फेसबुक वाली मोहब्बत का ‘खूनी’ क्लाइमैक्स: मजहब की दीवार तोड़ी, 11 साल साथ जिए, फिर एक रात पत्नी बनी ‘जल्लाद’

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश | विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

कहते हैं कि प्यार अंधा होता है और जब यह परवान चढ़ता है, तो इंसान मजहब, समाज और परिवार की हर दीवार को लांघ जाता है। गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र से सामने आई यह कहानी भी कुछ ऐसी ही शुरू हुई थी—फेसबुक पर हुई एक फ्रेंड रिक्वेस्ट, फिर घंटों बातें, और अंततः सब कुछ छोड़कर एक दूजे के हो जाने का वादा। लेकिन किसे पता था कि जिस शख्स के लिए एक लड़की ने अपना घर, अपना परिवार और अपना धर्म तक छोड़ दिया, वही शख्स एक दिन उसकी नफरत की आग में जलकर राख हो जाएगा।

यह कहानी है विजेंद्र और सोनिया उर्फ हिना की, जिनके 11 साल के रिश्ते का अंत 31 मार्च 2026 की उस काली रात को हुआ, जिसने पूरे दिल्ली-एनसीआर को हिलाकर रख दिया।

फेसबुक से शुरू हुआ ‘सपनों का संसार’

बात साल 2015 की है। फर्रुखाबाद का रहने वाला एक साधारण युवक, विजेंद्र, रोजी-रोटी की तलाश में गाजियाबाद आता है। यहाँ वह एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी शुरू करता है। उसी दौरान उसने फेसबुक पर अपना अकाउंट बनाया। डिजिटल दुनिया की उसी भीड़ में उसकी मुलाकात सोनिया नाम की एक लड़की से हुई। सोनिया मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती थी, लेकिन प्यार ने कभी धर्म नहीं पूछा।

दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला बढ़ा। दुख-सुख साझा होने लगे और दोस्ती कब प्यार में बदल गई, उन्हें खुद पता नहीं चला। जब शादी की बात आई, तो समाज और धर्म की दीवारें सामने खड़ी थीं। लेकिन सोनिया ने एक बड़ा फैसला लिया। उसने विजेंद्र के साथ रहने के लिए अपना धर्म त्याग दिया, हिंदू धर्म अपनाया और अपने परिवार से सारे नाते तोड़कर विजेंद्र की हो गई।

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11 साल का सफर: खुशियों से लेकर बर्बादी तक

शुरुआती पांच साल किसी सपने जैसे थे। विजेंद्र और सोनिया की दुनिया खुशहाल थी। इस दौरान उनके दो बेटे हुए—दीपक (9 वर्ष) और दिव्यांश। विजेंद्र ई-रिक्शा चलाकर और मालवाहक का काम करके परिवार का पेट पाल रहा था। गाजियाबाद की शंकर विहार कॉलोनी (गली नंबर 1) में उनका छोटा सा आशियाना था।

लेकिन, वक्त के साथ इस खुशहाल परिवार को ‘शराब’ की नजर लग गई। विजेंद्र को शराब पीने की लत लग गई। वह दिनभर कमाता और शाम को नशे में धुत होकर घर लौटता। शराब के नशे में वह हिंसक हो जाता और अपनी पत्नी सोनिया के साथ बेरहमी से मारपीट करता। सोनिया ने कई बार उसे समझाने की कोशिश की, उसे याद दिलाया कि उसने उसके लिए अपना पूरा संसार छोड़ दिया है, लेकिन विजेंद्र पर कोई असर नहीं हुआ।

नशे का ‘डबल डोज’ और नफरत की चिंगारी

हैरानी की बात यह है कि पति के अत्याचारों और उस दर्द को कम करने के लिए सोनिया ने भी शराब का सहारा लेना शुरू कर दिया। पिछले दो सालों (2024-2025) में घर के भीतर का माहौल नरक बन चुका था। विजेंद्र अक्सर सोनिया को अर्धनग्न अवस्था में करके पीटता था।

सोनिया के मन में प्रतिशोध की भावना घर करने लगी थी। वह अक्सर सोचती—“मैंने जिसके लिए अपना खुदा छोड़ा, अपना खून (परिवार) छोड़ा, वही आज मुझे जानवरों की तरह पीट रहा है।” मार्च 2026 के अंतिम सप्ताह में मारपीट की घटनाएं बढ़ गईं, जिसने सोनिया को एक खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

31 मार्च की वह ‘कयामत’ वाली रात

31 मार्च 2026 की रात, जब गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में एक तरफ कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे, वहीं विजेंद्र के घर में मौत का तांडव रचा जा रहा था। विजेंद्र की माँ कीर्तन सुनने गई थीं, भाई-बहन घर से बाहर थे। घर में सिर्फ विजेंद्र, सोनिया और उनके बच्चे थे।

शाम करीब 7:00 बजे दोनों ने साथ बैठकर शराब पीना शुरू किया। सोनिया ने एक सोची-समझी साजिश के तहत विजेंद्र के लिए ‘कड़क’ और बड़े पैग बनाए, जबकि खुद के लिए छोटे और हल्के। वह चाहती थी कि विजेंद्र पूरी तरह सुध-बुध खो दे। जब विजेंद्र नशे में पूरी तरह धुत हो गया, तो सोनिया ने अपना असली रूप दिखाया।

विजेंद्र ने उसे रोकने की कोशिश की, उसे फिर से पीटना चाहा, लेकिन नशे की वजह से वह लड़खड़ा रहा था। सोनिया, जो सालों से अपमान का घूँट पी रही थी, उसने विजेंद्र पर हमला बोल दिया। उसने पहले उसे लाठी-डंडों से खूब पीटा। जब विजेंद्र निढाल हो गया, तो सोनिया ने उसी डंडे की मदद से उसका गला घोंटना शुरू कर दिया।

शोर दबाने के लिए ‘गाने’ और मुँह में ‘कपड़ा’

सोनिया ने इस कत्ल को बहुत ही शातिराना तरीके से अंजाम दिया। विजेंद्र जब जान बचाने के लिए छटपटा रहा था, तो उसकी चीखें बाहर न जाएँ, इसके लिए सोनिया ने:

    घर में लगे टेलीविजन की आवाज पूरी तरह से तेज कर दी और फिल्मी गाने चला दिए।

    विजेंद्र के मुँह में कपड़ा ठूँस दिया ताकि वह शोर न मचा सके। यह बिल्कुल वैसा ही था जैसा विजेंद्र अक्सर सोनिया को पीटते वक्त करता था—कमरा बंद करके और शोर दबाकर।

मासूम चश्मदीद और दादी को वो फोन कॉल

जब यह सब हो रहा था, उनका 9 साल का बेटा दीपक अपनी आँखों से यह खौफनाक दृश्य देख रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसकी माँ उसके पिता के साथ ऐसा क्यों कर रही है। जब विजेंद्र की साँसें थम गईं, तो सोनिया ने उसे उठाकर चारपाई पर डाल दिया, जैसे वह सो रहा हो।

दीपक ने हिम्मत जुटाई और तुरंत अपनी दादी को फोन लगाया। सिसकते हुए उसने कहा— “दादी जी, मम्मी ने पापा को मार दिया है, वो चारपाई पर पड़े हैं, आप जल्दी आ जाओ।”

कीर्तन छोड़कर जब दादी और परिवार के अन्य लोग घर पहुँचे, तो दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा खुलवाने पर विजेंद्र बेसुध मिला। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

फरारी और गिरफ्तारी

वारदात को अंजाम देने के बाद सोनिया फरार होने की फिराक में थी। वह दिल्ली बॉर्डर की तरफ भाग रही थी ताकि ट्रेन पकड़कर कहीं दूर निकल सके। लेकिन गाजियाबाद पुलिस (थाना खोड़ा) के एसएचओ नरेश कुमार शर्मा की टीम ने सटीक इनपुट के आधार पर उसे घेराबंदी करके दबोच लिया। सोनिया ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और वर्तमान में वह सलाखों के पीछे है।

बर्बाद बचपन: अब इन बच्चों का क्या होगा?

इस हत्याकांड का सबसे दुखद पहलू वे दो मासूम बच्चे हैं। एक झटके में उनके सिर से बाप का साया उठ गया और माँ जेल चली गई। समाज के लिए यह एक केस स्टडी है—घरेलू हिंसा और नशे की लत ने कैसे एक हंसते-खेलते परिवार को कब्रिस्तान बना दिया। अब उन बच्चों की परवरिश कौन करेगा? क्या वे कभी उस सदमे से बाहर आ पाएंगे जो उन्होंने अपनी आँखों से देखा?

पुलिस अब इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है ताकि सोनिया को उसके किए की सजा मिल सके।


उपसंहार: शंकर विहार की वह गली आज भी खामोश है। लोग उस दिन को याद करके सिहर उठते हैं। यह घटना हमें सिखाती है कि प्यार की बुनियाद अगर सम्मान पर न हो, तो उसका अंत ऐसा ही खौफनाक होता है। नशा सिर्फ लीवर नहीं, बल्कि पूरे परिवार को जलाकर राख कर देता है।


यह रिपोर्ट उस्मान सैफी के वृत्तांत पर आधारित है।