‘मैंने ईमान का काम किया’ कबाड़ में 15 लाख के Gold को लौटाने वाले हाजी अख़्तर एक्सक्लूसिव

‘मैंने ईमान का काम किया’: कबाड़ में मिले 15 लाख के सोने को हाजी अख्तर खान ने मालिक को लौटाया, पेश की इंसानियत की मिसाल

आज के दौर में जहाँ लोग चंद रुपयों के लिए अपनी ईमानदारी बेच देते हैं, वहीं हरियाणा के फरीदाबाद (बल्लभगढ़) से एक ऐसी खबर आई है जो इंसानियत पर आपके भरोसे को और मजबूत कर देगी। कबाड़ का काम करने वाले हाजी अख्तर खान को कबाड़ के ढेर में 100 ग्राम सोना मिला, जिसकी कीमत करीब 15 लाख रुपये थी। अख्तर खान ने न केवल उस सोने को सुरक्षित रखा, बल्कि पुलिस की मौजूदगी में उसे उसके असली मालिक को वापस सौंप दिया।

कैसे पहुँचा 15 लाख का सोना कबाड़ में?

यह कहानी शुरू होती है फरीदाबाद के एक शर्मा परिवार से। जनवरी 2025 में कुंभ स्नान पर जाने से पहले, परिवार की महिला ने घर की सुरक्षा के डर से अपना सारा गहना (करीब 100 ग्राम सोना) एक लोहे के डिब्बे में छिपाकर कबाड़ के ढेर के बीच रख दिया था। उन्हें लगा कि चोर अलमारी खंगालेंगे, लेकिन कबाड़ को कोई हाथ नहीं लगाएगा।

स्नान से लौटने के बाद परिवार यह बात भूल गया। दिवाली की सफाई के दौरान, घर के मुखिया अशोक शर्मा ने सारा पुराना कबाड़ इकट्ठा किया और वल्लभगढ़ में अख्तर खान की दुकान पर बेच दिया। उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि उस कचरे के साथ उनकी जिंदगी भर की कमाई भी चली गई है।

6 महीने बाद हुआ चमत्कार

दो महीने बाद जब शर्मा परिवार को गहनों की जरूरत पड़ी, तब उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। वे भागे-भागे अख्तर खान के पास पहुंचे। उस वक्त तक कबाड़ का ढेर काफी बड़ा हो चुका था। अख्तर साहब ने उनसे कहा, “फिलहाल तो मुझे कुछ नहीं मिला, लेकिन आप अपना नंबर छोड़ जाइए, अगर मिला तो अमानत जरूर वापस करूँगा।”

करीब 6 महीने बीत जाने के बाद, 16 फरवरी को जब अख्तर खान कबाड़ की छंटनी कर रहे थे, तो उन्हें एक पन्नी में लिपटा हुआ वह डिब्बा मिला। जब उन्होंने सुनार से चेक कराया, तो पता चला कि वह 22 कैरेट का असली सोना है और उसका वजन 100 ग्राम है।

“अल्लाह का खौफ और ईमान की ताकत”

अख्तर खान ने बताया कि सोना मिलने के बाद उनके मन में एक पल के लिए भी लालच नहीं आया। उन्होंने कहा, “मेरे ज़हन में सबसे पहला ख्याल अल्लाह का खौफ आया। दीन-ए-इस्लाम सिखाता है कि किसी का हक मत मारो, वरना बख्शीश नहीं होगी। वह किसी की अमानत थी और उसे लौटाना मेरा फर्ज था।”

अख्तर साहब सीधे एसीपी (ACP) ऑफिस पहुंचे और पुलिस के माध्यम से शर्मा परिवार को बुलवाया। जब शर्मा परिवार ने अपनी आंखों के सामने अपनी खोई हुई पूंजी देखी, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए।

पैसे ठुकराए, सिर्फ दुआएं लीं

सोना वापस मिलने की खुशी में शर्मा परिवार मिठाई का डिब्बा और इनाम के तौर पर कुछ पैसे लेकर अख्तर खान के घर पहुंचा। लेकिन अख्तर साहब और उनके परिवार ने पैसे लेने से साफ इनकार कर दिया। अख्तर की पत्नी ने कहा, “हमने पैसे के लिए नहीं, इंसानियत के लिए यह काम किया है। उनकी बेटियों की शादी के लिए वह सोना जरूरी था, हमें खुशी है कि उनकी अमानत उन तक पहुँच गई।”

नफरत के दौर में मोहब्बत का संदेश

इस घटना ने समाज में एक बड़ा संदेश दिया है। हाजी अख्तर खान 1992 से फरीदाबाद में मेहनत-मजदूरी कर रहे हैं। वे पांच वक्त के नमाजी हैं और हज भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा, “रिश्ता इंसानियत का होता है। वे पंडित जी (शर्मा जी) मेरे भाई हैं। हिंदू, मुसलमान, सिख या ईसाई होने से पहले हम इंसान हैं।”

पुलिस अधिकारियों ने भी अख्तर खान की इस ईमानदारी की सराहना की और उन्हें ‘ईमानदारी का इनाम’ देने की सिफारिश की है। फरीदाबाद की गलियों में आज हर कोई हाजी अख्तर खान के इस नेक काम की चर्चा कर रहा है।

रिपोर्ट: सौरभ शुक्ला (द रेड माइक) स्थान: वल्लभगढ़, हरियाणा