नीरज को उनकी बातों में कोई बुराई नजर नहीं आई। वह समझता था कि वे बस दोस्ताना व्यवहार कर रही हैं।

एक दिन बबीता ने नीरज से कहा कि उसका पंखा और लाइट खराब हो गए हैं, क्या वह उसकी मदद कर सकता है? उसने कहा कि वह ₹500 भी देगी। नीरज ने सोचा कि यह कोई बड़ी बात नहीं है, वह जाकर मदद कर देगा।

लेकिन जब नीरज उनके कमरे पर पहुंचा, तो दरवाजा अंदर से बंद कर दिया गया। रजनी और बबीता ने नीरज को बताया कि वे उसे इसलिए बुलाया हैं क्योंकि वे उससे प्यार करती हैं और उसके साथ संबंध बनाना चाहती हैं। नीरज ने मना किया, लेकिन लड़कियों ने धमकी दी कि अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो वे उसे पुलिस में फंसा देंगी।

नीरज मजबूर था। उसने लड़कियों की बात मानी, लेकिन वह अंदर से टूट चुका था। लड़कियां पहले से ही सेक्स वर्धक गोलियां खा चुकी थीं, जिससे उनकी इच्छा और ताकत दोगुनी हो गई थी। वे कई बार नीरज के साथ जबरदस्ती संबंध बनाती रहीं।

एक दिन जब नीरज अपनी पूरी ताकत खो चुका था, तो बबीता ने एक घिनौनी हरकत की। उसने नीरज के गुप्तांग को दांत से काट दिया। नीरज बेहोश हो गया और खून बहने लगा। लड़कियां उसे वहीं छोड़कर भाग गईं।

होटल के सफाई कर्मचारी ने नीरज को बेहोशी की हालत में पाया। होटल मालिक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। नीरज को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी जान बचाने के लिए इलाज शुरू हुआ।

जब नीरज होश में आया, तो उसने पुलिस को पूरी सच्चाई बताई। उसने बताया कि कैसे रजनी और बबीता ने उसे ब्लैकमेल किया, बार-बार उसके साथ गलत व्यवहार किया, और अंत में उसे इस कदर घायल कर दिया।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। दोनों लड़कियों

को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके मोबाइल फोन से नीरज के साथ बनाए गए वीडियो और मैसेज भी बरामद हुए, जो उनकी साजिश को साबित करते थे। पूछताछ में दोनों लड़कियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और बताया कि वे कई लड़कों को इसी तरह ब्लैकमेल करती थीं और उनसे पैसे वसूलती थीं।

नीरज की कहानी सुनकर पुलिस और समाज दोनों के होश उड़ गए। यह मामला न केवल एक युवक की जिंदगी के साथ हुए अन्याय को दर्शाता था, बल्कि यह भी बताता था कि कैसे कुछ लोग दूसरों का भरोसा तोड़कर उनके जीवन को बर्बाद कर देते हैं।

नीरज ने अस्पताल में लंबे इलाज के बाद धीरे-धीरे अपनी सेहत सुधारी। उसके गुप्तांग की चोट भी ठीक हो गई, लेकिन वह मानसिक और भावनात्मक रूप से बहुत आहत था। उसने ठाना कि वह अपने साथ हुए अन्याय को दुनिया के सामने लाएगा और उन लड़कियों के खिलाफ न्याय दिलाएगा।

मामले की सुनवाई शुरू हुई। अदालत में नीरज ने हिम्मत से अपना बयान दिया। उसने बताया कि कैसे उसने अपनी मासूमियत खो दी, कैसे उसकी जिंदगी तबाह हो गई, और कैसे उस पर अत्याचार किया गया।

रजनी और बबीता ने भी अदालत में अपना अपराध स्वीकार किया और पश्चाताप जताया। न्यायालय ने उनकी सजा सुनाई, ताकि भविष्य में कोई और इस तरह के अपराध न कर सके।

नीरज की कहानी ने समाज को एक बड़ा संदेश दिया कि भरोसा और सम्मान की कीमत क्या होती है। साथ ही यह भी दिखाया कि जब इंसान अपने हक के लिए आवाज उठाता है, तो उसे न्याय मिल सकता है।

यह घटना एक चेतावनी भी थी कि हमें अपने आसपास के लोगों पर नजर रखनी चाहिए और किसी भी तरह के दुर्व्यवहार के खिलाफ खड़ा होना चाहिए। खासकर महिलाओं और युवाओं को जागरूक करना जरूरी है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ें और गलत चीजों को छुपाएं नहीं।

नीरज ने अपने जीवन में जो दर्द सहा, उसके बावजूद उसने हार नहीं मानी। उसने अपने अनुभवों से सीख लेकर अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरू किया। उसके लिए अब सबसे महत्वपूर्ण था कि वह अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाए और समाज में एक नया उदाहरण बने।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, सच्चाई और न्याय की राह पर चलना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। और सबसे जरूरी बात यह है कि हम अपने आस-पास के लोगों के प्रति संवेदनशील और जागरूक रहें, ताकि कोई भी इस तरह के हादसे दोबारा न हों।

समाप्त