UP Aligarh में ‘कुत्ते जैसा’ बना युवक, 18 घंटे में शुरू किया भौंकना, “काटने दौड़ा” Video Viral

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अलीगढ़ में ‘कुत्ते जैसा’ बना युवक, 18 घंटे में शुरू किया भौंकना और काटने दौड़ा: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

परिचय

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चिंता में डाल दिया है, बल्कि पूरे देश में जागरूकता की आवश्यकता पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। इस घटना में एक युवक को कुत्ते ने काट लिया था, लेकिन उसके बाद जो हुआ, उसने हर किसी को हिला कर रख दिया है। युवक का शरीर अचानक से ‘कुत्ते जैसी’ हरकतें करने लगा, जीभ बाहर निकालकर दौड़ने लगा, और खुद को काटने की कोशिश करने लगा। इस भयावह घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, और लोग इस घटना को लेकर तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं।

यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमें यह भी दिखाती है कि यदि समय पर सही कदम न उठाए जाएं, तो मामूली से मामूली घटना भी खौफनाक रूप ले सकती है। आइए, इस पूरी घटना और उससे जुड़े मुद्दों का विस्तृत विश्लेषण करते हैं।

घटना का विवरण

यह घटना अलीगढ़ के खैर तहसील के उवारा गांव की है। यहाँ रहने वाले 23 वर्षीय युवक, रामकुमार उर्फ़ रामू, एक आवारा कुत्ते द्वारा घायल हो गया। उस दिन वह अपने घर के पास ही था, जब एक आवारा कुत्ता अचानक से उसके पैर पर हमला कर दिया। घाव मामूली था, दर्द अधिक नहीं था, इसलिए रामू ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। घर पहुंचकर उसने घाव को साबुन से धोया और गांव में प्रचलित तरीके से मिर्च लगा दी। उसने सोचा कि अगले दिन अस्पताल जाकर इंजेक्शन लगवा लेगा।

लेकिन, यही मामूली घटना उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा खतरा बन गई। अगले दिन, यानी घटना के महज 18 घंटे बाद, उसकी हालत अचानक से बिगड़ने लगी। वह चीखने-चिल्लाने लगा, जीभ बाहर निकाली और उसने खुद को और दूसरों को काटने की कोशिश की। परिवार और आसपास के लोग घबरा गए। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि उसके परिजन उसे पकड़ने के लिए मजबूरन चारपाई से बांधने पर मजबूर हो गए।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें युवक को भौंकते, जीभ बाहर निकालते और खुद को काटने की कोशिश करते देखा जा सकता है। वीडियो में युवक के चेहरे पर डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी क्रूरता और हिंसा नजर आ रही है। यह देखकर हर कोई दंग रह गया है कि मामूली से कुत्ते के काटने के बाद इतनी भयानक स्थिति कैसे बन गई।

प्रशासनिक कार्रवाई और इलाज

परिजन तुरंत ही उसे खैर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत ही उसे दिल्ली रेफर कर दिया। प्रारंभिक इलाज के बाद उसकी हालत स्थिर तो हो गई है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। उसे बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अलीगढ़ के ग्रामीण इलाकों में इस घटना ने हड़कंप मचा दिया है। लोग भयभीत हैं कि कहीं यह घटना किसी और के साथ न हो जाए। गांव में अफरा-तफरी का माहौल है और लोग आवारा कुत्तों को पकड़ने और वैक्सीनेशन अभियान चलाने की मांग कर रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि रेबीज़ एक जानलेवा बीमारी है, जो सामान्यतः 10 से 14 दिनों में लक्षण दिखाने लगती है। लेकिन यदि संक्रमित जानवर पहले से ही पागल या संक्रमित हो, तो यह लक्षण 24 घंटे के भीतर भी प्रकट हो सकते हैं। इसलिए, यदि किसी को भी कुत्ते या किसी भी जानवर ने काटा हो, तो तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए।

रेबीज़ का खतरनाक प्रभाव

रेबीज़ वायरस बहुत ही खतरनाक होता है। यदि समय पर इलाज न किया जाए, तो यह वायरस इतनी तेजी से शरीर में फैलता है कि दिमाग, नसों और हृदय प्रणाली को प्रभावित कर देता है। इससे मौत भी हो सकती है। इसलिए, यदि किसी को कुत्ते ने काटा हो, तो तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

डॉक्टरों का कहना है कि यदि 24 घंटे के अंदर एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन नहीं लगाया गया, तो वायरस शरीर में फैलकर जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। इसीलिए, किसी भी जानवर के काटने के तुरंत बाद घाव को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं और तुरंत ही इलाज शुरू करें।

कानून और नियम

यह घटना केवल अलीगढ़ की नहीं है, बल्कि पूरे देश में जागरूकता की कमी का प्रतीक है। भारत में पशु नियंत्रण और वैक्सीनेशन के कठोर नियम हैं, लेकिन इन नियमों का पालन बहुत कम होता है।

पालतू कुत्तों के नियम

पालतू कुत्तों का 15 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
मालिक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका कुत्ता सार्वजनिक स्थानों पर कोई परेशानी न फैलाए।
लाइसेंस लेना आवश्यक है।
यदि कोई कुत्ता पागल हो या संक्रमण फैलाने वाला हो, तो उसका वैक्सीनेशन कराना जरूरी है।

आवारा कुत्तों का नियंत्रण

आवारा कुत्तों का नसबंदी और वैक्सीनेशन अनिवार्य है।
भारत सरकार ने 2023 से 2025 के बीच करीब 2.84 लाख आवारा कुत्तों का नसबंदी और टीकाकरण किया है।
पशु कल्याण विभाग ने इन नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
यदि किसी इलाके में आवारा कुत्तों का खतरा बढ़ रहा हो, तो तुरंत ही उनके पकड़ने और वैक्सीनेशन का अभियान चलाना चाहिए।

क्या करें यदि किसी को काटा जाए?

घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से धोएं।
तुरंत ही एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन लगवाएं।
24 घंटे के भीतर चिकित्सकीय सलाह लें।
यदि लक्षण दिखें, तो तुरंत अस्पताल जाएं।

क्या कहता है डॉक्टरी विज्ञान?

डॉक्टरों का मानना है कि रेबीज़ वायरस का संक्रमण इतना खतरनाक होता है कि यदि इसे समय पर न रोका जाए, तो यह व्यक्ति को मौत के मुंह में ले जा सकता है। यह वायरस सामान्यतः 10-14 दिनों में लक्षण दिखाता है, लेकिन यदि जानवर पहले से ही संक्रमित हो, तो लक्षण 24 घंटे के भीतर भी प्रकट हो सकते हैं।

लक्षण क्या हैं?

तेज बुखार और दर्द
काटने वाली जगह पर झुनझुनी और सूजन
बेचैनी और चिड़चिड़ापन
लार का ज्यादा बहना
पानी से डर
बोलने में कठिनाई
तेज गुस्सा और आक्रामकता
भ्रम और मतिभ्रम
जीभ बाहर निकालने की कोशिश
खुद को या दूसरों को काटने की कोशिश

यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिखें, तो तुरंत अस्पताल जाएं। देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

सामाजिक जागरूकता की जरूरत

यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में मौजूद जागरूकता की कमी और जिम्मेदारी के अभाव का भी प्रतीक है। यदि इस युवक को समय पर उचित चिकित्सा और सावधानी बरती जाती, तो शायद यह खौफनाक स्थिति नहीं बनती।

यह जरूरी है कि हम अपने घर, मोहल्ला और आसपास के इलाकों में पशु नियंत्रण के नियमों का पालन करें। अपने पालतू जानवरों का नियमित वैक्सीनेशन कराएं। आवारा कुत्तों को पकड़कर वैक्सीनेशन अभियान में भाग लें। साथ ही, यदि किसी को भी किसी जानवर ने काटा हो, तो तुरंत ही चिकित्सा सहायता लें।

सरकार और समाज की जिम्मेदारी

सरकार को चाहिए कि वह अपने पशु नियंत्रण और वैक्सीनेशन नियमों का सख्ती से पालन कराए। सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाए। लोगों को शिक्षित करे कि कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने के बाद तुरंत मेडिकल सहायता जरूरी है।

साथ ही, समाज को भी जागरूक होना चाहिए। मोहल्लों में पशु नियंत्रण अभियान चलाना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को खास सावधानियों के बारे में जानकारी देनी चाहिए। हर किसी को यह समझाना चाहिए कि छोटी सी लापरवाही भी खतरनाक साबित हो सकती है।

निष्कर्ष

अलीगढ़ की यह घटना, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है, हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि हम अपने आस-पास के जानवरों और अपनी जिम्मेदारी को कितना समझते हैं। मामूली से मामूली घटना भी यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो वह खौफनाक रूप ले सकती है।

यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि जागरूकता और सावधानी ही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है। हमें अपने घर, अपने मोहल्ले और अपने जीवन में पशु नियंत्रण और स्वास्थ्य नियमों का पालन करना चाहिए। तभी हम ऐसी घटनाओं से बच सकते हैं और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।

अंत में

यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि हर खतरे के पीछे एक चेतावनी छुपी होती है। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाएं। छोटे-छोटे कदम ही बड़े बदलाव ला सकते हैं।

तो, क्या आप तैयार हैं अपने आस-पास की दुनिया को सुरक्षित बनाने के लिए? जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। अपने परिवार और समाज को सुरक्षित बनाने के लिए, आज ही से कदम उठाएं।

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सावधानी ही सुरक्षा है। जागरूक बनें, सुरक्षित रहें।