पूरी बोतल सेक्स*वर्धक गोलियां खाने से तड़प तड़प कर हो गई मौत

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मौत की गोलियां: मेरठ के चखमोरना गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के चखमोरना गांव में एक छोटी सी दुकान थी, जहां रीटा देवी नाम की महिला कपड़े बेचती थी। रीटा देवी का जीवन आम महिलाओं जैसा नहीं था—वह अकेली थी, पति की मौत के बाद घर की सारी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर आ गई थी। उसके परिवार में ससुर सुंदर सिंह और एक बेटा आरव था। दुकान ठीक-ठाक चलती थी, गांव की महिलाएं उससे कपड़े खरीदने आती थीं, लेकिन अकेलापन रीटा को भीतर ही भीतर खा रहा था।

पति की मौत के बाद रीटा देवी ने अपने जीवन में खालीपन महसूस करना शुरू कर दिया। वह चाहती थी कि किसी तरह यह अकेलापन दूर हो जाए। इसी बीच उसकी नजर पड़ोस के राजन पर पड़ी, जो दसवीं कक्षा में पढ़ता था। रीटा ने राजन की मां से बात की कि उसे दुकान पर एक लड़के की जरूरत है, वह राजन को काम पर भेज दे, बदले में हर महीने चार हजार रुपये मिलेंगे। राजन की मां मान गई, लेकिन जब रीटा ने राजन को रात में पढ़ाई के बहाने घर बुलाया तो उसकी मां ने साफ मना कर दिया। रीटा का पहला जाल असफल हो गया, लेकिन उसकी इच्छाएं यहीं नहीं रुकीं।

दिन बीतते गए। रीटा के ससुर सुंदर सिंह खेत में काम करते थे। एक दिन अपने दोस्त लक्ष्मण प्रसाद के कहने पर सुंदर सिंह ने घर के लिए नौकर रखने का फैसला किया। गांव के चरण सिंह को काम पर रखा गया—25-26 साल का हैंडसम युवक, आर्थिक रूप से कमजोर। चरण सिंह ने काम संभाल लिया, खेतों और घर के छोटे-मोटे काम करने लगा। रीटा देवी ने चरण सिंह को देखा तो मन ही मन खुश हो गई, उसे लगा कि उसकी सारी जरूरतें अब पूरी हो सकती हैं।

कुछ ही दिनों में सुंदर सिंह ने दो दिन के लिए घर से बाहर जाने की बात कही। रीटा को मौका मिल गया। उसने चरण सिंह को घर बुलाया, दरवाजा बंद किया, धमकी दी—अगर उसके साथ समय नहीं बिताया तो झूठा आरोप लगाकर जेल भिजवा देगी। डर के मारे चरण सिंह ने विरोध नहीं किया, रीटा ने उसके साथ जबरन संबंध बनाए और धमकी दी कि जब भी बुलाएगी, आना होगा।

समय बीता, लेकिन रीटा की इच्छाएं यहीं नहीं थमीं। उसकी सहेली आरजू देवी, जिसके पति विदेश में रहते थे, उससे मिलने आई। रीटा ने अपनी सहेली को बताया कि वह अपने नौकर के साथ समय बिताती है। आरजू ने भी इच्छा जताई कि वह भी चरण सिंह के साथ समय बिताना चाहती है। रीटा ने योजना बनाई—रात में घर पर सबको नींद की गोलियां खिलाकर सुला देगी, फिर दोनों सहेलियां अपनी इच्छाएं पूरी करेंगी।

रात आई। रीटा ने मेडिकल शॉप से नींद की गोलियां और सेक्सवर्धक गोलियां खरीदीं। खाने में नींद की गोलियां मिलाकर ससुर और बेटे को खिला दिया। जब दोनों गहरी नींद में सो गए, तो रीटा ने आरजू को घर बुलाया, फिर चरण सिंह को धमकी देकर बुलाया। दोनों महिलाओं ने उसके साथ जबरन संबंध बनाए। रीटा ने अलग-अलग बार उसे दूध में सेक्सवर्धक गोलियां मिलाकर पिलाईं—पहले दो, फिर चार गोलियां। चरण सिंह ने मना किया, लेकिन उसे जबरन पिलाया गया।

कुछ देर बाद चरण सिंह की हालत बिगड़ने लगी। उसके शरीर ने काम करना बंद कर दिया, सांसें फूलने लगीं, चक्कर आने लगे। दोनों महिलाएं घबरा गईं। जब देखा कि चरण सिंह मर चुका है, तो लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। धारदार चाकू से लाश के टुकड़े किए, दो बोरियों में भरकर साइकिल पर रख लिया। रात के अंधेरे में तालाब की ओर ले जाने लगीं।

रास्ते में गांव का किसान सूरज मिल गया। उसने टॉर्च की रोशनी में बोरियों में खून देखा, शोर मचा दिया। गांव के लोग इकट्ठा हुए, बोरियां खोलीं, टुकड़े हुए शव देखकर सब दंग रह गए। पुलिस को खबर दी गई। पुलिस आई, दोनों महिलाओं को गिरफ्तार किया, पूछताछ में दोनों ने सच उगल दिया। अदालत में पेश किया गया, जेल भेज दिया गया।

सच की परतें और समाज का सवाल

रीटा देवी की कहानी सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपी कई सच्चाइयों को उजागर करती है। अकेलापन, इच्छाएं, सामाजिक दबाव, और अपराध की ओर बढ़ता कदम—ये सब उस महिला की जिंदगी में एक साथ मौजूद थे। रीटा देवी ने अपनी इच्छाओं के लिए नौकर को फंसाया, सहेली के साथ मिलकर उसकी जान ली, और फिर लाश को ठिकाने लगाने की कोशिश की।

चरण सिंह एक गरीब, भोला-भाला युवक था, जिसे डर और धमकी के बल पर गलत राह पर धकेल दिया गया। उसकी मौत का जिम्मेदार कौन है—रीटा, आरजू, या समाज? क्या गरीबी और मजबूरी इंसान को इतना कमजोर बना देती है कि वह विरोध भी नहीं कर पाता?

अदालत और कानून का फैसला

पुलिस जांच में साफ हुआ कि चरण सिंह की मौत ओवरडोज से हुई—पूरी बोतल सेक्सवर्धक गोलियां खाने से शरीर ने काम करना बंद कर दिया, तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो गई। लाश के टुकड़े करने और ठिकाने लगाने की कोशिश ने मामले को और जघन्य बना दिया। अदालत ने दोनों महिलाओं को दोषी पाया, जेल भेज दिया गया।

समाज के लिए सीख

यह कहानी सिर्फ अपराध की नहीं, बल्कि चेतावनी की भी है। अकेलापन, इच्छाएं, और सामाजिक दबाव अगर सही दिशा में न जाएं तो जीवन बर्बाद कर सकते हैं। गरीब, मजबूर लोगों का शोषण समाज में आम है, लेकिन उसे रोकना जरूरी है। महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन अपराध के लिए कोई जगह नहीं है।

आपकी राय क्या है?

क्या रीटा देवी और आरजू देवी को सही सजा मिली? क्या चरण सिंह की मौत रोक सकती थी? क्या समाज बदल सकता है?
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