अल्लाह वाले रेलगाड़ी के पास नमाज़ पढ़ रहे थे फिर हुआ अल्लाह का करिश्मा 😱

“रेलवे स्टेशन का करिश्मा और कुरान की हिफाजत: ईमान की ताकत”
भूमिका
प्यारे दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसी सच्ची और प्रेरणादायक कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो उत्तर भारत के एक रेलवे स्टेशन पर घटी थी। यह घटना न केवल ईमान को ताजा करती है, बल्कि अल्लाह की कुदरत और कुरान की हिफाजत को भी उजागर करती है। इस कहानी में करिश्मा है, सबक है और वह सच्चाई है, जिसे हर मुसलमान महसूस कर सकता है।
भाग 1: रेलवे स्टेशन पर नमाज का करिश्मा
एक बार एक अल्लाह के नेक बंदे अपने कुछ साथियों के साथ रेल यात्रा कर रहे थे। सफर के दौरान मगरिब की नमाज का वक्त हो गया। ट्रेन एक स्टेशन पर कुछ मिनटों के लिए रुकी थी। सभी जानते हैं कि नमाज सुकून और इत्मीनान से अदा की जाती है। वली साहब और उनके साथी प्लेटफार्म पर आए, वजू किया और नमाज की अदायगी में लग गए। उन्होंने ट्रेन छूटने की चिंता नहीं की, उनका यकीन अल्लाह पर था।
जब नमाज शुरू हुई, ट्रेन का वक्त पूरा हो गया, और ट्रेन का हॉर्न बजने लगा। आमतौर पर हॉर्न बजता है तो मुसाफिर जल्दी से सवार हो जाते हैं। ट्रेन चलने को तैयार थी, लेकिन वली साहब बेफिक्र होकर नमाज पढ़ते रहे।
रेलवे मास्टर ने इंजन स्टार्ट किया, लेकिन ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। इंजीनियर ने पूरी ट्रेन चेक की, कोई खराबी नहीं मिली। मास्टर परेशान हो गया कि आखिर ट्रेन क्यों नहीं चल रही। वह प्लेटफार्म पर उतर आया और उसकी नजर वली साहब और उनके साथियों पर पड़ी, जो इबादत में लगे थे। उसने लोगों से पूछा, “ये कौन हैं?” जवाब मिला, “ये इसी ट्रेन के मुसाफिर हैं, नमाज पढ़ने के लिए उतरे हैं।”
मास्टर समझ गया कि ट्रेन क्यों नहीं चल रही। यह अल्लाह की कुदरत थी, वली की करामत थी। थोड़ी देर बाद जब नमाज पूरी हुई, मास्टर उनके पास गया और कहा, “आपकी इबादत देखकर मैं बहुत प्रभावित हूँ। मुझे लगता है, ट्रेन आपके वजह से रुकी है। कृपया ट्रेन में सवार हो जाएँ, मुझे यकीन है कि आपके कदम रखते ही ट्रेन चल पड़ेगी।”
जैसे ही वली साहब और उनके साथी ट्रेन में बैठे, ट्रेन चलने लगी। यह था अल्लाह के वली की करामत। कई लोग इसे अलग-अलग बुजुर्गों की करामत मानते हैं, लेकिन असल बात यह है कि अल्लाह की कुदरत हर जगह है। नबी मोजेजा दिखाते हैं, वली करामत दिखाते हैं, लेकिन सब अल्लाह की शक्ति का ही हिस्सा है।
भाग 2: नमाज की अहमियत और सबक
इस घटना से हमें यह सबक मिलता है कि नमाज किसी भी हालत में माफ नहीं है। चाहे आप सफर में हों, बीमार हों, खड़े होकर न पढ़ सकें, बैठकर पढ़ें, या लेटकर पढ़ें—नमाज हर मुसलमान पर फर्ज है। नमाज मोमिन की मेराज है, राहत है, सुकून है। नमाज पढ़ने वालों के चेहरे पर नूर रहता है, उनकी बीमारियाँ दूर रहती हैं, और बुरी चीजें उनसे दूर रहती हैं।
आज दुनिया में लोग सुकून की तलाश में भटकते हैं, लेकिन अल्लाह ने फरमाया है कि सुकून चाहिए तो नमाज पढ़ो, मस्जिद आओ। आज के दौर में मुसलमानों को चाहिए कि वे पाँचों वक्त की नमाज अदा करें।
भाग 3: मुंबई की करामाती दरगाह
मुंबई के सीएसटी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर 15 पर हजरत बिस्मिल्लाह शाह बाबा रहमतुल्लाही अल की मजार है। आप आले रसूल हैं, अरब से हिंदुस्तान आए और मुंबई में ठहर गए। आपकी इबादत गाह के पास ही अंग्रेजों ने रेलवे पटरी बिछानी चाही। जब अंग्रेजों ने आपको हटाने की कोशिश की, तो आपने मना कर दिया। अंग्रेजों ने जबरन आपको हटाया और पटरी बिछाई, लेकिन हर रात पटरी उखड़ जाती थी। आखिर अंग्रेज समझ गए कि यह बुजुर्ग की करामत है। उन्होंने पटरी दूसरी जगह शिफ्ट की और आपकी इबादत वाली जगह को छोड़ दिया। आज वही जगह मजार है, जहाँ लोग दुआ के लिए आते हैं।
भाग 4: चुनचुन बाबा की करामत
उज्जैन के सैयद रहमतुल्लाही अल शाह उर्फ चुनचुन बाबा एक दिन ट्रेन में सफर कर रहे थे। टीटी ने टिकट माँगा, बाबा ने कहा, “हम फकीर हैं, टिकट नहीं है।” टीटी ने उन्हें ट्रेन से उतार दिया। जब ट्रेन चलाने की कोशिश की गई, तो ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। पूरे इंजन की जाँच की गई, कोई खराबी नहीं मिली। तभी एक बुजुर्ग ने कहा, “जब तक चुनचुन बाबा को ट्रेन में नहीं बैठाओगे, ट्रेन नहीं चलेगी।”
अधिकारियों ने बाबा से माफी माँगी, बाबा ने रहम किया और ट्रेन में बैठ गए। ट्रेन चलने लगी। बाद में पता चला कि ट्रेन में किसी के पास टिकट नहीं था, उज्जैन टिकट घर में भी टिकट नहीं थी। बाबा की करामत से सब हैरान रह गए। टीटी पाठक को नौकरी से निकाल दिया गया। पाठक ने अब्दुल अजीज बाबा से मदद माँगी, जिन्होंने चुनचुन बाबा से सिफारिश की। बाबा ने रहमत की नजर डाली, अगले दिन पाठक की नौकरी वापस मिल गई।
भाग 5: कुरान की हिफाजत और उसका चैलेंज
कुरान एक ऐसी किताब है जिसकी हिफाजत का जिम्मा खुद अल्लाह ने लिया है। चाहे कोई कितनी भी कोशिश कर ले, कुरान को मिटा नहीं सकता। अगर पूरी दुनिया के कुरान को समंदर में भी डाल दिया जाए, तो भी कुरान हाफिजों के दिलों में महफूज है। कुरान का चैलेंज है कि कोई उसकी तरह एक छोटी सी आयत भी नहीं ला सकता। बड़े-बड़े ज्ञानी, साधु-संत, पादरी, कोई भी आज तक कुरान के जैसी आयत नहीं बना सका।
कुरान की हिफाजत के कई वाकये सामने आते हैं। कुछ लोग कुरान की बेहुरमति करने की कोशिश करते हैं, लेकिन अल्लाह की कुदरत से उनका नुकसान होता है। कुरान के चाहने वाले उसकी हिफाजत के लिए खड़े हो जाते हैं। कुरान के हाफिज, उसके चाहने वाले, दुनिया भर में मौजूद हैं।
कुरान का चैलेंज हमेशा कायम रहेगा—कोई भी उसकी तरह आयत नहीं ला सकता। कुरान अल्लाह का कलाम है, आसमान से उतरा है, उसकी नकल कोई नहीं कर सकता।
भाग 6: ईमान, मोहब्बत और सबक
जो कुरान से मोहब्बत करता है, अल्लाह उसे बरकत देता है। कुरान पढ़ने वालों को सुकून मिलता है। कुरान का चैलेंज आज तक कोई पूरा नहीं कर पाया है और न आगे कर पाएगा। मुसलमानों को चाहिए कि वे कुरान से मोहब्बत करें, उसे पढ़ें, समझें और अमल करें।
उपसंहार
इस कहानी में रेलवे स्टेशन पर नमाज का करिश्मा, मुंबई और उज्जैन की दरगाहों की करामत, और कुरान की हिफाजत का सबक मिलता है। यह कहानी बताती है कि ईमान, नमाज और कुरान की ताकत सबसे ऊपर है। अल्लाह की कुदरत हर जगह है, और उसका कलाम हमेशा महफूज रहेगा।
अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर साझा करें। कुरान की मोहब्बत को दिल में रखें, नमाज की पाबंदी करें और अल्लाह पर यकीन रखें।
समाप्त
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