नागा साधू के सामान का दर्शन करने रोज जाती थीं एक दिन

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किस्मत का खेल

एक छोटा सा गाँव था, जिसका नाम था हरिपुर। यह गाँव अपनी खूबसूरती और शांत वातावरण के लिए जाना जाता था। गाँव के बीचोंबीच एक पुराना मंदिर था, जहाँ लोग पूजा-पाठ करने आते थे। इस मंदिर के पास एक बाग था, जिसमें चिड़ियों की चहचहाहट और फूलों की खुशबू बिखरी रहती थी। गाँव के लोग वहाँ समय बिताने आते थे, बच्चे खेलते थे और बुजुर्ग अपनी यादों में खो जाते थे।

गाँव में एक साधारण परिवार रहता था, जिसमें एक लड़की थी जिसका नाम था गीता। गीता की उम्र लगभग 18 वर्ष थी। वह बहुत होशियार और चुलबुली थी। उसके माता-पिता ने उसे पढ़ाई के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। गीता का सपना था कि वह एक दिन डॉक्टर बनेगी और गाँव के लोगों की सेवा करेगी।

गीता स्कूल में बहुत अच्छी छात्रा थी। उसे पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी रुचि थी। वह हर साल स्कूल की प्रतियोगिताओं में भाग लेती थी और पुरस्कार जीतती थी। उसके शिक्षक और सहपाठियों ने उसे बहुत पसंद किया। गीता हमेशा मुस्कुराती रहती थी और दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहती थी।

एक दिन, गीता अपने स्कूल के दोस्तों के साथ मंदिर गई। वहाँ उन्होंने पूजा की और प्रसाद लिया। मंदिर के पास एक नागा साधू आए थे, जो लोगों को आशीर्वाद देते थे। गीता ने सोचा, “क्यों न मैं भी नागा साधू के पास जाऊँ और उनका आशीर्वाद लूँ?” वह अपने दोस्तों के साथ साधू के पास गई और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। साधू ने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा, “तू बहुत बड़ी डॉक्टर बनेगी, लेकिन ध्यान रखना, जीवन में कई चुनौतियाँ आएँगी।”

गीता ने साधू की बातों को ध्यान से सुना और उन्हें अपने दिल में उतार लिया। वह सोचने लगी, “क्या वाकई मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी?” लेकिन उसने अपने सपनों को पूरा करने का दृढ़ संकल्प किया।

समय बीतता गया और गीता ने अपनी पढ़ाई पूरी की। वह मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने में सफल रही। कॉलेज में उसका सामना कई चुनौतियों से हुआ, लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। वह दिन-रात पढ़ाई करती और अपनी कड़ी मेहनत से सभी विषयों में अच्छे अंक प्राप्त करती।

कॉलेज में गीता की मुलाकात एक लड़के से हुई, जिसका नाम था आर्यन। आर्यन भी मेडिकल कॉलेज का छात्र था और बहुत होशियार था। दोनों के बीच दोस्ती बढ़ने लगी। आर्यन ने गीता को अपने सपनों के बारे में बताया और गीता ने भी अपने सपनों को साझा किया। दोनों एक-दूसरे को प्रेरित करते थे और एक-दूसरे के साथ पढ़ाई करते थे।

एक दिन, गीता और आर्यन ने तय किया कि वे एक साथ एक मेडिकल कैम्प में भाग लेंगे। यह कैम्प गाँव के पास ही आयोजित किया जा रहा था। गीता ने सोचा, “यह एक अच्छा मौका है गाँव के लोगों की सेवा करने का।” उन्होंने मिलकर तैयारी की और कैम्प में गए। वहाँ उन्होंने गाँव के लोगों को मुफ्त चिकित्सा सेवा दी, दवाइयाँ बाँटी और स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी।

कैम्प के दौरान, गीता ने देखा कि गाँव के कई लोग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित थे। उन्होंने ठान लिया कि वह अपने गाँव में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए काम करेंगी। कैम्प के बाद, गीता ने गाँव के प्रधान से बात की और स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। प्रधान ने उसकी बातों को ध्यान से सुना और सहमति दी।

गाँव में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ। गीता ने सभी गाँव वालों को आमंत्रित किया और उनके स्वास्थ्य की जांच की। उन्होंने गाँव में जागरूकता फैलाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए। कई लोग उनके काम से प्रभावित हुए और गीता की सराहना करने लगे।

लेकिन गीता की जिंदगी में एक नया मोड़ तब आया जब आर्यन ने उसे एक दिन कहा, “गीता, मैं तुमसे प्यार करता हूँ। क्या तुम मेरे साथ जिंदगी बिताने के लिए तैयार हो?” गीता थोड़ी चौंकी, लेकिन उसने अपने दिल की सुनते हुए हाँ कर दी। दोनों ने एक-दूसरे के साथ अपने सपनों को साझा किया और एक नई शुरुआत की।

कुछ समय बाद, गीता ने अपनी पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर बन गई। वह गाँव में लौट आई और वहाँ एक छोटी सी क्लिनिक खोली। आर्यन भी उसके साथ था और दोनों ने मिलकर गाँव के लोगों की सेवा करने का निर्णय लिया। गीता ने अपनी क्लिनिक में मुफ्त चिकित्सा सेवाएँ प्रदान कीं और गाँव के लोगों को स्वस्थ रहने के लिए जागरूक किया।

गीता की मेहनत और लगन ने गाँव में एक नई रोशनी फैलाई। लोग उसके पास इलाज कराने आने लगे और उसकी प्रशंसा करने लगे। गीता ने अपने गाँव के बच्चों को भी पढ़ाने का निर्णय लिया और एक स्कूल खोला। वह चाहती थी कि गाँव के बच्चे भी शिक्षा प्राप्त करें और अपने सपनों को पूरा कर सकें।

समय बीतता गया, और गीता और आर्यन ने शादी कर ली। उनका जीवन खुशहाल था, और दोनों ने मिलकर गाँव में कई सुधार किए। गीता ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया और आर्यन ने शिक्षा के क्षेत्र में काम किया। दोनों ने मिलकर गाँव को एक नई दिशा दी।

एक दिन, गीता ने सोचा कि उसे अपने गाँव में एक बड़ा स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना चाहिए। उसने अपने दोस्तों और सहकर्मियों को बुलाया और सभी ने मिलकर योजना बनाई। स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ, जिसमें कई डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हुए। गाँव के लोग आए और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त कीं।

इस शिविर के बाद, गीता ने गाँव के लिए एक स्वास्थ्य केंद्र खोलने का निर्णय लिया। उसने सरकार से मदद मांगी और गाँव के लोगों ने भी सहयोग दिया। धीरे-धीरे, स्वास्थ्य केंद्र बनकर तैयार हो गया और गीता वहाँ काम करने लगी।

गाँव में गीता की मेहनत और लगन से सभी लोग खुश थे। उन्होंने गीता को “गाँव की देवी” का नाम दिया। गीता ने साबित कर दिया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।

गाँव में बदलाव आया, और लोग अब स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक हो गए। गीता ने अपने सपनों को पूरा किया और गाँव के लोगों के जीवन में एक नई रोशनी लाई। उसकी कहानी आज भी गाँव में प्रेरणा का स्रोत है।

इस तरह, गीता ने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। उसने अपने सपनों को पूरा किया और अपने गाँव के लोगों के जीवन में बदलाव लाया। उसकी मेहनत और दृढ़ संकल्प ने उसे एक सफल डॉक्टर बनाया, और वह हमेशा दूसरों की मदद के लिए तत्पर रही।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि अगर हम अपने सपनों के प्रति समर्पित हैं और मेहनत करते हैं, तो हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं। गीता की तरह हमें भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करनी चाहिए और दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।